🌿 Free shipping on orders above ₹499
SS HerbalSS HerbalBetter Living Begins Naturally
बवासीर

बवासीर की जाँच कैसे होती है? कौन-कौन से टेस्ट किए जाते हैं?

बवासीर की जाँच में डॉक्टर लक्षणों, मेडिकल हिस्ट्री और शारीरिक परीक्षण के आधार पर आगे की जाँच तय करते हैं। जानें डिजिटल रेक्टल एग्ज़ाम, एनोस्कोपी, कोलोनोस्कोपी और CBC टेस्ट का उद्देश्य, जाँच से पहले की तैयारी और डॉक्टर से कब संपर्क करना चाहिए।

Dr Suhail SiddiquiBy Dr Suhail Siddiqui, B.A.M.S.Last updated:

Ayurvedic Physician · Reg. No. 77487, UP Board of Indian Medicine

बवासीर की जाँच कैसे होती है? कौन-कौन से टेस्ट किए जाते हैं?

एक नज़र में

  • बवासीर की जाँच कैसे होती है? डॉक्टर लक्षणों, मेडिकल हिस्ट्री और शारीरिक जाँच के आधार पर बवासीर की पहचान करने की कोशिश करते हैं।

  • शुरुआत में कौन-सी जाँच हो सकती है? गुदा के आसपास की जाँच, डिजिटल रेक्टल एग्ज़ाम और ज़रूरत पड़ने पर एनोस्कोपी की जा सकती है।

  • क्या हर मरीज़ को सभी टेस्ट कराने पड़ते हैं? नहीं। जाँच का चुनाव लक्षणों, उम्र, मेडिकल हिस्ट्री और डॉक्टर की सलाह पर निर्भर करता है।

  • कोलोनोस्कोपी या ख़ून की जाँच कब हो सकती है? यदि रक्तस्राव का कारण स्पष्ट न हो या अन्य लक्षण मौजूद हों, तो डॉक्टर अतिरिक्त जाँच की सलाह दे सकते हैं।

  • कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए? मल में ख़ून आने पर इसे केवल बवासीर मानकर न छोड़ें। अधिक या लगातार रक्तस्राव होने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लें।

विषय-सूची

  1. बवासीर की जाँच क्यों ज़रूरी है?

  2. डॉक्टर सबसे पहले क्या पूछते हैं?

  3. बवासीर की शुरुआती जाँच कैसे होती है?

  4. बवासीर जैसे लक्षणों में कौन-कौन सी अतिरिक्त जाँचें हो सकती हैं?

  5. बवासीर की जाँच और दूसरे टेस्ट में क्या अंतर है?

  6. क्या हर मरीज़ को सभी टेस्ट कराने पड़ते हैं?

  7. बवासीर की जाँच से पहले क्या तैयारी करें?

  8. क्या बवासीर की जाँच में दर्द होता है?

  9. किन लक्षणों में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें?

  10. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

  11. निष्कर्ष

बवासीर की जाँच क्यों ज़रूरी है?

बवासीर (Hemorrhoids) में गुदा और निचले मलाशय में मौजूद रक्त वाहिकाओं से जुड़े ऊतकों में सूजन आ सकती है। इसके कारण मल त्याग के समय ख़ून आना, खुजली, असहजता या गुदा के आसपास गाँठ महसूस होना जैसे लक्षण हो सकते हैं।

हालाँकि, इन लक्षणों का कारण हमेशा बवासीर ही नहीं होता। गुदा में दरार (Anal Fissure), आंतों की कुछ बीमारियाँ और पाचन तंत्र से जुड़ी अन्य समस्याएँ भी ऐसे लक्षण पैदा कर सकती हैं।

इसलिए सही कारण जानने के लिए डॉक्टर से जाँच कराना ज़रूरी है। जाँच के बाद डॉक्टर तय करते हैं कि केवल शारीरिक परीक्षण पर्याप्त है या किसी अतिरिक्त टेस्ट की आवश्यकता है।

बवासीर के सामान्य कारणों, लक्षणों और देखभाल से जुड़ी अतिरिक्त जानकारी के लिए हमारा लेख बवासीर के कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक देखभाल भी पढ़ सकते हैं।

डॉक्टर सबसे पहले क्या पूछते हैं?

जाँच शुरू करने से पहले डॉक्टर मरीज़ के लक्षणों और मेडिकल हिस्ट्री के बारे में जानकारी लेते हैं। इससे समस्या की प्रकृति समझने और आगे की जाँच तय करने में मदद मिलती है।

डॉक्टर आपसे ये सवाल पूछ सकते हैं:

  • ख़ून कितने समय से आ रहा है और कितनी बार आता है?

  • ख़ून मल पर दिखाई देता है, टॉयलेट पेपर पर आता है या टॉयलेट में गिरता है?

  • मल त्याग के समय दर्द, खुजली या गाँठ महसूस होती है या नहीं?

  • कब्ज़, दस्त या मल त्याग की आदतों में कोई बदलाव हुआ है या नहीं?

  • क्या पेट में दर्द, बिना कारण वज़न कम होना या कमज़ोरी जैसे लक्षण हैं?

  • क्या आप ख़ून पतला करने वाली दवाएँ या कोई अन्य नियमित दवा लेते हैं?

  • क्या पहले भी ऐसी समस्या हुई है या परिवार में आंतों से जुड़ी कोई गंभीर बीमारी रही है?

इन सवालों के जवाब डॉक्टर को आगे की जाँच के बारे में निर्णय लेने में मदद करते हैं।

बवासीर के लक्षणों और रक्तस्राव से जुड़ी अलग-अलग स्थितियों के बारे में अधिक जानने के लिए हमारा लेख ख़ूनी और बादी बवासीर में अंतर भी पढ़ सकते हैं। ध्यान रखें कि केवल लक्षणों के आधार पर बीमारी की पुष्टि नहीं की जा सकती।

बवासीर की शुरुआती जाँच कैसे होती है?

लक्षणों और मेडिकल हिस्ट्री को समझने के बाद डॉक्टर शारीरिक जाँच कर सकते हैं। इसमें गुदा के आसपास का निरीक्षण और ज़रूरत के अनुसार कुछ अन्य परीक्षण शामिल हो सकते हैं।

गुदा के आसपास की जाँच (External Examination)

इस जाँच में डॉक्टर गुदा के बाहरी हिस्से को देखकर सूजन, गाँठ, त्वचा में बदलाव या किसी अन्य असामान्यता की जाँच करते हैं।

इससे बाहरी बवासीर या गुदा के आसपास की कुछ दूसरी समस्याओं का पता लगाने में मदद मिल सकती है। हालाँकि, केवल बाहरी निरीक्षण से हर प्रकार की बवासीर की पहचान नहीं हो पाती।

डिजिटल रेक्टल एग्ज़ाम (Digital Rectal Examination)

इस जाँच में डॉक्टर दस्ताने पहनकर और चिकनाई वाले जेल का इस्तेमाल करके एक उँगली से गुदा और मलाशय के निचले हिस्से की जाँच करते हैं।

इससे गाँठ, दर्द या अन्य असामान्य बदलावों का पता लगाने में मदद मिल सकती है। लेकिन केवल इस जाँच से अंदरूनी बवासीर की पुष्टि हमेशा नहीं हो पाती। इसलिए डॉक्टर ज़रूरत के अनुसार एनोस्कोपी या अन्य जाँच की सलाह दे सकते हैं।

एनोस्कोपी (Anoscopy)

एनोस्कोपी में एनोस्कोप नाम के एक छोटे उपकरण की मदद से गुदा नलिका और मलाशय के निचले हिस्से को देखा जाता है।

इससे अंदरूनी बवासीर या उस क्षेत्र में मौजूद कुछ अन्य समस्याओं की पहचान करने में मदद मिल सकती है। यह जाँच डॉक्टर की सलाह और मरीज़ की स्थिति के अनुसार की जाती है।

बवासीर जैसे लक्षणों में कौन-कौन सी अतिरिक्त जाँचें हो सकती हैं?

हर मरीज़ को अतिरिक्त टेस्ट कराने की ज़रूरत नहीं होती। यदि शुरुआती जाँच से समस्या का कारण स्पष्ट न हो या कुछ विशेष लक्षण मौजूद हों, तो डॉक्टर निम्नलिखित जाँचों की सलाह दे सकते हैं।

प्रॉक्टोस्कोपी (Proctoscopy)

प्रॉक्टोस्कोपी में एक विशेष उपकरण की मदद से मलाशय के अंदरूनी हिस्से को देखा जाता है। इससे वहाँ मौजूद असामान्य बदलावों का पता लगाने में मदद मिल सकती है।

सिग्मॉइडोस्कोपी (Sigmoidoscopy)

यदि लक्षणों या शुरुआती जाँच से रक्तस्राव का कारण स्पष्ट न हो या मलाशय और बड़ी आँत के निचले हिस्से की अन्य समस्या का संदेह हो, तो डॉक्टर सिग्मॉइडोस्कोपी जैसी जाँच की सलाह दे सकते हैं।

प्रॉक्टोस्कोपी और सिग्मॉइडोस्कोपी अलग-अलग जाँच हैं। इनमें से कौन-सी जाँच ज़रूरी है, यह मरीज़ के लक्षणों और डॉक्टर के आकलन पर निर्भर करता है।

कोलोनोस्कोपी (Colonoscopy)

कोलोनोस्कोपी में एक लचीले कैमरे वाले उपकरण से मलाशय और बड़ी आँत के अंदरूनी हिस्से को देखा जाता है।

डॉक्टर कुछ परिस्थितियों में इसकी सलाह दे सकते हैं, जैसे:

  • मल में ख़ून आने का कारण स्पष्ट न होना।

  • मल त्याग की आदतों में लगातार बदलाव होना।

  • पेट में लगातार दर्द या बिना कारण वज़न कम होना।

  • उम्र, पारिवारिक इतिहास या अन्य जोखिमों के कारण बड़ी आँत की जाँच आवश्यक होना।

हर उस व्यक्ति को कोलोनोस्कोपी की आवश्यकता नहीं होती जिसे बवासीर के लक्षण हों। इसकी ज़रूरत का निर्णय डॉक्टर करते हैं।

ख़ून की जाँच — कम्प्लीट ब्लड काउंट (CBC)

यदि बार-बार या अधिक मात्रा में ख़ून आने की शिकायत हो, तो डॉक्टर सीबीसी (Complete Blood Count) की सलाह दे सकते हैं।

इस जाँच से हीमोग्लोबिन और ख़ून की अलग-अलग कोशिकाओं के बारे में जानकारी मिलती है। इससे रक्तस्राव के कारण होने वाली एनीमिया (ख़ून की कमी) का पता लगाने में मदद मिल सकती है।

ध्यान दें कि सीबीसी बवासीर की पुष्टि करने वाला टेस्ट नहीं है। इसका उपयोग मरीज़ की स्थिति का आकलन करने के लिए किया जा सकता है।

बवासीर की जाँच और दूसरे टेस्ट में क्या अंतर है?

अलग-अलग जाँचों का उद्देश्य अलग होता है। डॉक्टर लक्षणों और शुरुआती परीक्षण के आधार पर तय करते हैं कि किस जाँच की ज़रूरत है।

जाँच

इसका मुख्य उद्देश्य

बाहरी जाँच

गुदा के आसपास सूजन, गाँठ या त्वचा में बदलाव देखना

डिजिटल रेक्टल एग्ज़ाम

गुदा और मलाशय के निचले हिस्से में असामान्य बदलाव महसूस करना

एनोस्कोपी

गुदा नलिका और मलाशय के निचले हिस्से को देखना

प्रॉक्टोस्कोपी

मलाशय के अंदरूनी हिस्से की जाँच करना

सिग्मॉइडोस्कोपी

मलाशय और बड़ी आँत के निचले हिस्से की जाँच करना

कोलोनोस्कोपी

मलाशय और बड़ी आँत के अंदरूनी हिस्से की जाँच करना

सीबीसी (CBC)

हीमोग्लोबिन और ख़ून की कोशिकाओं की जाँच करना

ये सभी जाँचें हर मरीज़ के लिए आवश्यक नहीं हैं। सही विकल्प का चुनाव लक्षणों, मेडिकल हिस्ट्री और डॉक्टर की सलाह के अनुसार किया जाता है।

क्या हर मरीज़ को सभी टेस्ट कराने पड़ते हैं?

नहीं। बवासीर की जाँच के लिए हर मरीज़ को सभी टेस्ट कराने की आवश्यकता नहीं होती।

यदि लक्षण और शुरुआती शारीरिक जाँच से समस्या का कारण स्पष्ट हो जाता है, तो डॉक्टर अतिरिक्त जाँच के बिना भी आगे की सलाह दे सकते हैं। लेकिन यदि रक्तस्राव बार-बार हो, कारण स्पष्ट न हो या अन्य चिंताजनक लक्षण हों, तो अतिरिक्त जाँच की ज़रूरत पड़ सकती है।

डॉक्टर की सलाह के बिना किसी जाँच को ज़रूरी या गैर-ज़रूरी न मानें। सही निर्णय मरीज़ की स्थिति के अनुसार ही लिया जाना चाहिए।

बवासीर की जाँच से पहले क्या तैयारी करें?

शुरुआती शारीरिक जाँच के लिए आमतौर पर विशेष तैयारी की आवश्यकता नहीं होती। हालाँकि, कुछ जाँचों में अलग तैयारी करनी पड़ सकती है।

जाँच से पहले इन बातों का ध्यान रखें:

  • अपने लक्षणों की जानकारी डॉक्टर को स्पष्ट रूप से दें।

  • पहले कराई गई जाँचों और रिपोर्टों को साथ ले जाएँ।

  • अपनी नियमित दवाओं और पहले से मौजूद बीमारियों के बारे में बताएँ।

  • यदि आप ख़ून पतला करने वाली दवा लेते हैं, तो डॉक्टर को ज़रूर बताएँ।

  • कोलोनोस्कोपी या किसी अन्य विशेष जाँच से पहले दिए गए निर्देशों का पालन करें।

यदि किसी जाँच से पहले दवा रोकने या बदलने की आवश्यकता हो, तो ऐसा केवल डॉक्टर की सलाह पर करें।

क्या बवासीर की जाँच में दर्द होता है?

बवासीर की जाँच में होने वाली असुविधा व्यक्ति और जाँच के प्रकार के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। बाहरी जाँच में आमतौर पर अधिक परेशानी नहीं होती, लेकिन डिजिटल रेक्टल एग्ज़ाम या एनोस्कोपी के दौरान कुछ लोगों को दबाव या हल्की असुविधा महसूस हो सकती है।

यदि पहले से दर्द, सूजन या गुदा में दरार जैसी समस्या हो, तो जाँच के दौरान परेशानी बढ़ सकती है। इसलिए डॉक्टर को पहले ही बता दें कि आपको दर्द या संवेदनशीलता महसूस हो रही है।

यदि किसी जाँच के दौरान तेज़ दर्द हो, तो डॉक्टर को तुरंत बताएँ। जाँच से पहले अपनी चिंताओं और तैयारी से जुड़े सवाल पूछना भी उचित है।

किन लक्षणों में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें?

मल में ख़ून आने के हर मामले को बवासीर मानना सही नहीं है। कुछ लक्षणों में जल्द चिकित्सा जाँच आवश्यक हो सकती है।

इन स्थितियों में डॉक्टर से संपर्क करें:

  • मल में बार-बार ख़ून आना या रक्तस्राव बढ़ना।

  • मल का काला और तारकोल जैसा दिखाई देना।

  • मल त्याग की आदतों में लगातार बदलाव होना।

  • बिना कारण वज़न कम होना।

  • पेट में लगातार दर्द होना।

  • बार-बार चक्कर आना या असामान्य कमज़ोरी महसूस होना।

यदि बहुत अधिक या लगातार ख़ून आ रहा हो, बड़े रक्त के थक्के निकल रहे हों, बेहोशी हो या बेहोशी जैसा महसूस हो, तो तुरंत चिकित्सा सहायता लें। ऐसी स्थिति में सामान्य अपॉइंटमेंट का इंतज़ार न करें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

बवासीर की जाँच कैसे होती है?

डॉक्टर पहले लक्षणों और मेडिकल हिस्ट्री के बारे में पूछते हैं। इसके बाद गुदा के आसपास की जाँच, डिजिटल रेक्टल एग्ज़ाम या ज़रूरत पड़ने पर एनोस्कोपी की जा सकती है।

बवासीर की पुष्टि के लिए कौन-सा टेस्ट होता है?

हर मरीज़ के लिए एक ही टेस्ट आवश्यक नहीं होता। डॉक्टर लक्षणों और शारीरिक जाँच के आधार पर एनोस्कोपी या अन्य जाँच की सलाह दे सकते हैं।

क्या बवासीर की जाँच के लिए कोलोनोस्कोपी ज़रूरी है?

नहीं। कोलोनोस्कोपी हर मरीज़ के लिए आवश्यक नहीं है। रक्तस्राव का कारण स्पष्ट न होने, मल त्याग की आदतों में बदलाव या अन्य जोखिमों की स्थिति में डॉक्टर इसकी सलाह दे सकते हैं।

क्या ख़ून की जाँच से बवासीर का पता चल जाता है?

नहीं। सीबीसी जैसी ख़ून की जाँच बवासीर की पुष्टि नहीं करती। इससे हीमोग्लोबिन और ख़ून की कोशिकाओं के बारे में जानकारी मिलती है तथा रक्तस्राव से जुड़ी ख़ून की कमी का पता लगाने में मदद मिल सकती है।

मल में ख़ून आने पर क्या करना चाहिए?

मल में ख़ून आने पर डॉक्टर से जाँच कराएँ। इसे केवल बवासीर का लक्षण मानकर न छोड़ें, क्योंकि इसके अन्य कारण भी हो सकते हैं। अधिक या लगातार रक्तस्राव होने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लें।

निष्कर्ष

बवासीर की जाँच आमतौर पर लक्षणों, मेडिकल हिस्ट्री और शारीरिक परीक्षण से शुरू होती है। ज़रूरत के अनुसार डॉक्टर एनोस्कोपी, प्रॉक्टोस्कोपी, सिग्मॉइडोस्कोपी, कोलोनोस्कोपी या सीबीसी जैसी जाँचों की सलाह दे सकते हैं।

हर मरीज़ को सभी टेस्ट कराने की आवश्यकता नहीं होती। जाँच का चुनाव व्यक्ति के लक्षणों और स्वास्थ्य स्थिति के आधार पर किया जाता है। यदि मल में ख़ून आ रहा है या लक्षण लगातार बने हुए हैं, तो सही कारण जानने के लिए डॉक्टर से सलाह लें।

बवासीर की जाँच के साथ-साथ कब्ज़ से बचाव और खान-पान से जुड़ी जानकारी भी उपयोगी हो सकती है। बवासीर में क्या खाना चाहिए और किन खाद्य पदार्थों को सीमित रखना बेहतर है, यह जानने के लिए हमारा लेख बवासीर में क्या खाएँ और क्या न खाएँ? पढ़ें।

बवासीर से जुड़े आयुर्वेदिक उत्पादों की जानकारी

बवासीर से जुड़े आयुर्वेदिक उत्पादों के बारे में जानकारी लेते समय उनकी सामग्री, उपयोग संबंधी निर्देशों और सावधानियों को ध्यान से पढ़ें। किसी भी उत्पाद का इस्तेमाल करने से पहले अपनी स्वास्थ्य स्थिति और पहले से ली जा रही दवाओं को ध्यान में रखें। मल में ख़ून आने या लगातार लक्षण बने रहने पर डॉक्टर से जाँच कराना ज़रूरी है।

मेडिकल डिस्क्लेमर

यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। यह डॉक्टर की जाँच, निदान या व्यक्तिगत चिकित्सकीय सलाह का विकल्प नहीं है। मल में ख़ून आने या अन्य चिंताजनक लक्षणों की स्थिति में योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से संपर्क करें।

स्रोत 

  1. NIDDK — Diagnosis of Hemorrhoids: बवासीर की पहचान और जाँच के तरीकों की जानकारी।

  2. NIDDK — Diagnosis of Gastrointestinal Bleeding: पाचन तंत्र से रक्तस्राव की जाँच और ख़ून की जाँच से संबंधित जानकारी।

  3. NIDDK — Colonoscopy: कोलोनोस्कोपी के उपयोग और जाँच से संबंधित जानकारी।

  4. NHS — Piles (Haemorrhoids): बवासीर के लक्षण और चिकित्सा सहायता से संबंधित जानकारी।

  5. NHS — Rectal Bleeding: मल में ख़ून आने और तत्काल चिकित्सा सहायता की आवश्यकता वाले लक्षणों की जानकारी।

Disclaimer: This article is for general informational purposes only and is not a substitute for professional medical advice. Always consult a qualified Ayurvedic practitioner or physician before acting on any information here.

About the Author

Dr Suhail Siddiqui
Dr Suhail Siddiqui

डॉ. सुहैल सिद्दीकी (Dr Suhail Siddiqui), B.A.M.S., एक योग्य एवं पंजीकृत आयुर्वेदिक चिकित्सक हैं। उन्होंने चौधरी ब्रह्म प्रकाश आयुर्वेद चरक संस्थान (Choudhary Brahm Prakash Ayurved Charak Sansthan), गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय से वर्ष 2024 में बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एंड सर्जरी (B.A.M.S.) की डिग्री प्राप्त की है। वे उत्तर प्रदेश बोर्ड ऑफ इंडियन मेडिसिन (UP Board of Indian Medicine) में पंजीकृत चिकित्सक हैं — रजिस्ट्रेशन संख्या 77487 — और वर्तमान में SS Herbal India के साथ आयुर्वेदिक चिकित्सक (Ayurvedic Physician) के रूप में कार्यरत हैं। उन्हें आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा, जीवनशैली प्रबंधन और रोगों की रोकथाम से जुड़े विषयों में विशेष रुचि है। डॉ. सुहैल मुख्य रूप से कान, नाक और गला (ENT) से संबंधित समस्याओं, टिनिटस (Tinnitus), कान में फंगल इंफेक्शन, हकलाना, पथरी, मधुमेह, पाचन संबंधी समस्याओं तथा अन्य सामान्य स्वास्थ्य विषयों पर आयुर्वेद आधारित जानकारी साझा करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल स्वास्थ्य विषयों को सरल भाषा में समझाकर लोगों तक विश्वसनीय और उपयोगी जानकारी पहुँचाना है। SS Herbal India पर प्रकाशित लेखों के लिए डॉ. सुहैल आयुर्वेदिक ग्रंथों, उपलब्ध आधुनिक शोध, चिकित्सा साहित्य तथा विश्वसनीय स्वास्थ्य स्रोतों का अध्ययन करते हैं। उनके नाम से प्रकाशित होने वाला प्रत्येक लेख प्रकाशन से पहले उनकी समीक्षा से होकर जाता है। प्रत्येक लेख का उद्देश्य पाठकों को संतुलित, तथ्य-आधारित और उपयोगी स्वास्थ्य जानकारी प्रदान करना है। यह जानकारी केवल शैक्षणिक एवं जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित की जाती है और किसी भी प्रकार से व्यक्तिगत चिकित्सकीय सलाह का विकल्प नहीं है। डॉ. सुहैल सिद्दीकी का लक्ष्य लोगों को सही स्वास्थ्य जानकारी देकर उन्हें स्वस्थ जीवनशैली अपनाने, रोगों की बेहतर समझ विकसित करने और अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बनने में सहायता करना है।

Read More →
SS Herbal is a brand of SHAGUNVEDA GLOBAL PVT. LTD.©Copyright 2026 SS Herbal