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शरीर में गांठ दिखे तो क्या करें? पहचान, जाँच और अगले कदम

शरीर में नई गांठ दिखने पर घबराने के बजाय उसके आकार, स्थान और बदलावों पर ध्यान देना जरूरी है। जानें गांठ की पहचान, जांच और डॉक्टर से कब सलाह लेनी चाहिए।

Dr Suhail SiddiquiWritten By Dr Suhail SiddiquiPublished: · 17 min read
शरीर में गांठ दिखे तो क्या करें? पहचान, जाँच और अगले कदम

एक नज़र में (At a Glance)

  • शरीर पर नई गांठ दिखे तो घबराने के बजाय उसके आकार, जगह और उसमें हो रहे बदलाव पर ध्यान दें।

  • हर गांठ का कारण एक जैसा नहीं होता। यह लिपोमा, सिस्ट, सूजी हुई लिम्फ नोड या किसी दूसरी वजह से हो सकती है।

  • गांठ को खुद से दबाने, छेदने या काटने की कोशिश न करें, क्योंकि इससे चोट या संक्रमण का खतरा हो सकता है।

  • जरूरत पड़ने पर डॉक्टर शारीरिक जाँच के साथ अल्ट्रासाउंड, अन्य इमेजिंग टेस्ट या बायोप्सी जैसी जाँच की सलाह दे सकते हैं। कौन-सी जाँच ज़रूरी है, यह गांठ की स्थिति पर निर्भर करता है।

  • सिर्फ दर्द न होने का मतलब यह नहीं है कि गांठ हमेशा सामान्य है। उसके आकार, बनावट और समय के साथ होने वाले बदलाव को भी ध्यान में रखना चाहिए।

  • अगर गांठ बनी रहती है, बढ़ती है, सख्त या स्थिर महसूस होती है, या उसमें कोई असामान्य बदलाव दिखाई देता है, तो डॉक्टर से जाँच करवाना उचित है। 

विषय सूची

  1. शरीर में नई गांठ दिखे तो सबसे पहले क्या करें?

  2. हर गांठ एक जैसी क्यों नहीं होती?

  3. गांठ को समझने के लिए किन बातों पर ध्यान दें?

  4. गांठ की फोटो और आकार नोट करना क्यों उपयोगी हो सकता है?

  5. गांठ की जाँच के दौरान डॉक्टर क्या देखते हैं?

  6. गांठ के लिए कौन-सी जाँच की ज़रूरत पड़ सकती है?

  7. क्या हर गांठ का इलाज ज़रूरी होता है?

  8. गांठ को खुद से दबाना, छेदना या काटना क्यों नहीं चाहिए?

  9. कब गांठ को डॉक्टर को दिखाना चाहिए?

  10. शरीर के अलग-अलग हिस्सों में गांठ होने पर क्या ध्यान रखें?

  11. क्या गांठ दिखने का मतलब कैंसर होता है?

  12. आयुर्वेदिक दृष्टिकोण और सामान्य स्वस्थ जीवनशैली

  13. डॉक्टर से मिलने से पहले कौन-सी जानकारी तैयार रखें?

  14. गांठ को लेकर आम गलतफहमियां

  15. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

  16. निष्कर्ष

शरीर में नई गांठ दिखे तो सबसे पहले क्या करें?

शरीर में कोई नई गांठ महसूस हो तो सबसे पहले घबराने के बजाय उसे ध्यान से देखें और उसके बदलावों पर नज़र रखें। हर गांठ गंभीर या कैंसर वाली हो, ऐसा ज़रूरी नहीं है। गांठ कई सामान्य कारणों से भी हो सकती है।

सबसे पहले इन बातों पर ध्यान दें:

  • गांठ शरीर के किस हिस्से में है।

  • यह पहली बार कब महसूस हुई।

  • इसका आकार लगभग कितना है।

  • क्या इसका आकार समय के साथ बढ़ रहा है।

  • गांठ नरम है या सख्त।

  • छूने पर दर्द, लालिमा या गर्माहट है या नहीं।

गांठ को खुद से दबाने, छेदने, काटने या किसी घरेलू तरीके से हटाने की कोशिश न करें। अगर गांठ बनी रहती है, बढ़ती है या उसमें कोई असामान्य बदलाव दिखाई देता है, तो डॉक्टर से जाँच करवाना बेहतर है।

हर गांठ एक जैसी क्यों नहीं होती?

शरीर में गांठ बनने के कई कारण हो सकते हैं। इसलिए केवल गांठ देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि वह किस वजह से बनी है।

कुछ सामान्य कारणों में शामिल हैं:

  • लिपोमा (Lipoma): त्वचा के नीचे बनने वाली वसा की एक सामान्य गांठ, जो आमतौर पर नरम होती है और धीरे-धीरे बढ़ सकती है। लिपोमा के कारण, सामान्य लक्षण और देखभाल के बारे में विस्तार से जानने के लिए हमारा लिपोमा पर विस्तृत गाइड पढ़ें। 

  • सिस्ट (Cyst): त्वचा के नीचे बनी थैली जैसी संरचना, जिसमें तरल या अन्य पदार्थ हो सकता है।

  • फोड़ा (Abscess): संक्रमण के कारण बनने वाली दर्दनाक या सूजी हुई गांठ, जिसमें कभी-कभी पस हो सकता है। 

  • सूजे हुई लिम्फ नोड्स: संक्रमण या शरीर की किसी प्रतिक्रिया के कारण गर्दन, बगल या शरीर के दूसरे हिस्सों में सूजन महसूस हो सकती है।

इनके अलावा भी गांठ के कई दूसरे कारण हो सकते हैं। इसलिए सिर्फ छूकर या देखकर सही कारण बताना संभव नहीं होता। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर शारीरिक जाँच और अन्य जाँचों की मदद लेते हैं।

गांठ को समझने के लिए किन बातों पर ध्यान दें?

नई गांठ महसूस होने पर कुछ आसान जानकारियाँ नोट करना डॉक्टर को स्थिति समझने में मदद कर सकता है।

गांठ कहाँ है?

ध्यान दें कि गांठ शरीर के किस हिस्से में है, जैसे गर्दन, बगल, छाती, पेट, हाथ या पैर।

गांठ कब महसूस हुई?

यह पहली बार कब दिखाई दी या महसूस हुई, इसकी तारीख या लगभग समय याद रखने की कोशिश करें।

आकार कितना है?

गांठ का लगभग आकार नोट करें। उदाहरण के लिए, वह मटर के दाने जितनी है या उससे बड़ी।

क्या आकार बदल रहा है?

समय के साथ उसमें कोई बदलाव हो रहा है या नहीं, इस पर ध्यान दें। अगर वह लगातार बड़ी हो रही है, तो डॉक्टर से सलाह लेना उचित है।

गांठ नरम है या सख्त?

हल्के से महसूस करने पर उसकी बनावट कैसी लगती है, यह जानकारी डॉक्टर के लिए उपयोगी हो सकती है।

क्या गांठ अपनी जगह से हिलती है?

गांठ हल्के स्पर्श पर कुछ हिलती है या एक ही जगह स्थिर महसूस होती है, इसे भी नोट किया जा सकता है। हालांकि, केवल इस आधार पर किसी बीमारी का अनुमान नहीं लगाना चाहिए।

दर्द, लालिमा या गर्माहट है या नहीं?

गांठ के आसपास दर्द, लालिमा, सूजन या गर्माहट जैसे बदलाव दिखाई दे रहे हैं या नहीं, यह भी ध्यान दें।

ध्यान दें: ये बातें केवल डॉक्टर को सही जानकारी देने में मदद करती हैं। इनके आधार पर खुद से गांठ का निदान करना सही नहीं है। अगर गांठ बनी रहती है, बढ़ती है या उसमें कोई असामान्य बदलाव दिखाई देता है, तो योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से जाँच करवाएँ।

गांठ की फोटो और आकार नोट करना क्यों उपयोगी हो सकता है?

अगर संभव हो, तो गांठ की साधारण फोटो लेकर तारीख के साथ सुरक्षित रखना और उसका लगभग आकार नोट करना उपयोगी हो सकता है। इससे समय के साथ दिखने वाले बदलावों को नोट करना आसान हो सकता है। 

उदाहरण के लिए, आप ध्यान रख सकते हैं:

  • गांठ का लगभग आकार कितना है।

  • फोटो कब ली गई थी।

  • बाद में आकार या दिखावट में कोई बदलाव हुआ या नहीं।

  • दर्द, लालिमा या सूजन जैसी कोई नई समस्या जुड़ी है या नहीं।

यह जानकारी डॉक्टर से बात करते समय भी काम आ सकती है, खासकर अगर पहली जाँच और अगली जाँच के बीच कुछ समय का अंतर हो।

ध्यान दें: फोटो और आकार नोट करना केवल बदलाव पर नज़र रखने का तरीका है। इससे गांठ का कारण या बीमारी तय नहीं की जा सकती।

गांठ की जाँच के दौरान डॉक्टर क्या देखते हैं?

डॉक्टर आमतौर पर गांठ और आसपास के हिस्से की शारीरिक जाँच करते हैं। इसमें गांठ की जगह, आकार और बनावट जैसी बातों को देखा जाता है।

आमतौर पर डॉक्टर इन बातों पर ध्यान दे सकते हैं:

  • गांठ कहाँ है और कितनी बड़ी है

  • वह नरम है या सख्त

  • हल्के स्पर्श पर वह हिलती है या एक जगह स्थिर महसूस होती है।

  • आसपास की त्वचा में लालिमा, सूजन या कोई दूसरा बदलाव है या नहीं।

  • छूने पर दर्द या गर्माहट महसूस होती है या नहीं।

  • गांठ कब से है और समय के साथ उसमें कोई बदलाव आया है या नहीं।

इन जानकारियों और शारीरिक जाँच के आधार पर डॉक्टर यह तय कर सकते हैं कि आगे किसी जाँच की ज़रूरत है या नहीं। 

गांठ के लिए कौन-सी जाँच की ज़रूरत पड़ सकती है?

हर व्यक्ति में एक जैसी जाँच की जरूरत नहीं होती। डॉक्टर आपकी स्थिति, गांठ की जगह और जाँच में मिले संकेतों के आधार पर आगे की जाँच तय करते हैं।

अल्ट्रासाउंड (Ultrasound)

कुछ गांठों में अल्ट्रासाउंड की मदद से अंदर की बनावट को समझा जा सकता है। इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि गांठ ठोस है या उसमें तरल पदार्थ मौजूद है।

अन्य इमेजिंग टेस्ट (Imaging Tests)

स्थिति के अनुसार डॉक्टर MRI या CT स्कैन जैसी जाँच की सलाह भी दे सकते हैं। इनकी जरूरत गांठ की जगह, आकार और अन्य लक्षणों पर निर्भर करती है।

बायोप्सी (Biopsy)

कुछ मामलों में गांठ के छोटे से हिस्से का नमूना लेकर प्रयोगशाला में जाँच की जाती है। इसे बायोप्सी कहा जाता है। इससे गांठ की प्रकृति के बारे में अधिक स्पष्ट जानकारी मिल सकती है।

महत्वपूर्ण: हर गांठ में अल्ट्रासाउंड, MRI, CT स्कैन या बायोप्सी की जरूरत नहीं होती। कौन-सी जाँच करनी है, यह डॉक्टर शारीरिक जाँच और आपकी स्थिति को देखकर तय करते हैं। इसलिए खुद से जाँच करवाने के बजाय पहले योग्य डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।

क्या हर गांठ का इलाज ज़रूरी होता है?

नहीं, हर गांठ में तुरंत उपचार या उसे हटाने की आवश्यकता नहीं होती। कुछ गांठें गैर-कैंसरकारी कारणों से भी हो सकती हैं। अगर डॉक्टर की जाँच में कोई गंभीर समस्या न दिखे और गांठ से दर्द या दूसरी परेशानी न हो, तो कुछ मामलों में समय-समय पर उस पर नज़र रखने की सलाह दी जाती है।

वहीं, अगर उसमें कोई बदलाव दिखाई दे या वह परेशानी पैदा करे, तो डॉक्टर आगे की जाँच या इलाज की सलाह दे सकते हैं। यह फैसला गांठ के कारण, उसके आकार, जगह, लक्षण और जाँच के नतीजों पर निर्भर करता है।

गांठ को खुद से दबाना, छेदना या काटना क्यों नहीं चाहिए?

नई गांठ देखकर उसे दबाने या किसी नुकीली चीज़ से खोलने की कोशिश करना सही नहीं है। बिना यह जाने कि वह किस कारण से बनी है, उसके साथ छेड़छाड़ करने से समस्या बढ़ सकती है।

इससे:

  • त्वचा पर चोट या घाव हो सकता है।

  • संक्रमण होने का ख़तरा बढ़ सकता है

  • आसपास की त्वचा में सूजन या जलन हो सकती है।

  • सही जाँच में देरी हो सकती है।

इसलिए गांठ को खुद से निकालने या फोड़ने के बजाय पहले डॉक्टर से उसकी जाँच करवाना बेहतर है।

कब गांठ को डॉक्टर को दिखाना चाहिए?

हर नई गांठ गंभीर नहीं होती, लेकिन कुछ बदलावों को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। डॉक्टर से जाँच करवाना खास तौर पर उचित है, अगर:

  • गांठ का कारण स्पष्ट न हो और वह नई दिखाई दी हो

  • उसका आकार लगातार बढ़ रहा हो

  • उसमें दर्द, लालिमा, सूजन या गर्माहट हो।

  • वह बहुत सख्त या एक जगह स्थिर महसूस हो।

  • गांठ 2 सप्ताह से अधिक समय तक बनी रहे या कम न हो। 

  • उसके साथ बुखार, संक्रमण जैसे लक्षण या कोई दूसरा असामान्य लक्षण भी हो। 

इन संकेतों का मतलब यह नहीं है कि गांठ गंभीर बीमारी की वजह से ही है। लेकिन ऐसे बदलाव होने पर समय पर जाँच करवाने से सही कारण समझने में मदद मिल सकती है।

अगर गांठ में लगातार बदलाव दिखाई दे रहे हैं, तो लिपोमा और दूसरी गांठों के बीच अंतर समझने के लिए गांठ के चेतावनी संकेतों और जाँच की जानकारी भी पढ़ सकते हैं। 

महत्वपूर्ण: केवल गांठ को देखकर या छूकर खुद से यह तय न करें कि वह सामान्य है या गंभीर। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर शारीरिक जाँच और अन्य टेस्ट की मदद से कारण का पता लगाते हैं।

शरीर के अलग-अलग हिस्सों में गांठ होने पर क्या ध्यान रखें?

गांठ शरीर के अलग-अलग हिस्सों में हो सकती है। उसकी जगह के आधार पर कारण अलग हो सकता है, इसलिए केवल स्थान देखकर खुद से निष्कर्ष निकालना सही नहीं है।

गर्दन में गांठ

गर्दन में सूजन या गांठ कई बार लिम्फ नोड्स के बढ़ने से हो सकती है। ऐसा सामान्य संक्रमण के दौरान भी हो सकता है। अगर यह बढ़ती जाए, सख्त या स्थिर महसूस हो, या अपेक्षित समय में कम न हो, तो डॉक्टर से जाँच करवाना बेहतर है। 

बगल में गांठ

बगल में महसूस होने वाली गांठ भी कई कारणों से हो सकती है, जिनमें सूजे हुए लिम्फ नोड्स शामिल हैं। इसका कारण केवल छूकर तय नहीं किया जा सकता। गांठ बनी रहने या बढ़ने पर चिकित्सकीय जाँच कराना उचित है।

हाथ या कलाई में गांठ

हाथ या कलाई के पास बनी गांठ कभी-कभी जोड़ या टेंडन के आसपास की संरचनाओं से जुड़ी हो सकती है। अगर इसमें दर्द हो, आकार बढ़े या हाथ की सामान्य गतिविधियों में परेशानी हो, तो डॉक्टर से सलाह लें।

त्वचा के नीचे गांठ

त्वचा के नीचे महसूस होने वाली गांठ के कई कारण हो सकते हैं। इनमें लिपोमा (Lipoma) और सिस्ट (Cyst) जैसी सामान्य स्थितियाँ शामिल हो सकती हैं। सही कारण जानने के लिए डॉक्टर जरूरत के अनुसार जाँच कर सकते हैं।

स्तन में गांठ

स्तन में नई गांठ महसूस होने पर उसे नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। स्तन में गांठ के कई गैर-कैंसरकारी कारण हो सकते हैं, लेकिन किसी नई या बनी रहने वाली गांठ की जाँच डॉक्टर से करवाना उचित है। 

ध्यान दें: गांठ की जगह, आकार या छूने पर महसूस होने वाली बनावट से अकेले यह तय नहीं किया जा सकता कि वह सामान्य है या नहीं। सही कारण जानने के लिए डॉक्टर की चिकित्सकीय जाँच आवश्यक हो सकती है। 

क्या गांठ दिखने का मतलब कैंसर होता है?

नहीं, हर गांठ कैंसर नहीं होती। शरीर में गांठ बनने के कई गैर-कैंसरकारी कारण हो सकते हैं, जैसे लिपोमा, सिस्ट या सूजे हुए लिम्फ नोड्स।

फिर भी, किसी ऐसी गांठ को केवल देखकर सामान्य मान लेना सही नहीं है जिसका कारण पता न हो या जिसमें समय के साथ बदलाव हो रहा हो।

खासकर अगर गांठ:

  • लगातार बनी रहे,

  • धीरे-धीरे या तेज़ी से बढ़े,

  • बहुत सख्त या स्थिर लगे,

  • उसके आसपास त्वचा में बदलाव दिखाई दे,

  • दर्द, लालिमा या गर्माहट के साथ हो,

तो डॉक्टर से जाँच करवाना बेहतर है।

ज़रूरी बात: केवल गांठ के लक्षणों से कैंसर की पुष्टि या उसे खारिज नहीं किया जा सकता। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर शारीरिक जाँच के साथ अल्ट्रासाउंड, अन्य इमेजिंग टेस्ट या बायोप्सी जैसी जाँच की सलाह दे सकते हैं।

आयुर्वेदिक दृष्टिकोण और सामान्य स्वस्थ जीवनशैली

आयुर्वेद में सामान्य स्वास्थ्य और संतुलित जीवनशैली पर ध्यान देने की बात कही जाती है। इसके लिए रोज़मर्रा की कुछ आसान आदतें अपनाई जा सकती हैं:

  • संतुलित आहार: पौष्टिक और नियमित भोजन लें।

  • नियमित दिनचर्या: सोने, उठने और भोजन का समय नियमित रखने की कोशिश करें।

  • पर्याप्त नींद और आराम: शरीर को पर्याप्त आराम देना सामान्य स्वास्थ्य के लिए ज़रूरी है।

  • नियमित शारीरिक गतिविधि: अपनी क्षमता के अनुसार हल्की या सामान्य शारीरिक गतिविधि करें।

यदि आप हर्बल उत्पाद के बारे में जानकारी लेना चाहते हैं, तो उत्पाद की सामग्री, उपयोग संबंधी जानकारी और अन्य विवरण अलग से देख सकते हैं। किसी भी उत्पाद का उपयोग करने से पहले योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लें। 

महत्वपूर्ण: इन आदतों को केवल सामान्य स्वास्थ्य और सहायक जीवनशैली के रूप में समझें। आयुर्वेदिक जीवनशैली से किसी गांठ को घोलने, हटाने या ठीक करने का दावा नहीं किया जाना चाहिए। शरीर में गांठ के कई संभावित कारण हो सकते हैं और सही कारण जानने के लिए चिकित्सकीय जाँच की आवश्यकता पड़ सकती है। NHS भी अज्ञात या बनी रहने वाली गांठ की जाँच कराने की सलाह देता है।

डॉक्टर से मिलने से पहले कौन-सी जानकारी तैयार रखें?

डॉक्टर के पास जाने से पहले गांठ से जुड़ी कुछ सामान्य जानकारी नोट कर लेना उपयोगी हो सकता है। इससे डॉक्टर को स्थिति समझने में मदद मिल सकती है।

  • गांठ पहली बार कब दिखाई दी या महसूस हुई?

  • क्या उसके आकार में बदलाव हुआ है?

  • दर्द, लालिमा या गर्माहट है या नहीं?

  • ऊपर की त्वचा में कोई बदलाव दिखाई दे रहा है?

  • गांठ हिलती है या स्थिर लगती है?

  • क्या पहले भी ऐसी गांठ हुई थी?

  • हाल में उस जगह पर कोई चोट या संक्रमण हुआ था?

Mayo Clinic के अनुसार, गांठ की जाँच करते समय डॉक्टर यह भी पूछ सकते हैं कि वह कब दिखाई दी, क्या उसका आकार बढ़ा है, क्या वह दर्द करती है और पहले ऐसी गांठ हुई है या नहीं।

गांठ को लेकर आम गलतफहमियां

भ्रांति 1: हर गांठ लिपोमा होती है।

तथ्य: ऐसा ज़रूरी नहीं है। गांठ के कई संभावित कारण हो सकते हैं और लिपोमा उनमें से केवल एक कारण है। NHS के अनुसार, गांठ लिपोमा, सिस्ट, सूजे हुए लिम्फ नोड्स या अन्य कारणों से भी हो सकती है।

भ्रांति 2: दर्द नहीं है, तो गांठ हानिरहित है।

तथ्य: केवल दर्द न होना किसी गांठ को पूरी तरह हानिरहित साबित नहीं करता। कुछ गांठों में दर्द नहीं होता, इसलिए अगर वह बनी रहे, बढ़े या उसमें कोई बदलाव दिखाई दे, तो डॉक्टर से जाँच करवाना बेहतर है।

भ्रांति 3: गांठ को दबाने से वह खत्म हो जाएगी।

तथ्य: गांठ को खुद से दबाने, छेदने या काटने की कोशिश करने से बचना चाहिए। गांठ का कारण जाने बिना उसमें किसी तरह का हस्तक्षेप करना उचित नहीं है। सही पहचान के लिए डॉक्टर की जाँच ज़रूरी हो सकती है। 

भ्रांति 4: हर गांठ में बायोप्सी ज़रूरी होती है।

तथ्य: हर गांठ में बायोप्सी की आवश्यकता नहीं होती। डॉक्टर पहले शारीरिक जाँच करते हैं और जरूरत के अनुसार अल्ट्रासाउंड, MRI, CT स्कैन या बायोप्सी जैसी जाँच की सलाह दे सकते हैं। कौन-सी जाँच करनी है, यह गांठ की जगह, आकार और अन्य लक्षणों पर निर्भर करता है।

ध्यान रखें: गांठ को देखकर या छूकर खुद से उसका कारण तय करना सही नहीं है। अगर गांठ लगातार बनी रहती है, बढ़ती है, सख्त लगती है या उसमें कोई असामान्य बदलाव दिखाई देता है, तो योग्य डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1. शरीर में अचानक गांठ दिखे तो सबसे पहले क्या करें?

घबराने के बजाय पहले ध्यान दें कि गांठ कहाँ है, कब से है, उसका आकार कैसा है और उसमें कोई बदलाव हो रहा है या नहीं। इसे खुद से दबाने या हटाने की कोशिश न करें। अगर गांठ बनी रहती है या बढ़ती है, तो डॉक्टर से जाँच करवाना बेहतर है।

2. क्या हर गांठ लिपोमा होती है?

नहीं। गांठ कई कारणों से हो सकती है, जैसे लिपोमा, सिस्ट, फोड़ा या सूजे हुए लिम्फ नोड्स। इसलिए केवल देखकर या छूकर यह तय नहीं किया जा सकता कि गांठ लिपोमा ही है।

3. गांठ की जाँच के लिए Ultrasound कब किया जाता है?

अगर डॉक्टर को गांठ की अंदरूनी बनावट के बारे में अधिक जानकारी चाहिए, तो वे अल्ट्रासाउंड या दूसरी इमेजिंग जाँच की सलाह दे सकते हैं। हर व्यक्ति को एक जैसी जाँच की जरूरत नहीं होती।

4. क्या बिना दर्द वाली गांठ भी डॉक्टर को दिखानी चाहिए?

हाँ। दर्द न होना यह साबित नहीं करता कि गांठ पूरी तरह सामान्य है। अगर कोई नई गांठ बनी रहती है, बढ़ती है या उसमें बदलाव दिखाई देता है, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।

5. गांठ को घर पर दबाना या फोड़ना क्यों नहीं चाहिए?

गांठ को खुद से दबाने, छेदने या फोड़ने से त्वचा को चोट और संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। गांठ का कारण जाने बिना उसमें किसी तरह का हस्तक्षेप करने से बचना चाहिए।

6. कितने समय तक गांठ रहने पर डॉक्टर से मिलना चाहिए?

हर गांठ के लिए एक तय समय लागू नहीं होता। लेकिन अगर गांठ 2 सप्ताह से अधिक समय तक बनी रहे, बढ़ती जाए, सख्त या स्थिर महसूस हो, तो डॉक्टर से जाँच करवाना उचित है। 

7. क्या शरीर में गांठ हमेशा गंभीर बीमारी का संकेत होती है?

नहीं। कई गांठें गैर-कैंसरकारी (Benign) कारणों से भी हो सकती हैं। लेकिन किसी ऐसी गांठ को, जिसका कारण स्पष्ट न हो या जिसमें बदलाव हो रहा हो, केवल देखकर सामान्य मान लेना सही नहीं है।

8. गांठ के लिए किस डॉक्टर से सलाह लें?

शुरुआत में जनरल फिज़िशियन (General Physician) से सलाह ली जा सकती है। वे शुरुआती जाँच के बाद जरूरत पड़ने पर संबंधित विशेषज्ञ के पास भेज सकते हैं।

निष्कर्ष

शरीर में नई गांठ दिखे तो घबराने के बजाय उसके स्थान, आकार और समय के साथ होने वाले बदलावों पर ध्यान दें। हर गांठ एक जैसी नहीं होती और केवल देखकर उसका कारण पता नहीं लगाया जा सकता।

गांठ को खुद से दबाने, छेदने या काटने की कोशिश न करें। अगर वह बनी रहती है, बढ़ती है या उसमें कोई असामान्य बदलाव दिखाई देता है, तो योग्य डॉक्टर से समय पर चिकित्सकीय जाँच करवाना उचित कदम है। 

स्रोत (Sources):

अस्वीकरण: यह लेख केवल सामान्य स्वास्थ्य जानकारी और जागरूकता के लिए है। यह किसी बीमारी का निदान, व्यक्तिगत चिकित्सा सलाह या इलाज का विकल्प नहीं है। अगर आपको नई, लगातार बनी रहने वाली, बढ़ती हुई या असामान्य गांठ दिखाई देती है, तो उचित जाँच और सलाह के लिए योग्य डॉक्टर से संपर्क करें।

Disclaimer: This article is for general informational purposes only and is not a substitute for professional medical advice. Always consult a qualified Ayurvedic practitioner or physician before acting on any information here.

About the Author

Dr Suhail Siddiqui
Dr Suhail Siddiqui

डॉ. मोहम्मद सुहैल (B.A.M.S.) एक योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक हैं। उन्होंने वर्ष 2024 में बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एंड सर्जरी (B.A.M.S.) की डिग्री प्राप्त की है। उन्हें आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा, जीवनशैली प्रबंधन और रोगों की रोकथाम से जुड़े विषयों में विशेष रुचि है। डॉ. सुहैल मुख्य रूप से कान, नाक और गला (ENT) से संबंधित समस्याओं, टिनिटस (Tinnitus), कान में फंगल इंफेक्शन, हकलाना, पथरी, मधुमेह, पाचन संबंधी समस्याओं तथा अन्य सामान्य स्वास्थ्य विषयों पर आयुर्वेद आधारित जानकारी साझा करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल स्वास्थ्य विषयों को सरल भाषा में समझाकर लोगों तक विश्वसनीय और उपयोगी जानकारी पहुँचाना है। SS Herbal India पर प्रकाशित लेखों के लिए डॉ. सुहैल आयुर्वेदिक ग्रंथों, उपलब्ध आधुनिक शोध, चिकित्सा साहित्य तथा विश्वसनीय स्वास्थ्य स्रोतों का अध्ययन करते हैं। प्रत्येक लेख का उद्देश्य पाठकों को संतुलित, तथ्य-आधारित और उपयोगी स्वास्थ्य जानकारी प्रदान करना है। यह जानकारी केवल शैक्षणिक एवं जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित की जाती है और किसी भी प्रकार से व्यक्तिगत चिकित्सकीय सलाह का विकल्प नहीं है। डॉ. सुहैल का लक्ष्य लोगों को सही स्वास्थ्य जानकारी देकर उन्हें स्वस्थ जीवनशैली अपनाने, रोगों की बेहतर समझ विकसित करने और अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बनने में सहायता करना है।

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