आँखों में जलन, थकान और सूखापन: कारण, बचाव और आई ड्रॉप से जुड़ी सावधानियाँ
आँखों में जलन, थकान और सूखापन स्क्रीन के अधिक इस्तेमाल, धूल-धुएँ, एलर्जी या आँसुओं की कमी जैसे कारणों से हो सकता है। इस लेख में जानें संभावित कारण, बचाव के तरीके, आई ड्रॉप चुनते समय सावधानियाँ और डॉक्टर से कब संपर्क करना चाहिए।
Ayurvedic Physician · Reg. No. 77487, UP Board of Indian Medicine

एक नज़र में
आँखों में जलन, थकान और सूखापन कई कारणों से हो सकता है, जैसे लंबे समय तक स्क्रीन देखना, एलर्जी, धूल-धुआँ या आँसुओं की कमी।
स्क्रीन देखते समय नियमित ब्रेक लेना और आँखों की देखभाल की सही आदतें अपनाना कुछ परेशानियों को कम करने में मदद कर सकता है।
डॉक्टर की सलाह के बिना स्टेरॉयड या एंटीबायोटिक आई ड्रॉप का इस्तेमाल न करें।
आँखों में तेज़ दर्द, अचानक नज़र में बदलाव या आँख में रसायन जाने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लें।
विषय-सूची
आँखों में जलन, थकान और सूखापन क्या है?
आँखों में जलन और थकान होने के मुख्य कारण
आँखों की परेशानी के साथ कौन-से लक्षण दिखाई दे सकते हैं?
आँखों की थकान और सूखेपन से बचाव कैसे करें?
आँखों में जलन होने पर क्या करें और क्या न करें?
आँखों की परेशानी में डॉक्टर से कब संपर्क करें?
आँखों की देखभाल के लिए आई ड्रॉप चुनते समय क्या ध्यान रखें?
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
निष्कर्ष
आँखों में जलन, थकान, किरकिरापन और सूखापन कई कारणों से हो सकता है। लंबे समय तक मोबाइल या कंप्यूटर का इस्तेमाल, धूल-मिट्टी, धुआँ, एलर्जी और आँखों में नमी की कमी इसके संभावित कारण हैं। कुछ दवाएँ, कॉन्टैक्ट लेंस और दूसरी स्वास्थ्य संबंधी स्थितियाँ भी आँखों में परेशानी पैदा कर सकती हैं।
इस लेख में आप आँखों में जलन और थकान के संभावित कारणों, बचाव के तरीक़ों, आई ड्रॉप चुनते समय ध्यान रखने वाली बातों और डॉक्टर से कब संपर्क करना चाहिए, इसके बारे में जानेंगे।
आँखों में जलन, थकान और सूखापन क्या है?
आँखों में जलन, थकान, किरकिरापन और सूखापन अलग-अलग परेशानियाँ हैं। कभी-कभी ये एक साथ भी हो सकती हैं। इनके कारण और गंभीरता हर व्यक्ति में अलग हो सकते हैं।
जलन: आँखों में चुभन या जलने जैसा महसूस होना।
थकान: पढ़ने या स्क्रीन देखने के बाद आँखों में भारीपन या असहजता महसूस होना।
सूखापन: आँखों में सूखापन या खिंचाव महसूस होना, या ऐसा लगना जैसे आँख में कुछ फँसा हो।
किरकिरापन: आँख में धूल या छोटा कण होने जैसा एहसास।
खुजली: आँखों में खुजलाने की इच्छा होना। यह एलर्जी के कारण भी हो सकती है।
कभी-कभी आँखों में सूखापन होने पर भी पानी आने लगता है। केवल एक लक्षण के आधार पर किसी बीमारी का पता नहीं लगाया जा सकता। यदि परेशानी लगातार बनी रहे, तो नेत्र चिकित्सक से जाँच कराना उचित है।
आँखों में जलन और थकान होने के मुख्य कारण
लंबे समय तक मोबाइल और कंप्यूटर का इस्तेमाल
लगातार मोबाइल, लैपटॉप या कंप्यूटर देखने से कुछ लोगों को आँखों में थकान, सूखापन, जलन या कुछ समय के लिए धुंधला दिखने की परेशानी हो सकती है।
स्क्रीन देखते समय हम अक्सर कम पलकें झपकाते हैं। इससे आँखों की सतह पर नमी बनाए रखना मुश्किल हो सकता है। लंबे समय तक पास की चीज़ों पर ध्यान लगाने से भी आँखों में असहजता हो सकती है।
क्या करें? स्क्रीन से बीच-बीच में ब्रेक लें, सामान्य रूप से पलकें झपकाएँ और स्क्रीन की चमक आरामदायक रखें। हर व्यक्ति पर स्क्रीन इस्तेमाल का असर एक जैसा नहीं होता।
आँखों में सूखापन और आँसुओं की कमी
आँसू आँखों की सतह को नम और चिकना रखने में मदद करते हैं। जब आँसू पर्याप्त मात्रा में नहीं बनते या उनकी गुणवत्ता ठीक नहीं होती, तो आँखों में सूखापन महसूस हो सकता है।
इसके संभावित लक्षण हैं:
जलन या किरकिरापन
आँखों में लालिमा
कभी-कभी धुंधला दिखना
आँखों में असहजता या पानी आना
उम्र, कुछ दवाएँ, कॉन्टैक्ट लेंस और दूसरी स्वास्थ्य संबंधी स्थितियाँ भी सूखी आँखों की समस्या से जुड़ी हो सकती हैं। यदि परेशानी लगातार बनी रहे, तो नेत्र चिकित्सक से जाँच कराएँ।
धूल, धुआँ, प्रदूषण और तेज़ हवा
धूल-मिट्टी, धुआँ, प्रदूषण और तेज़ हवा आँखों में जलन या किरकिरापन पैदा कर सकते हैं। कुछ लोगों को ऐसी स्थिति में आँखों से पानी भी आने लगता है।
बचाव के लिए:
धूल और धुएँ के संपर्क को कम करें।
ज़रूरत पड़ने पर सुरक्षात्मक चश्मा पहनें।
आँखों में जलन होने पर उन्हें ज़ोर से न रगड़ें।
यदि परेशानी बनी रहती है या बढ़ती है, तो डॉक्टर से सलाह लें।
एलर्जी और आँखों में संक्रमण
एलर्जी और संक्रमण दोनों के कारण आँखों में लालिमा, पानी आना और असहजता हो सकती है। लेकिन इनके कारण और उपचार अलग-अलग होते हैं।
एलर्जी में: खुजली और पानी आना आम लक्षण हो सकते हैं।
संक्रमण में: लालिमा, आँखों से स्राव या पलकों पर चिपचिपापन हो सकता है।
केवल लक्षण देखकर यह तय करना हमेशा संभव नहीं होता कि परेशानी एलर्जी के कारण है या संक्रमण से। तेज़ दर्द, रोशनी से परेशानी या नज़र में बदलाव होने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लें।
गलत नंबर का चश्मा या आँखों पर ज़ोर पड़ना
चश्मे का नंबर सही न होने या लंबे समय तक पास की चीज़ों पर ध्यान लगाने से कुछ लोगों को आँखों में थकान, सिरदर्द या धुंधला दिखने की परेशानी हो सकती है।
यदि पढ़ते समय या स्क्रीन इस्तेमाल करने के बाद बार-बार ऐसा होता है, तो आँखों की जाँच कराएँ। सही कारण का पता चलने से उचित देखभाल चुनने में मदद मिलती है।
आँखों में परेशानी के साथ कौन-से लक्षण दिखाई दे सकते हैं?
आँखों में जलन, थकान या सूखेपन के साथ ये लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं:
आँखों में लालिमा
पानी आना या किरकिरापन
खुजली या भारीपन
कुछ समय के लिए धुंधला दिखना
रोशनी से परेशानी
कॉन्टैक्ट लेंस पहनने पर असहजता
इन लक्षणों के कई कारण हो सकते हैं। यदि परेशानी लगातार बनी रहती है या बढ़ती है, तो नेत्र चिकित्सक से सलाह लें। अचानक नज़र में बदलाव या आँखों में तेज़ दर्द होने पर चिकित्सा सहायता लेने में देरी न करें।
आँखों की थकान और सूखेपन से बचाव कैसे करें?
रोज़मर्रा की कुछ आदतें स्क्रीन और वातावरण से जुड़ी परेशानी को कम करने में मदद कर सकती हैं। लेकिन यदि लक्षण किसी बीमारी या दूसरी स्वास्थ्य समस्या के कारण हैं, तो केवल इन उपायों से राहत मिलना ज़रूरी नहीं है।
स्क्रीन इस्तेमाल करते समय नियमित ब्रेक लें
लंबे समय तक लगातार स्क्रीन देखने के बजाय बीच-बीच में नज़र हटाकर दूर की किसी चीज़ को देखें।
आप 20-20-20 नियम अपना सकते हैं: लगभग हर 20 मिनट बाद 20 सेकंड के लिए करीब 20 फीट दूर की किसी चीज़ को देखें।
स्क्रीन देखते समय सामान्य रूप से पलकें झपकाना भी याद रखें। इससे आँखों की सतह पर नमी बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
स्क्रीन की दूरी और रोशनी सही रखें
मोबाइल या कंप्यूटर को ऐसी दूरी पर रखें, जहाँ पढ़ने के लिए आँखों पर ज़ोर न डालना पड़े।
स्क्रीन की चमक कमरे की रोशनी के अनुसार रखें।
स्क्रीन पर पड़ने वाली तेज़ चमक और प्रतिबिंब कम करें।
कंप्यूटर की स्क्रीन को आरामदायक ऊँचाई पर रखें।
इन आदतों के बाद भी बार-बार परेशानी हो, तो आँखों की जाँच कराएँ।
आँखों को धूल और धुएँ से बचाएँ
धूल, धुएँ और तेज़ हवा के संपर्क को कम करने की कोशिश करें। बाहर धूल या प्रदूषण ज़्यादा होने पर सुरक्षात्मक चश्मा पहन सकते हैं।
यदि आँख में कोई रसायन चला जाए, तो तुरंत साफ़, सामान्य तापमान के बहते पानी से आँख को कम-से-कम 20 मिनट तक धोना शुरू करें और तत्काल चिकित्सा सहायता लें। आँख में दूसरा रसायन डालकर पहले रसायन को बेअसर करने की कोशिश न करें। चिकित्सा सहायता लेने में देरी न करें।
पर्याप्त नींद लें और आँखों की जाँच कराएँ
पर्याप्त नींद सामान्य स्वास्थ्य और थकान को संभालने में मदद करती है। लेकिन इससे सूखी आँखों, एलर्जी या दूसरी नेत्र समस्याओं का इलाज नहीं होता।
यदि बार-बार धुंधला दिखता है, पढ़ने में परेशानी होती है या आँखों में लगातार थकान रहती है, तो नेत्र चिकित्सक से जाँच कराएँ।
कॉन्टैक्ट लेंस की सफ़ाई का ध्यान रखें
कॉन्टैक्ट लेंस इस्तेमाल करते समय उसकी सफ़ाई और देखभाल के निर्देशों का पालन करें।
लेंस को निर्देशों के अनुसार साफ़ करें।
लेंस के लिए निर्धारित सॉल्यूशन का इस्तेमाल करें।
लेंस की तय अवधि का ध्यान रखें।
लेंस या उसका सॉल्यूशन किसी दूसरे व्यक्ति के साथ साझा न करें।
लेंस की देखभाल के लिए नल का पानी इस्तेमाल न करें।
लेंस पहनने के दौरान आँख में दर्द, लालिमा या नज़र में बदलाव हो, तो लेंस निकालें और तुरंत नेत्र चिकित्सक से संपर्क करें।
आँखों में जलन होने पर क्या करें और क्या न करें?
आँखों को रगड़ने से बचें
जलन या खुजली होने पर आँखों को ज़ोर से न रगड़ें। इससे परेशानी बढ़ सकती है। यदि आँख में कोई कण जाने का शक हो, तो उसे उँगली या किसी वस्तु से निकालने की कोशिश न करें।
यदि आँख में कोई रसायन या बाहरी कण चला गया है, तो स्थिति के अनुसार उचित प्राथमिक सहायता लें। दर्द, नज़र में बदलाव या लगातार परेशानी होने पर डॉक्टर से सलाह लें।
बिना सलाह के आई ड्रॉप इस्तेमाल न करें
सभी आई ड्रॉप एक जैसे नहीं होते। कुछ आँखों को नम रखने के लिए, कुछ एलर्जी के लक्षणों के लिए और कुछ खास बीमारियों के इलाज के लिए बनाए जाते हैं।
इसलिए:
किसी दूसरे व्यक्ति की आई ड्रॉप इस्तेमाल न करें।
स्टेरॉयड या एंटीबायोटिक आई ड्रॉप बिना चिकित्सकीय सलाह के न डालें।
बार-बार सूखापन होने पर नेत्र चिकित्सक से उपयुक्त लुब्रिकेटिंग आई ड्रॉप के बारे में पूछें।
आई ड्रॉप की समाप्ति तिथि और इस्तेमाल संबंधी निर्देश पढ़ें।
गलत आई ड्रॉप से कुछ समस्याएँ बढ़ सकती हैं या सही इलाज में देरी हो सकती है। लगातार दर्द, लालिमा या नज़र में बदलाव होने पर केवल आई ड्रॉप बदलते रहने के बजाय डॉक्टर से जाँच कराएँ।
घरेलू नुस्खे आँखों में न डालें
आँखों में गुलाब जल, जड़ी-बूटियों का रस या घरेलू मिश्रण न डालें। आँखों में केवल ऐसे उत्पाद इस्तेमाल करें जो विशेष रूप से नेत्र-उपयोग के लिए बनाए गए हों और जिन्हें निर्देशों के अनुसार इस्तेमाल किया जाए।
किसी उत्पाद का प्राकृतिक या हर्बल होना अपने-आप उसकी सुरक्षा और असर का प्रमाण नहीं है। आँखों में इस्तेमाल होने वाले उत्पाद की गुणवत्ता और संक्रमण से सुरक्षा बहुत ज़रूरी है।
आँखों की परेशानी में डॉक्टर से कब संपर्क करें?
कुछ लक्षण गंभीर समस्या का संकेत हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में घरेलू उपाय आज़माने या आई ड्रॉप के असर का इंतज़ार करने के बजाय तुरंत चिकित्सा सहायता लें।
इन स्थितियों में सावधानी बरतें:
अचानक नज़र में बदलाव: तुरंत चिकित्सा सहायता लें।
आँख में तेज़ दर्द: खासकर दर्द के साथ लालिमा या रोशनी से परेशानी हो, तो तत्काल जाँच कराएँ।
आँख में चोट या रसायन जाना: तुरंत उचित प्राथमिक सहायता लें और आपातकालीन चिकित्सा सहायता प्राप्त करें।
बहुत अधिक लालिमा या रोशनी सहन न होना: तत्काल चिकित्सा सलाह लें, खासकर यदि दर्द या नज़र में बदलाव भी हो।
कॉन्टैक्ट लेंस के साथ दर्द या लालिमा: लेंस निकालें और तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।
लगातार बने रहने वाले लक्षण: परेशानी का कारण जानने के लिए आँखों की जाँच कराएँ।
अचानक नज़र में बदलाव, तेज़ दर्द या आँख में रसायन जाने पर नियमित अपॉइंटमेंट का इंतज़ार न करें।
आँखों की देखभाल के लिए आई ड्रॉप चुनते समय क्या ध्यान रखें?
आई ड्रॉप चुनते समय केवल ब्रांड, कीमत या उसके हर्बल होने के आधार पर फ़ैसला न लें। उत्पाद का उद्देश्य, उसकी सामग्री, गुणवत्ता और आपकी आँखों की स्थिति भी महत्वपूर्ण हैं।
इन बातों का ध्यान रखें:
उपयोग का उद्देश्य: पता करें कि ड्रॉप सूखेपन, एलर्जी या किसी दूसरी समस्या के लिए है।
सामग्री और निर्देश: पैक पर दी गई जानकारी और सावधानियाँ पढ़ें।
एक्सपायरी डेट: इस्तेमाल से पहले समाप्ति तिथि देखें।
पैकेजिंग: शीशी की सील और पैकेजिंग सही होनी चाहिए।
गुणवत्ता और स्टेरिलिटी: आँखों में डालने वाला उत्पाद उचित गुणवत्ता का और संदूषण से सुरक्षित होना चाहिए।
डॉक्टर की सलाह: पहले से आँखों की बीमारी होने, आँखों की सर्जरी होने या दूसरी दवाएँ लेने पर नेत्र चिकित्सक से पूछें।
सूखी आँखों के लिए इस्तेमाल होने वाले लुब्रिकेटिंग ड्रॉप भी हर व्यक्ति के लिए एक जैसे उपयुक्त नहीं होते। लगातार परेशानी, दर्द या नज़र में बदलाव होने पर केवल आई ड्रॉप बदलते रहने के बजाय डॉक्टर से जाँच कराएँ।
यदि आप आयुर्वेदिक आई केयर ड्रॉप के बारे में जानकारी देखना चाहते हैं, तो इसके घटकों, पैक पर दिए गए निर्देशों और सावधानियों को ध्यान से पढ़ें। केवल हर्बल होने के आधार पर किसी आई ड्रॉप को सुरक्षित या प्रभावी न मानें। आँखों में लगातार जलन, सूखापन, लालिमा या दर्द होने पर नेत्र चिकित्सक से सलाह लें। यह उत्पाद आँखों की जाँच या डॉक्टर द्वारा सुझाए गए उपचार का विकल्प नहीं है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
आँखों में जलन और थकान क्यों होती है?
लंबे समय तक स्क्रीन देखना, आँखों में सूखापन, धूल-धुआँ, एलर्जी और चश्मे के नंबर से जुड़ी समस्याएँ इसकी वजह हो सकती हैं। सही कारण जानने के लिए लक्षणों के अनुसार जाँच ज़रूरी है।
क्या मोबाइल देखने से आँखों में सूखापन हो सकता है?
हाँ, लंबे समय तक स्क्रीन देखने पर पलकें कम झपकने से कुछ लोगों की आँखों में सूखापन और थकान हो सकती है। बीच-बीच में ब्रेक लेना और स्क्रीन की रोशनी सही रखना मददगार हो सकता है।
आँखों की थकान कम करने के लिए क्या करें?
स्क्रीन से नियमित ब्रेक लें, सामान्य रूप से पलकें झपकाएँ और रोशनी आरामदायक रखें। बार-बार थकान या धुंधलापन होने पर नेत्र चिकित्सक से जाँच कराएँ।
क्या आँखों में जलन होने पर कोई भी आई ड्रॉप इस्तेमाल कर सकते हैं?
नहीं। अलग-अलग आई ड्रॉप का इस्तेमाल अलग समस्याओं के लिए होता है। उपयुक्त आई ड्रॉप चुनने के लिए नेत्र चिकित्सक या योग्य स्वास्थ्य पेशेवर से सलाह लें। स्टेरॉयड या एंटीबायोटिक आई ड्रॉप बिना चिकित्सकीय सलाह के इस्तेमाल न करें।
आँखों में जलन होने पर डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए?
जलन लगातार बनी रहे या बढ़ने लगे, तो नेत्र चिकित्सक से संपर्क करें। तेज़ दर्द, बहुत अधिक लालिमा, रोशनी से परेशानी या अचानक नज़र में बदलाव होने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लें।
क्या हर्बल आई ड्रॉप सभी लोगों के लिए सही होते हैं?
नहीं। हर्बल होने का मतलब यह नहीं है कि कोई उत्पाद हर व्यक्ति के लिए सुरक्षित या असरदार है। इस्तेमाल से पहले उसकी सामग्री, गुणवत्ता और सुरक्षा की जानकारी लें। ज़रूरत पड़ने पर नेत्र चिकित्सक से सलाह करें।
निष्कर्ष
आँखों में जलन, थकान और सूखापन कई कारणों से हो सकता है। स्क्रीन से नियमित ब्रेक लेना, आरामदायक रोशनी रखना और कॉन्टैक्ट लेंस की सही देखभाल करना कुछ परेशानियों को कम करने में मदद कर सकता है।
आई ड्रॉप चुनते समय उसकी सामग्री, गुणवत्ता और उपयोग संबंधी निर्देशों को ध्यान से देखें। किसी भी हर्बल उत्पाद को आँखों की बीमारी का प्रमाणित इलाज न मानें। परेशानी लगातार बनी रहे या गंभीर लक्षण दिखाई दें, तो नेत्र चिकित्सक से सलाह लें।
मेडिकल डिस्क्लेमर
यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए है। यह डॉक्टर की जाँच, व्यक्तिगत सलाह या इलाज का विकल्प नहीं है। आँखों में लगातार परेशानी, तेज़ दर्द या नज़र में बदलाव होने पर योग्य नेत्र चिकित्सक से संपर्क करें। अचानक नज़र में बदलाव या आँख में रसायन जाने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लें।
Sources
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Disclaimer: This article is for general informational purposes only and is not a substitute for professional medical advice. Always consult a qualified Ayurvedic practitioner or physician before acting on any information here.
About the Author

डॉ. सुहैल सिद्दीकी (Dr Suhail Siddiqui), B.A.M.S., एक योग्य एवं पंजीकृत आयुर्वेदिक चिकित्सक हैं। उन्होंने चौधरी ब्रह्म प्रकाश आयुर्वेद चरक संस्थान (Choudhary Brahm Prakash Ayurved Charak Sansthan), गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय से वर्ष 2024 में बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एंड सर्जरी (B.A.M.S.) की डिग्री प्राप्त की है। वे उत्तर प्रदेश बोर्ड ऑफ इंडियन मेडिसिन (UP Board of Indian Medicine) में पंजीकृत चिकित्सक हैं — रजिस्ट्रेशन संख्या 77487 — और वर्तमान में SS Herbal India के साथ आयुर्वेदिक चिकित्सक (Ayurvedic Physician) के रूप में कार्यरत हैं। उन्हें आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा, जीवनशैली प्रबंधन और रोगों की रोकथाम से जुड़े विषयों में विशेष रुचि है। डॉ. सुहैल मुख्य रूप से कान, नाक और गला (ENT) से संबंधित समस्याओं, टिनिटस (Tinnitus), कान में फंगल इंफेक्शन, हकलाना, पथरी, मधुमेह, पाचन संबंधी समस्याओं तथा अन्य सामान्य स्वास्थ्य विषयों पर आयुर्वेद आधारित जानकारी साझा करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल स्वास्थ्य विषयों को सरल भाषा में समझाकर लोगों तक विश्वसनीय और उपयोगी जानकारी पहुँचाना है। SS Herbal India पर प्रकाशित लेखों के लिए डॉ. सुहैल आयुर्वेदिक ग्रंथों, उपलब्ध आधुनिक शोध, चिकित्सा साहित्य तथा विश्वसनीय स्वास्थ्य स्रोतों का अध्ययन करते हैं। उनके नाम से प्रकाशित होने वाला प्रत्येक लेख प्रकाशन से पहले उनकी समीक्षा से होकर जाता है। प्रत्येक लेख का उद्देश्य पाठकों को संतुलित, तथ्य-आधारित और उपयोगी स्वास्थ्य जानकारी प्रदान करना है। यह जानकारी केवल शैक्षणिक एवं जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित की जाती है और किसी भी प्रकार से व्यक्तिगत चिकित्सकीय सलाह का विकल्प नहीं है। डॉ. सुहैल सिद्दीकी का लक्ष्य लोगों को सही स्वास्थ्य जानकारी देकर उन्हें स्वस्थ जीवनशैली अपनाने, रोगों की बेहतर समझ विकसित करने और अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बनने में सहायता करना है।
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