No Added Sugar का वास्तव में क्या मतलब है? लेबल पर लिखे इस दावे को आसान भाषा में समझें
No Added Sugar का मतलब शुगर बिल्कुल ज़ीरो होना नहीं है। आसान भाषा में जानें No Added Sugar, Sugar-Free और Unsweetened में अंतर और food labels को सही तरीके से पढ़ने का तरीका।

एक नज़र में (At a Glance)
"No Added Sugar" का मतलब शुगर ज़ीरो नहीं होता।
प्रोडक्ट में नैचुरल शुगर पहले से मौजूद हो सकती है।
Added Sugar और Sugar-Free — दोनों अलग चीज़ें हैं।
सही जानकारी के लिए लेबल के पीछे की डिटेल ज़रूर पढ़ें।
सर्विंग साइज़ पर भी नज़र रखें।
सिर्फ़ आगे लिखा दावा देखकर प्रोडक्ट को हेल्दी या अनहेल्दी मत मान लें।
No Added Sugar" का मतलब क्या है
सबसे पहली और सबसे ज़रूरी बात यह समझ लें:
यह दावा प्रोडक्ट की कुल शुगर को ज़ीरो नहीं बताता।
"No Added Sugar" का मतलब सामान्य तौर पर यह है कि प्रोडक्ट तैयार करते समय उसमें अतिरिक्त शुगर नहीं मिलाई गई है। हालांकि, ऐसे दावे की सटीक कानूनी व्याख्या लागू food-labeling regulations और संबंधित प्रोडक्ट के लेबल पर निर्भर करती है।
यानी बिना added sugar के भी उसमें नैचुरल शुगर हो सकती है। इसलिए केवल पैकेट के आगे का दावा पढ़कर मत रुकें — पीछे इनग्रीडिएंट्स और न्यूट्रिशन इंफॉर्मेशन भी देखें।
एक बात और — इस तरह के लेबल दावों को लेकर भारत में FSSAI के नियम लागू होते हैं, और ये समय-समय पर बदलते रहते हैं। इसलिए किसी खास प्रोडक्ट को लेकर पक्की कानूनी जानकारी के लिए हमेशा वर्तमान नियम और उस प्रोडक्ट का लेबल ही देखें।
Added Sugar क्या होती है?
Added Sugar से आशय ऐसी शुगर से है जिसे किसी खाद्य या पेय को तैयार करने या प्रोसेस करने के दौरान अलग से जोड़ा जाता है।
जैसे किसी ड्रिंक को मीठा करने के लिए शुगर डाली जाए, या किसी स्नैक में स्वाद के लिए शुगर मिलाई जाए — यह added sugar कहलाती है।
Ingredients List में sugar या किसी sweetening ingredient का नाम दिया गया हो, तो उसकी भूमिका और मात्रा को समझने के लिए पूरे लेबल को देखें।
एक बात याद रखें — नैचुरल शुगर और added sugar में से किसी को "अच्छी" और किसी को "बुरी" कहना ठीक नहीं। यहां बस दोनों का फ़र्क़ समझाया जा रहा है, किसी फूड को अच्छा-बुरा बताना मकसद नहीं है।
क्या यह Sugar-Free जैसा ही है
नहीं। दोनों बिल्कुल अलग बातें हैं।
नीचे टेबल में फ़र्क़ देखें:
टर्म | आसान मतलब |
No Added Sugar | ऊपर से शुगर नहीं मिलाई गई |
Sugar-Free | एक खास नियम के तहत आता है, जो शुगर की एक तय सीमा से जुड़ा है। |
Unsweetened | मीठा नहीं किया गया; असली मतलब प्रोडक्ट और नियमों पर निर्भर |
"No Added Sugar" सिर्फ़ यह बताता है कि ऊपर से शुगर नहीं मिली।
"Sugar-Free" एक खास नियम के तहत आता है, जो शुगर की एक तय सीमा से जुड़ा है।
केवल "No Added Sugar" लिखा होने से यह साबित नहीं होता कि शुगर बिल्कुल नहीं है।
Sugar-Free की एग्ज़ैक्ट लिमिट यहां नहीं बता रहे, क्योंकि यह जानकारी हमेशा current FSSAI नियमों से ही चेक करनी चाहिए।
क्या "No Added Sugar" वाले प्रोडक्ट में फिर भी शुगर हो सकती है?
हां, बिल्कुल हो सकती है।
फलों में पहले से शुगर होती है।
दूध या कुछ अन्य चीज़ों में भी नैचुरल शुगर हो सकती है।
इसलिए "No Added Sugar" का मतलब "No Sugar" नहीं होता।
कुल शुगर कितनी है, यह जानने के लिए न्यूट्रिशन लेबल देखें।
याद रखें: No Added Sugar ≠ No Sugar
यही सबसे बड़ा कन्फ़्यूज़न है, जो ज़्यादातर लोगों को होता है।
लेबल पर शुगर कैसे देखें
इसे बस चार आसान स्टेप में समझें:
1. सर्विंग साइज़ देखें पहले देखें कि यह जानकारी कितनी मात्रा के लिए दी गई है। पूरा पैकेट एक सर्विंग नहीं होता — कई बार एक पैक में कई सर्विंग होती हैं।
2. टोटल शुगर देखें यह बताता है कि उसमें कुल कितनी शुगर है — चाहे नैचुरल हो या मिलाई गई।
3. Added Sugar देखें अगर लेबल पर अलग से लिखा हो, तो यह देखें कि उसमें से कितनी शुगर बाहर से मिलाई गई है।
4. इनग्रीडिएंट्स पढ़ें सिर्फ़ आगे का दावा पढ़कर मत रुकें, पीछे की लिस्ट भी पढ़ें।
इन चारों चीज़ों को साथ देखना ही किसी प्रोडक्ट को सही तरीके से समझने का तरीका है।
इनग्रीडिएंट लिस्ट में क्या देखें
केवल "शुगर" शब्द ढूंढकर मत रुकें। शुगर अलग-अलग नामों में भी लिखी हो सकती है।
इसे इस क्रम में समझें:
फ्रंट लेबल → इनग्रीडिएंट्स → न्यूट्रिशन इंफॉर्मेशन → सर्विंग साइज़
इनग्रीडिएंट लिस्ट बताती है कि प्रोडक्ट में असल में क्या-क्या डाला गया है।
किसी एक नाम को देखकर पूरी क्वालिटी तय मत करें।
अगर कोई नाम समझ न आए या confusing लगे, तो प्रोडक्ट की पूरी जानकारी देखें।
यहां हर sweetener का नाम गिनाना ज़रूरी नहीं — बस इतना समझ लें कि लिस्ट को पूरे context के साथ पढ़ना ज़रूरी है।
क्या "No Added Sugar" वाला प्रोडक्ट अपने आप हेल्दी हो जाता है?
एक आम ग़लतफहमी है:
❌ "No Added Sugar लिखा है, मतलब यह हेल्दी है।"
सही बात यह है:
यह दावा सिर्फ़ शुगर से जुड़ा है। पूरे प्रोडक्ट की क्वालिटी समझने के लिए इनग्रीडिएंट्स, सर्विंग साइज़ और न्यूट्रिशन इंफॉर्मेशन — सब कुछ देखना पड़ेगा।
कैलोरी अकेले शुगर से नहीं आती, फैट और अन्य चीज़ों से भी आ सकती है।
एक दावे से पूरी क्वालिटी तय नहीं होती।
इसे क्वालिटी का पूरा सर्टिफिकेट मत समझें।
क्या इसमें कैलोरी हो सकती है
हां, हो सकती है।
"No Added Sugar" का मतलब कैलोरी-फ्री नहीं है।
कैलोरी मुख्य रूप से कार्बोहाइड्रेट, फैट और प्रोटीन जैसे पोषक तत्वों से मिलती है।
सही कैलोरी जानने के लिए न्यूट्रिशन लेबल देखें, साथ ही सर्विंग साइज़ भी।
हर प्रोडक्ट की कैलोरी अलग होती है, इसलिए कोई एक फिक्स नंबर यहां नहीं बताया जा रहा — प्रोडक्ट का अपना लेबल ही सही जानकारी देगा।
फ्रूट प्रोडक्ट्स में इसे कैसे समझें
फलों में प्राकृतिक रूप से शुगर मौजूद होती है। इसलिए किसी पैकेज पर “No Added Sugar” लिखा होने का मतलब यह नहीं है कि उसमें शुगर बिल्कुल नहीं होगी। अगर उसमें फल, फलों का रस या उससे बनी सामग्री है, तो प्राकृतिक शुगर मौजूद हो सकती है।
किसी प्रोडक्ट को खरीदने से पहले इन बातों पर ध्यान दें:
Total Sugar की मात्रा देखें।
जहाँ Added Sugar की जानकारी दी गई हो, उसे भी देखें।
Ingredients List पढ़ें और उसमें इस्तेमाल की गई सामग्री को समझें।
Serving Size ज़रूर देखें, क्योंकि शुगर की मात्रा अक्सर एक तय मात्रा के आधार पर दी जाती है।
सिर्फ़ “No Added Sugar” जैसे एक दावे के आधार पर पूरे प्रोडक्ट को हेल्दी या लो-शुगर मानने से बचें।
इसलिए सही जानकारी के लिए पैकेज पर दिए गए Nutrition Label और Ingredients List को साथ में देखना सबसे उपयोगी तरीका है।
ध्यान दें: यहाँ सिर्फ़ “No Added Sugar” दावे को समझाया गया है। फलों के दूसरे पोषण संबंधी फ़ायदों की विस्तृत चर्चा इस लेख का विषय नहीं है।
फलों में पाए जाने वाले antioxidants के बारे में आसान भाषा में जानने के लिए आप हमारा “What Are Antioxidants?” लेख भी पढ़ सकते हैं।
खरीदते वक्त क्या-क्या चेक करें
इसे एक आसान क्रम में देखें:
फ्रंट लेबल → इनग्रीडिएंट्स → न्यूट्रिशन इंफॉर्मेशन → सर्विंग साइज़
सिर्फ़ आगे का दावा देखकर न खरीदें।
पीछे इनग्रीडिएंट लिस्ट पढ़ें।
टोटल शुगर देखें।
अगर added sugar अलग से लिखी हो, तो वह भी देखें।
सर्विंग साइज़ समझें।
कोई बात confusing लगे, तो पूरी लेबल जानकारी पढ़ें।
अगर आप किसी fruit-based packaged product को खरीदने पर विचार कर रहे हैं, तो उसके ingredients, nutrition information, serving size और product details को ध्यान से पढ़ना ज़रूरी है। उदाहरण के लिए, SS Herbal Multi Berry Juice की product details भी खरीदने से पहले देखी जा सकती हैं।
तीनों टर्म्स का फ़र्क़ एक नज़र में
टर्म | आसान मतलब |
No Added Sugar | ऊपर से शुगर नहीं मिलाई गई |
Sugar-Free | तय नियम के तहत शुगर की सीमा में |
Unsweetened | मीठा नहीं किया गया; सटीक मतलब प्रोडक्ट पर निर्भर |
नोट: इन शब्दों के नियम प्रोडक्ट कैटेगरी के हिसाब से बदल सकते हैं। किसी खास प्रोडक्ट की सही जानकारी के लिए हमेशा current FSSAI नियम और उसका लेबल देखें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. No Added Sugar का मतलब क्या है? इसका मतलब है कि प्रोडक्ट में ऊपर से शुगर नहीं मिलाई गई। पर इसमें फिर भी नैचुरल शुगर हो सकती है, इसलिए यह कुल शुगर ज़ीरो नहीं बताता।
2. क्या यह Sugar-Free जैसा है? नहीं। दोनों अलग हैं। पहला केवल added sugar से जुड़ा है, दूसरा एक तय शुगर लिमिट से।
3. क्या फ्रूट प्रोडक्ट में शुगर हो सकती है? हां, फलों में नैचुरल शुगर होती है, इसलिए फ्रूट प्रोडक्ट में यह मौजूद रह सकती है, भले ही ऊपर से कुछ न मिलाया गया हो।
4. क्या इसका मतलब कम कैलोरी है? ज़रूरी नहीं। कैलोरी अकेले शुगर से नहीं, फैट और अन्य चीज़ों से भी आ सकती है।
5. खरीदते वक्त क्या देखें? इनग्रीडिएंट लिस्ट, न्यूट्रिशन इंफॉर्मेशन और सर्विंग साइज़ — सिर्फ़ आगे का दावा देखकर मत रुकें।
6. क्या इसका मतलब प्रोडक्ट ज़्यादा हेल्दी है? केवल इस एक दावे से यह तय नहीं होता। पूरा लेबल देखकर ही सही अंदाज़ा लगाया जा सकता है।
निष्कर्ष
"No Added Sugar" पढ़कर पूरी बात समझ लेना ठीक नहीं। असली जानकारी के लिए इनग्रीडिएंट्स, टोटल शुगर, added sugar (अगर लिखी हो) और सर्विंग साइज़ — सब कुछ मिलाकर देखना पड़ता है।
अगली बार जब भी कोई packaged food या beverage खरीदें, सिर्फ़ आगे का दावा पढ़कर मत रुकें — पीछे की जानकारी भी एक बार ज़रूर देख लें। लेबल की जानकारी को समझकर अपनी ज़रूरत के अनुसार चुनाव करना अधिक उपयोगी तरीका हो सकता है।
ध्यान दें: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है, यह किसी प्रोडक्ट, ब्रांड या मेडिकल सलाह की सिफ़ारिश नहीं करता। किसी लेबल दावे की सही कानूनी जानकारी के लिए FSSAI के मौजूदा नियम और प्रोडक्ट की आधिकारिक जानकारी देखें। अपनी डाइट से जुड़े किसी भी सवाल के लिए डॉक्टर या डायटीशियन से सलाह लें।
स्रोत:-
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Disclaimer: This article is for general informational purposes only and is not a substitute for professional medical advice. Always consult a qualified Ayurvedic practitioner or physician before acting on any information here.
About the Author

डॉ. सुहैल सिद्दीकी (Dr Suhail Siddiqui), B.A.M.S., एक योग्य एवं पंजीकृत आयुर्वेदिक चिकित्सक हैं। उन्होंने चौधरी ब्रह्म प्रकाश आयुर्वेद चरक संस्थान (Choudhary Brahm Prakash Ayurved Charak Sansthan), गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय से वर्ष 2024 में बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एंड सर्जरी (B.A.M.S.) की डिग्री प्राप्त की है। वे उत्तर प्रदेश बोर्ड ऑफ इंडियन मेडिसिन (UP Board of Indian Medicine) में पंजीकृत चिकित्सक हैं — रजिस्ट्रेशन संख्या 77487 — और वर्तमान में SS Herbal India के साथ आयुर्वेदिक चिकित्सक (Ayurvedic Physician) के रूप में कार्यरत हैं। उन्हें आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा, जीवनशैली प्रबंधन और रोगों की रोकथाम से जुड़े विषयों में विशेष रुचि है। डॉ. सुहैल मुख्य रूप से कान, नाक और गला (ENT) से संबंधित समस्याओं, टिनिटस (Tinnitus), कान में फंगल इंफेक्शन, हकलाना, पथरी, मधुमेह, पाचन संबंधी समस्याओं तथा अन्य सामान्य स्वास्थ्य विषयों पर आयुर्वेद आधारित जानकारी साझा करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल स्वास्थ्य विषयों को सरल भाषा में समझाकर लोगों तक विश्वसनीय और उपयोगी जानकारी पहुँचाना है। SS Herbal India पर प्रकाशित लेखों के लिए डॉ. सुहैल आयुर्वेदिक ग्रंथों, उपलब्ध आधुनिक शोध, चिकित्सा साहित्य तथा विश्वसनीय स्वास्थ्य स्रोतों का अध्ययन करते हैं। उनके नाम से प्रकाशित होने वाला प्रत्येक लेख प्रकाशन से पहले उनकी समीक्षा से होकर जाता है। प्रत्येक लेख का उद्देश्य पाठकों को संतुलित, तथ्य-आधारित और उपयोगी स्वास्थ्य जानकारी प्रदान करना है। यह जानकारी केवल शैक्षणिक एवं जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित की जाती है और किसी भी प्रकार से व्यक्तिगत चिकित्सकीय सलाह का विकल्प नहीं है। डॉ. सुहैल सिद्दीकी का लक्ष्य लोगों को सही स्वास्थ्य जानकारी देकर उन्हें स्वस्थ जीवनशैली अपनाने, रोगों की बेहतर समझ विकसित करने और अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बनने में सहायता करना है।
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