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लिवर की सेहत के लिए दैनिक जीवनशैली क्यों महत्वपूर्ण है? स्वस्थ आदतों को समझें

दैनिक खान-पान, शारीरिक गतिविधि, healthy weight, नींद और शराब जैसी आदतें लिवर की सेहत से जुड़ी हो सकती हैं। जानें रोज़ की lifestyle में किन बातों का ध्यान रखना बेहतर है और कब डॉक्टर से सलाह ज़रूरी हो सकती है।

Dr Suhail SiddiquiWritten By Dr Suhail SiddiquiPublished: Last updated: · 15 min read
लिवर की सेहत के लिए दैनिक जीवनशैली क्यों महत्वपूर्ण है? स्वस्थ आदतों को समझें

एक नज़र में (At a Glance)

  • दैनिक खान-पान, शारीरिक गतिविधि, वज़न और शराब का सेवन लिवर की सेहत से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें हो सकती हैं।

  • खाने में सब्ज़ियां, फल और साबुत अनाज शामिल करना और भोजन की मात्रा पर ध्यान देना संतुलित आहार का हिस्सा हो सकता है।

  • बहुत ज़्यादा sugary drinks और highly processed foods को रोज़ की आदत बनाने से बचना बेहतर है।

  • नियमित शारीरिक गतिविधि, संतुलित आहार और स्वस्थ वज़न बनाए रखना समग्र स्वास्थ्य के साथ कुछ लिवर संबंधी समस्याओं के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है।

  • कोई पूरक आहार या हर्बल उत्पाद “प्राकृतिक” है, इसका मतलब यह नहीं है कि वह हर व्यक्ति के लिए सुरक्षित ही होगा। कुछ हर्बल उत्पाद लिवर को नुकसान पहुँचा सकते हैं।

  • केवल जीवनशैली में बदलाव करना हर लिवर संबंधी समस्या के लिए पर्याप्त नहीं होता। कुछ स्थितियों में चिकित्सकीय जाँच और उचित उपचार की आवश्यकता हो सकती है।

  • अगर लगातार या चिंता वाले लक्षण हों, पहले से कोई लिवर संबंधी समस्या हो या जाँच रिपोर्ट में कुछ असामान्य आए, तो केवल जीवनशैली में बदलाव पर निर्भर रहने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।

विषय सूची

  1. हमारी दैनिक जीवनशैली का लिवर की सेहत पर क्या असर पड़ता है? 

  2. संतुलित आहार को दैनिक आदत क्यों बनाना चाहिए? 

  3. नियमित शारीरिक गतिविधि क्यों महत्वपूर्ण है? 

  4. स्वस्थ वज़न बनाए रखना क्यों ज़रूरी है? 

  5. पैकेट वाले खाद्य पदार्थों और मीठे पेय को सीमित क्यों रखें? 

  6. शराब और लिवर की सेहत: क्या ध्यान रखें

  7. धूम्रपान और लिवर की सेहत के बारे में क्या जानना चाहिए

  8. पर्याप्त नींद और नियमित दिनचर्या की क्या भूमिका है?

  9. आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से लिवर की सेहत के लिए जीवनशैली

  10. लिवर की सेहत के लिए सामान्य दैनिक दिनचर्या कैसी हो सकती है?

  11. क्या केवल जीवनशैली में बदलाव हर लिवर समस्या के लिए पर्याप्त हैं? 

  12. कब Doctor से सलाह लेना ज़रूरी हो सकता है

  13. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

  14. निष्कर्ष

लिवर की सेहत हमारी रोज़ की आदतों से जुड़ी हो सकती है। खान-पान, शारीरिक गतिविधि, नींद, वज़न और शराब जैसी चीज़ों पर ध्यान देना एक अच्छी शुरुआत हो सकती है।

इस लेख में जानेंगे कि दैनिक दिनचर्या का लिवर की सेहत से क्या संबंध है और किन आदतों को अपनाना बेहतर हो सकता है। 

हमारी दैनिक जीवनशैली का लिवर की सेहत पर क्या असर पड़ता है? 

लिवर की सेहत रोज़ की कई आदतों से जुड़ी हो सकती है। हम क्या खाते हैं, कितना सक्रिय रहते हैं, वज़न कैसा है और शराब का सेवन कितना करते हैं—इन सभी बातों पर ध्यान देना ज़रूरी है।

NIDDK के अनुसार, संतुलित खान-पान, भोजन की मात्रा पर ध्यान देना, शारीरिक गतिविधि और healthy weight जैसी आदतें MASLD (एक प्रकार की फैटी लिवर डिजीज) को रोकने या manage करने में मदद कर सकती हैं। 

इसलिए किसी एक चीज़ पर निर्भर रहने के बजाय रोज़ की छोटी-छोटी healthy habits पर ध्यान देना बेहतर तरीका हो सकता है।

लिवर के मुख्य काम, उससे जुड़े सामान्य लक्षण और इसकी देखभाल के बारे में विस्तार से जानने के लिए हमारा लिवर के कार्य, लक्षण और देखभाल से जुड़ा लेख भी पढ़ सकते हैं।

संतुलित आहार को दैनिक आदत क्यों बनाना चाहिए? 

किसी एक “लिवर के लिए 10 खाद्य पदार्थ” की सूची पर निर्भर रहने के बजाय, पूरे खान-पान पर ध्यान देना अधिक व्यावहारिक है।

  • खाने में सब्ज़ियां और फल शामिल करें।

  • दाल, बीन्स और अन्य पौष्टिक प्रोटीन स्रोतों को भोजन का हिस्सा बनाएं।

  • जहाँ संभव हो, मैदा और अन्य परिष्कृत अनाज की जगह साबुत अनाज चुनें।

  • बहुत ज़्यादा संतृप्त वसा और ट्रांस वसा वाले खाद्य पदार्थों को सीमित रखें। 

  • भोजन की मात्रा पर भी ध्यान दें।

  • बहुत अधिक मीठे खाद्य पदार्थों और मीठे पेय को रोज़ की आदत न बनाएं।

  • जहाँ संभव हो, जूस की जगह पूरा फल लेना बेहतर विकल्प हो सकता है।

खासकर fatty liver के मामले में NIDDK simple sugar और मीठे drinks की अधिक मात्रा को सीमित करने की सलाह देता है।

ध्यान रखें: “Liver cleansing foods” जैसे शब्दों से सावधान रहें। किसी एक food के बारे में यह दावा करना सही नहीं है कि वह अकेले लिवर को “साफ़” कर सकता है।

नियमित शारीरिक गतिविधि क्यों महत्वपूर्ण है? 

शारीरिक गतिविधि का मतलब सिर्फ़ जिम जाना नहीं है। इसे रोज़ की सामान्य दिनचर्या में भी शामिल किया जा सकता है।

  • रोज़ कुछ समय टहलने की कोशिश करें।

  • लंबे समय तक लगातार बैठे रहने को कम करें।

  • जहाँ संभव हो, सीढ़ियों का इस्तेमाल करें।

  • अपनी उम्र और शारीरिक क्षमता के अनुसार exercise चुनें।

  • अगर अभी बहुत कम activity करते हैं, तो धीरे-धीरे शुरुआत करें।

WHO के अनुसार, वयस्कों को आम तौर पर हफ़्ते में 150–300 मिनट की moderate-intensity physical activity या 75–150 मिनट की vigorous-intensity activity, या दोनों का equivalent combination करने की सलाह दी जाती है। साथ ही, muscle-strengthening activities को हफ़्ते में कम-से-कम 2 दिन शामिल करने की सलाह दी जाती है।

लेकिन यह हर व्यक्ति के लिए एक जैसा routine नहीं है। उम्र, स्वास्थ्य और शारीरिक क्षमता के अनुसार शारीरिक गतिविधि का स्तर अलग हो सकता है। अगर कोई स्वास्थ्य संबंधी समस्या है, तो व्यायाम शुरू करने से पहले डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है। 

स्वस्थ वज़न बनाए रखना क्यों ज़रूरी है? 

स्वस्थ वज़न सिर्फ़ दिखावे की बात नहीं है। ज़्यादा वज़न या मोटापे का संबंध MASLD जैसी फैटी लिवर की स्थितियों से हो सकता है।

अगर किसी व्यक्ति का वज़न ज़्यादा है, तो धीरे-धीरे वज़न कम करना लिवर में जमा अतिरिक्त वसा को कम करने और कुछ मामलों में लिवर में सूजन या फाइब्रोसिस (लिवर में दाग बनने) को कम करने में मदद कर सकता है। शारीरिक गतिविधि का फ़ायदा वज़न कम हुए बिना भी मिल सकता है।

  • वज़न कम करने के लिए बहुत तेज़ या अचानक तरीके न अपनाएं।

  • खाने की मात्रा और रोज़ की physical activity पर ध्यान दें।

  • छोटे और टिकाऊ बदलावों को प्राथमिकता दें।

ध्यान रखें: वज़न कम होने का मतलब यह नहीं है कि हर liver problem अपने आप ठीक हो जाएगी। अगर पहले से कोई liver condition है, तो डॉक्टर की सलाह ज़रूरी हो सकती है।

पैकेट वाले खाद्य पदार्थों और मीठे पेय को सीमित क्यों रखें? 

हर packaged या processed food को पूरी तरह ख़राब मानना सही नहीं है। ज़्यादा चिंता तब होती है जब बहुत मीठे या highly processed foods और drinks रोज़ की आदत बन जाएं।

  • बहुत ज़्यादा मीठे पेय और juices को रोज़ की आदत बनाने से बचें। 

  • Fast food और highly processed snacks को रोज़ के खाने का हिस्सा न बनाएं।

  • खाने की मात्रा और overall diet पर भी ध्यान दें।

NIDDK के अनुसार, fatty liver के संदर्भ में simple sugar की अधिक मात्रा वाले foods और drinks, खासकर sweetened soft drinks और दूसरे sugary beverages को सीमित करना उपयोगी हो सकता है।

शराब और लिवर की सेहत: क्या ध्यान रखें

शराब का अधिक सेवन लिवर को नुकसान पहुँचा सकता है और लंबे समय में शराब से जुड़ी लिवर की बीमारी का कारण बन सकता है। इसका प्रभाव व्यक्ति की शराब पीने की आदत और स्वास्थ्य से जुड़ी अन्य स्थितियों पर भी निर्भर कर सकता है।

  • अगर आपको पहले से लिवर की कोई बीमारी है, तो शराब को लेकर डॉक्टर की सलाह का पालन करें।

  • कुछ लिवर संबंधी स्थितियों में डॉक्टर शराब पूरी तरह बंद करने की सलाह दे सकते हैं।

  • शराब के सेवन को लेकर अपनी स्थिति का आकलन केवल किसी ऑनलाइन “सुरक्षित सीमा” के आधार पर न करें।

यहाँ उद्देश्य डर पैदा करना नहीं है, बल्कि यह समझना है कि शराब का सेवन भी लिवर की सेहत से जुड़ी एक महत्वपूर्ण बात हो सकती है।

धूम्रपान और लिवर की सेहत के बारे में क्या जानना चाहिए

इस विषय पर बहुत विस्तार में जाने की ज़रूरत नहीं है, क्योंकि इस लेख का मुख्य ध्यान धूम्रपान पर नहीं है। इतना समझना जरूरी है कि धूम्रपान पूरे स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है और स्वस्थ जीवनशैली में तंबाकू से दूरी बनाना भी शामिल है।

धूम्रपान से लिवर पर होने वाले प्रभाव के बारे में बिना पुख्ता स्रोत के कोई निश्चित प्रतिशत या आंकड़ा देना उचित नहीं होगा। इसलिए इस लेख में इसे समग्र रूप से स्वस्थ जीवनशैली की एक महत्वपूर्ण आदत के रूप में समझना बेहतर है।

पर्याप्त नींद और नियमित दिनचर्या की क्या भूमिका है?

नींद को लिवर का इलाज नहीं समझना चाहिए। इसे स्वस्थ जीवनशैली का एक हिस्सा मानना बेहतर है।

रोज़ की दिनचर्या में कुछ नियमितता रखने से समग्र स्वास्थ्य और स्वस्थ आदतों को बनाए रखना आसान हो सकता है। इसके लिए:

  • सोने और उठने का समय लगभग नियमित रखने की कोशिश करें।

  • अपनी उम्र और ज़रूरत के अनुसार पर्याप्त नींद लेने पर ध्यान दें।

  • रात में देर तक जागने और अनियमित दिनचर्या को रोज़ की आदत न बनाएं।

  • खाने, शारीरिक गतिविधि और आराम के लिए भी एक संतुलित दैनिक दिनचर्या रखने की कोशिश करें।

नींद को केवल लिवर की सेहत के नज़रिए से देखने के बजाय, इसे पूरी जीवनशैली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा समझना बेहतर है। अगर पहले से कोई लिवर संबंधी समस्या है, तो केवल नींद या रोज़ की दिनचर्या में बदलाव को इलाज का विकल्प नहीं मानना चाहिए।

आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से लिवर की सेहत के लिए जीवनशैली

आयुर्वेद में Swasthavritta के अंतर्गत स्वस्थ जीवनशैली, उचित आहार और दैनिक दिनचर्या पर ध्यान देने की बात की जाती है। इसे यहाँ समग्र स्वास्थ्य और स्वस्थ आदतों के संदर्भ में समझना चाहिए, न कि किसी लिवर रोग के इलाज के रूप में। 

  • समय पर और नियमित भोजन करने की कोशिश करें।

  • खाने में ताज़ी और संतुलित चीज़ों को जगह दें।

  • बहुत ज़्यादा तला-भुना खाना रोज़ की आदत न बनाएं। 

  • पर्याप्त नींद और आराम को daily routine का हिस्सा बनाएं।

  • रोज़ थोड़ा शारीरिक रूप से सक्रिय रहने की कोशिश करें।

  • तनाव को संभालने और अपनी दिनचर्या को नियमित रखने पर ध्यान दें।

  • तंबाकू और smoking जैसी आदतों से दूरी बनाए रखना बेहतर है।

अगर आप किसी हर्बल या आयुर्वेदिक उत्पाद के बारे में जानकारी देखना चाहते हैं, तो उसमें शामिल सामग्री, इस्तेमाल करने का तरीका और दी गई सावधानियों को ध्यान से पढ़ना ज़रूरी है। उदाहरण के तौर पर, हर्बल उत्पाद की उत्पाद संबंधी जानकारी भी देख सकते हैं। इसे किसी लिवर संबंधी बीमारी की जाँच या इलाज के विकल्प के रूप में नहीं मानना चाहिए। 

महत्वपूर्ण: इन सुझावों को केवल समग्र स्वास्थ्य और supportive lifestyle के नज़रिए से समझना चाहिए। इन्हें किसी liver disease को “डिटॉक्स” करने या ठीक करने के इलाज के रूप में नहीं लेना चाहिए। 

अगर आपको पहले से लिवर से जुड़ी कोई समस्या है, तो केवल जीवनशैली में बदलाव या किसी हर्बल/आयुर्वेदिक उत्पाद पर निर्भर रहने के बजाय डॉक्टर की सलाह और जरूरी चिकित्सकीय जाँच को प्राथमिकता दें। कोई नया हर्बल उत्पाद या पूरक आहार शुरू करने से पहले भी डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है।

लिवर की सेहत के लिए सामान्य दैनिक दिनचर्या कैसी हो सकती है?

यह एक सामान्य उदाहरण है, कोई fixed rule नहीं। हर व्यक्ति की उम्र, काम, स्वास्थ्य और daily routine अलग हो सकती है। इसका मकसद किसी बीमारी का इलाज बताना नहीं, बल्कि healthy habits को रोज़ की जिंदगी में शामिल करने का आसान तरीका समझाना है।

सुबह:

  • दिन की शुरुआत पर्याप्त पानी पीने और अपनी ज़रूरत के अनुसार संतुलित नाश्ते से कर सकते हैं। 

  • अपनी सुविधा के अनुसार थोड़ी physical activity या हल्की walk शामिल करें।

  • बहुत मीठे drinks को रोज़ की आदत बनाने से बचें। 

दिन में:

  • लंबे समय तक लगातार बैठे रहने के बजाय बीच-बीच में उठकर थोड़ा चलें।

  • भोजन में सब्ज़ियां, फल, साबुत अनाज और protein-rich foods को जगह दें।

  • बहुत ज़्यादा sugary drinks और highly processed foods को सीमित रखें।

शाम:

  • अपनी क्षमता के अनुसार walk या दूसरी physical activity करें।

  • बार-बार processed snacks या बहुत मीठी चीज़ें खाने के बजाय संतुलित विकल्प चुनने की कोशिश करें।

रात:

  • अपनी ज़रूरत के अनुसार संतुलित dinner लें।

  • सोने और उठने का समय लगभग नियमित रखने की कोशिश करें।

  • पर्याप्त नींद को daily routine का हिस्सा बनाएं। पर्याप्त नींद healthy lifestyle और overall health का एक हिस्सा है।

ध्यान रखें: इसे “लिवर को detox करने वाला routine” नहीं समझना चाहिए। यह केवल संतुलित खान-पान, physical activity और healthy daily habits को routine में शामिल करने का एक सामान्य उदाहरण है।

क्या केवल जीवनशैली में बदलाव हर लिवर समस्या के लिए पर्याप्त हैं? 

Healthy lifestyle कई मामलों में मददगार हो सकता है, लेकिन हर liver problem का कारण lifestyle से जुड़ा हो, यह ज़रूरी नहीं है।

लिवर से जुड़ी अलग-अलग समस्याओं के पीछे infection, alcohol-related liver damage, metabolic conditions, कुछ medicines या supplements, genetic conditions और दूसरे कारण हो सकते हैं। इसलिए किसी liver problem की वजह जानने के लिए medical history, examination और ज़रूरत के अनुसार blood tests या imaging की मदद ली जा सकती है।

  • Healthy diet और physical activity को routine का हिस्सा बनाना अच्छी आदत हो सकती है।

  • अगर पहले से कोई liver disease है, तो केवल lifestyle changes पर निर्भर न रहें।

  • किसी बीमारी का इलाज या दवा डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही लें।

  • इंटरनेट पर पढ़ी जानकारी को अपने लिए diagnosis मानकर treatment शुरू न करें।

इसलिए lifestyle को supportive approach के रूप में देखें, न कि हर liver condition के इलाज के विकल्प के रूप में।

कब Doctor से सलाह लेना ज़रूरी हो सकता है

हर छोटी परेशानी में घबराने की ज़रूरत नहीं है, लेकिन कुछ स्थितियों में medical advice लेना बेहतर होता है। खासकर अगर:

  • लगातार या बार-बार कोई असामान्य लक्षण महसूस हो रहे हों।

  • पहले से liver से जुड़ी कोई बीमारी हो।

  • किसी जाँच रिपोर्ट में लिवर से जुड़ी कोई असामान्यता मिली हो। 

  • डॉक्टर ने आगे की जाँच या follow-up की सलाह दी हो।

  • कोई नई medicine, supplement या herbal product शुरू करने से पहले उसकी safety को लेकर doubt हो।

लिवर से जुड़ी कुछ स्थितियों में शुरुआत में लक्षण बहुत कम या बिल्कुल नहीं भी हो सकते हैं, इसलिए abnormal test result को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। डॉक्टर ज़रूरत के अनुसार blood tests, imaging या दूसरी जाँच की सलाह दे सकते हैं।

ऐसी स्थिति में खुद से diagnosis करने या केवल internet information के आधार पर treatment शुरू करने के बजाय doctor से समय पर सलाह लेना ज़्यादा सुरक्षित तरीका है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1. क्या lifestyle बदलने से लिवर हमेशा ठीक हो जाता है?

नहीं। हेल्दी lifestyle अपनाने से कुछ लिवर समस्याओं के जोखिम को कम करने या कुछ स्थितियों को manage करने में मदद मिल सकती है, लेकिन यह हर बीमारी का इलाज नहीं है।

अगर पहले से कोई लिवर समस्या है, तो उसकी वजह के अनुसार जाँच और सही इलाज की ज़रूरत हो सकती है। इसलिए केवल lifestyle changes पर निर्भर रहना सही नहीं है।

2. लिवर की सेहत के लिए खाने में सबसे ज़रूरी बात क्या है?

किसी एक food को सबसे ज़रूरी मानने के बजाय पूरे खाने के pattern पर ध्यान देना बेहतर है।

  • खाने में सब्ज़ियां और फल शामिल करें।

  • दाल, बीन्स और दूसरे अच्छे protein sources को जगह दें।

  • जहाँ संभव हो, whole grains चुनें।

  • बहुत ज़्यादा मीठे foods और sugary drinks को सीमित रखें।

  • भोजन की मात्रा पर भी ध्यान दें। 

खासकर fatty liver के मामले में simple sugars और मीठे drinks की अधिक मात्रा को सीमित करने की सलाह दी जाती है।

3. क्या शराब लिवर के लिए हमेशा नुकसानदायक होती है?

शराब का ज़्यादा और लंबे समय तक सेवन लिवर को नुकसान पहुँचा सकता है। इसका असर व्यक्ति की मात्रा, पीने की आदत और स्वास्थ्य की स्थिति पर निर्भर कर सकता है।

अगर पहले से लिवर की बीमारी है, तो शराब को लेकर डॉक्टर की सलाह को प्राथमिकता देना बेहतर है।

4. क्या herbal supplements लिवर के लिए सुरक्षित होते हैं?

हर herbal supplement अपने आप सुरक्षित नहीं होता। कुछ herbal products या remedies लिवर को नुकसान पहुँचा सकते हैं।

इसलिए कोई नया supplement या herbal product शुरू करने से पहले डॉक्टर या qualified healthcare professional से सलाह लेना बेहतर है। खासकर अगर पहले से कोई लिवर समस्या है या दूसरी medicines चल रही हैं।

5. क्या वज़न कम करना लिवर के लिए फ़ायदेमंद हो सकता है?

कुछ मामलों में, खासकर fatty liver में, अगर वज़न ज़्यादा है तो धीरे-धीरे वज़न कम करने से फ़ायदा हो सकता है।

लेकिन बहुत तेज़ी से वज़न कम करने के बजाय धीरे-धीरे और टिकाऊ तरीके से बदलाव करना बेहतर माना जाता है। Healthy diet और physical activity भी इस प्रक्रिया का हिस्सा हो सकते हैं।

6. लिवर की सेहत के लिए कब डॉक्टर को दिखाना चाहिए?

अगर लगातार या असामान्य लक्षण महसूस हों, पहले से कोई लिवर बीमारी हो या किसी जाँच रिपोर्ट में लिवर से जुड़ी कोई असामान्यता मिले, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।

अगर डॉक्टर ने आगे की जाँच या follow-up की सलाह दी है, तो उसे नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। कुछ लिवर समस्याओं में शुरुआत में साफ़ लक्षण दिखाई नहीं देते, इसलिए ज़रूरत पड़ने पर blood tests या imaging जैसी जाँच की जा सकती है।

निष्कर्ष

लिवर की सेहत किसी एक “चमत्कारी food” या supplement पर निर्भर नहीं करती। रोज़ की छोटी-छोटी healthy habits ज़्यादा महत्वपूर्ण हो सकती हैं—जैसे संतुलित खान-पान, नियमित physical activity, healthy weight, पर्याप्त नींद और शराब व बहुत ज़्यादा processed foods को लेकर सावधानी रखना।

लेकिन यह भी याद रखना ज़रूरी है कि हर लिवर समस्या का कारण lifestyle नहीं होता। इसलिए किसी बीमारी या लक्षण को केवल खान-पान और routine में बदलाव से ठीक करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।

अगर लगातार कोई चिंता वाली परेशानी हो, जाँच रिपोर्ट में गड़बड़ी आए या पहले से लिवर से जुड़ी कोई बीमारी हो, तो समय पर qualified doctor से सलाह लेना सबसे सुरक्षित तरीका है।

Sources

  1. National Institute of Diabetes and Digestive and Kidney Diseases (NIDDK) — Treatment for NAFLD & NASH

  2. NIDDK — Diagnosis of NAFLD & NASH

  3. WHO -  Physical Activity 

  4. World Health Organization (WHO) — Alcohol

  5. NCCIH — Dietary Supplements Safety 

  6. National Institute of Diabetes and Digestive and Kidney Diseases (NIDDK) — Healthy Eating & Physical Activity for Life

  7. Swasthavritta 

ध्यान दें

यह लेख केवल सामान्य जानकारी और स्वास्थ्य जागरूकता के लिए है। यह किसी लिवर समस्या का diagnosis, इलाज या व्यक्तिगत medical advice नहीं है।

अगर आपको लिवर से जुड़े लगातार या चिंताजनक लक्षण महसूस हों, पहले से कोई लिवर बीमारी हो या किसी जाँच की रिपोर्ट को लेकर चिंता हो, तो योग्य डॉक्टर से संपर्क करें।

Disclaimer: This article is for general informational purposes only and is not a substitute for professional medical advice. Always consult a qualified Ayurvedic practitioner or physician before acting on any information here.

About the Author

Dr Suhail Siddiqui
Dr Suhail Siddiqui

डॉ. सुहैल सिद्दीकी (Dr Suhail Siddiqui), B.A.M.S., एक योग्य एवं पंजीकृत आयुर्वेदिक चिकित्सक हैं। उन्होंने चौधरी ब्रह्म प्रकाश आयुर्वेद चरक संस्थान (Choudhary Brahm Prakash Ayurved Charak Sansthan), गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय से वर्ष 2024 में बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एंड सर्जरी (B.A.M.S.) की डिग्री प्राप्त की है। वे उत्तर प्रदेश बोर्ड ऑफ इंडियन मेडिसिन (UP Board of Indian Medicine) में पंजीकृत चिकित्सक हैं — रजिस्ट्रेशन संख्या 77487 — और वर्तमान में SS Herbal India के साथ आयुर्वेदिक चिकित्सक (Ayurvedic Physician) के रूप में कार्यरत हैं। उन्हें आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा, जीवनशैली प्रबंधन और रोगों की रोकथाम से जुड़े विषयों में विशेष रुचि है। डॉ. सुहैल मुख्य रूप से कान, नाक और गला (ENT) से संबंधित समस्याओं, टिनिटस (Tinnitus), कान में फंगल इंफेक्शन, हकलाना, पथरी, मधुमेह, पाचन संबंधी समस्याओं तथा अन्य सामान्य स्वास्थ्य विषयों पर आयुर्वेद आधारित जानकारी साझा करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल स्वास्थ्य विषयों को सरल भाषा में समझाकर लोगों तक विश्वसनीय और उपयोगी जानकारी पहुँचाना है। SS Herbal India पर प्रकाशित लेखों के लिए डॉ. सुहैल आयुर्वेदिक ग्रंथों, उपलब्ध आधुनिक शोध, चिकित्सा साहित्य तथा विश्वसनीय स्वास्थ्य स्रोतों का अध्ययन करते हैं। उनके नाम से प्रकाशित होने वाला प्रत्येक लेख प्रकाशन से पहले उनकी समीक्षा से होकर जाता है। प्रत्येक लेख का उद्देश्य पाठकों को संतुलित, तथ्य-आधारित और उपयोगी स्वास्थ्य जानकारी प्रदान करना है। यह जानकारी केवल शैक्षणिक एवं जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित की जाती है और किसी भी प्रकार से व्यक्तिगत चिकित्सकीय सलाह का विकल्प नहीं है। डॉ. सुहैल सिद्दीकी का लक्ष्य लोगों को सही स्वास्थ्य जानकारी देकर उन्हें स्वस्थ जीवनशैली अपनाने, रोगों की बेहतर समझ विकसित करने और अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बनने में सहायता करना है।

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