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किडनी स्टोन के शुरुआती लक्षण, जिन्हें अक्सर लोग नज़रअंदाज़ कर देते हैं

किडनी स्टोन के शुरुआती लक्षण अक्सर हल्के होते हैं और लोग उन्हें नज़रअंदाज़ कर देते हैं। जानें शुरुआती संकेत, जोखिम कारक, जरूरी जांच, डॉक्टर से कब मिलना चाहिए और किडनी स्वास्थ्य के लिए अपनाई जाने वाली महत्वपूर्ण आदतें।

Dr Suhail SiddiquiWritten By Dr Suhail SiddiquiPublished: 4 August 2026· 12 min read
किडनी स्टोन के शुरुआती लक्षण, जिन्हें अक्सर लोग नज़रअंदाज़ कर देते हैं

एक नज़र में (At a Glance)

  • किडनी स्टोन (पथरी) के शुरुआती लक्षण कई बार हल्के होते हैं, इसलिए लोग उन्हें सामान्य समस्या समझकर अनदेखा कर देते हैं।

  • कमर या पेट के एक तरफ दर्द, पेशाब में जलन, बार-बार पेशाब आना और पेशाब में ख़ून शुरुआती संकेत हो सकते हैं।

  • छोटी पथरी कुछ मामलों में बिना बड़े लक्षण के पेशाब के साथ अपने आप निकल सकती है, लेकिन हर व्यक्ति में ऐसा नहीं होता।

  • परिवार में पहले किसी को किडनी स्टोन होना, कम पानी पीना और कुछ स्वास्थ्य स्थितियां इसका जोखिम बढ़ा सकती हैं।

  • अगर तेज़ दर्द, बुखार, पेशाब रुकना या पेशाब में ख़ून दिखाई दे, तो बिना देर किए डॉक्टर से संपर्क करें।

  • पर्याप्त पानी पीना और स्वस्थ जीवनशैली अपनाना किडनी के सामान्य स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद माना जाता है।

  • आयुर्वेदिक या घरेलू उपाय केवल सहायक हो सकते हैं। सही जाँच और इलाज के लिए हमेशा डॉक्टर की सलाह लें।

विषय सूची

  • शुरुआती लक्षणों को पहचानना क्यों ज़रूरी है

  • शुरुआत में कौन-से संकेत दिखाई देते हैं

  • दर्द के अलावा कौन-से संकेत अक्सर नज़रअंदाज़ हो जाते हैं

  • क्या सभी लोगों में एक जैसे लक्षण होते हैं?

  • किन लोगों को शुरुआती संकेतों पर अधिक ध्यान देना चाहिए? 

  • लक्षण दिखें तो क्या करें?

  • शुरुआती लक्षणों की पुष्टि कैसे की जाती है? 

  • आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से शुरुआती देखभाल 

  • किडनी स्वास्थ्य के लिए रोज़मर्रा की अच्छी आदतें 

  • कौन-से लक्षण मेडिकल इमरजेंसी हो सकते हैं? 

  • अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

  • निष्कर्ष

शुरुआती लक्षणों को पहचानना क्यों ज़रूरी है?

किडनी हमारे शरीर से गंदगी और अतिरिक्त तरल पदार्थ को छानकर पेशाब के ज़रिए बाहर निकालने का काम करती है। कभी-कभी पेशाब में मौजूद कुछ खनिज (Minerals) और लवण (Salts) आपस में मिलकर छोटे-छोटे क्रिस्टल बना लेते हैं। समय के साथ यही क्रिस्टल किडनी स्टोन (पथरी) का रूप ले सकते हैं।

क्लीवलैंड क्लिनिक (Cleveland Clinic) के अनुसार, शुरुआत में पथरी अक्सर बहुत छोटी होती है। कुछ मामलों में छोटी पथरी बिना किसी बड़े लक्षण के पेशाब के साथ अपने आप निकल सकती है। परेशानी तब हो सकती है, जब पथरी का आकार बढ़ जाए या वह मूत्र मार्ग में फँस जाए।

इसी वजह से शरीर के शुरुआती संकेतों को समय रहते पहचानना ज़रूरी है। अगर सही समय पर डॉक्टर से जाँच और सलाह ली जाए, तो स्थिति को समझने और समय पर उचित इलाज शुरू करने में मदद मिल सकती है।

ध्यान दें: अगर कमर या पेट में तेज़ दर्द, पेशाब में ख़ून, बुखार या पेशाब करने में दिक्कत जैसे लक्षण दिखाई दें, तो बिना देर किए डॉक्टर से संपर्क करें।

शुरुआत में कौन-से संकेत दिखाई देते हैं?

शुरुआत में किडनी स्टोन के शुरुआती लक्षण अक्सर हल्के होते हैं। इसलिए कई लोग इन्हें सामान्य परेशानी समझकर नज़रअंदाज़ कर देते हैं। नीचे कुछ ऐसे संकेत दिए गए हैं, जो शुरुआती अवस्था में दिखाई दे सकते हैं।

संकेत

कैसा महसूस हो सकता है?

कमर के एक तरफ दर्द

पसलियों के नीचे हल्का दर्द, जकड़न या खिंचाव जैसा महसूस हो सकता है।

पेशाब में जलन

पेशाब करते समय हल्की जलन, चुभन या असहजता महसूस हो सकती है।

बार-बार पेशाब आना

थोड़ी-थोड़ी देर में पेशाब करने की इच्छा हो सकती है।

पेशाब के रंग में बदलाव

पेशाब का रंग बदलना या धुंधला दिखाई देना कुछ मामलों में देखा जा सकता है, हालांकि इसके अन्य कारण भी हो सकते हैं। 

पेट के निचले हिस्से में भारीपन

हल्की ऐंठन, दबाव या भारीपन महसूस हो सकता है, जो बीच-बीच में आता-जाता रहे।

मायो क्लिनिक (Mayo Clinic) के अनुसार, किडनी स्टोन का दर्द कई बार लहरों की तरह आता-जाता है। कुछ समय के लिए दर्द तेज़ हो सकता है और फिर कम हो सकता है। इसी वजह से कई लोग शुरुआती संकेतों को गंभीरता से नहीं लेते।

ध्यान दें: ये लक्षण केवल किडनी स्टोन के ही नहीं, बल्कि दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं में भी दिखाई दे सकते हैं। सही कारण जानने के लिए डॉक्टर से जाँच करवाना सबसे सुरक्षित तरीका है।

दर्द के अलावा कौन-से संकेत अक्सर नज़रअंदाज़ हो जाते हैं?

ज़्यादातर लोग मानते हैं कि किडनी स्टोन होने पर सिर्फ तेज़ दर्द होता है। लेकिन कई बार शुरुआत में कुछ ऐसे संकेत भी दिखाई देते हैं, जिन पर लोग ध्यान नहीं देते।

मायो क्लिनिक (Mayo Clinic) और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ डायबिटीज़ एंड डाइजेस्टिव एंड किडनी डिज़ीज़ (NIDDK) के अनुसार, कुछ लोगों में मतली (जी मिचलाना) और उल्टी भी किडनी स्टोन के साथ हो सकती है। इसके अलावा, कुछ लोगों को भूख कम लगना, हल्की थकान या पेट में भारीपन जैसा महसूस हो सकता है। हालांकि, ये लक्षण केवल किडनी स्टोन के ही नहीं, बल्कि दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं में भी दिखाई दे सकते हैं।

इसी वजह से कई लोग इन्हें गैस, अपच या सामान्य पेट की समस्या समझकर नज़रअंदाज़ कर देते हैं। अगर ऐसे लक्षण बार-बार दिखाई दें, लंबे समय तक बने रहें या इनके साथ तेज़ दर्द, बुखार या पेशाब में ख़ून भी दिखाई दे, तो बिना देर किए डॉक्टर से जाँच करवाना ज़रूरी है।

ध्यान दें: केवल इन लक्षणों के आधार पर किडनी स्टोन की पुष्टि नहीं की जा सकती। सही कारण जानने के लिए डॉक्टर की सलाह और ज़रूरत पड़ने पर जाँच करवाना सबसे सुरक्षित तरीका है।

क्या सभी लोगों में एक जैसे लक्षण होते हैं?

नहीं। किडनी स्टोन के शुरुआती लक्षण हर व्यक्ति में एक जैसे नहीं होते। लक्षण इस बात पर निर्भर कर सकते हैं कि पथरी का आकार कितना है, वह किडनी या मूत्र मार्ग में कहाँ है और क्या वह पेशाब के प्रवाह में रुकावट पैदा कर रही है।

मायो क्लिनिक (Mayo Clinic) और NIDDK के अनुसार, कुछ लोगों में शुरुआत में कोई लक्षण दिखाई नहीं देते। वहीं कुछ लोगों को कमर में हल्का दर्द, बेचैनी या पेशाब से जुड़ी हल्की परेशानी महसूस हो सकती है। अगर पथरी मूत्र मार्ग में फँस जाए, तो तेज़ दर्द अचानक शुरू हो सकता है और तुरंत डॉक्टर की ज़रूरत पड़ सकती है।

इसी वजह से केवल लक्षणों के आधार पर यह तय नहीं किया जा सकता कि पथरी है या नहीं। सही कारण जानने के लिए डॉक्टर की सलाह और ज़रूरत पड़ने पर जाँच, जैसे अल्ट्रासाउंड (Ultrasound) या सीटी स्कैन (CT Scan), कराई जा सकती है।

ध्यान दें: अगर तेज़ दर्द, पेशाब में ख़ून, बुखार या पेशाब करने में दिक्कत हो, तो बिना देर किए डॉक्टर से संपर्क करें।

किन लोगों को शुरुआती संकेतों पर अधिक ध्यान देना चाहिए? 

कुछ लोगों में किडनी स्टोन (गुर्दे की पथरी) होने की संभावना दूसरों से ज़्यादा हो सकती है। इसके कुछ सामान्य कारण हो सकते हैं:

  • कम पानी पीना – शरीर में पानी की कमी होने से पथरी बनने का खतरा बढ़ सकता है।

  • परिवार में पहले किसी को पथरी होना – अगर घर में किसी को पहले स्टोन हो चुका है, तो संभावना बढ़ सकती है।

  • पहले पथरी हो चुकी हो – जिन लोगों को पहले किडनी स्टोन हुआ है, उनमें दोबारा होने का खतरा रह सकता है।

  • ज़्यादा नमक और प्रोटीन वाला खाना खाना – खाने की कुछ आदतें भी जोखिम बढ़ा सकती हैं।

  • वज़न ज़्यादा होना – अधिक वज़न शरीर पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है और जोखिम बढ़ा सकता है।

  • कम शारीरिक गतिविधि करना – कम शारीरिक गतिविधि और कुछ जीवनशैली से जुड़े कारण जोखिम को प्रभावित कर सकते हैं। 

मायो क्लिनिक (Mayo Clinic) के अनुसार, जिन लोगों को पहले किडनी स्टोन हो चुका है, उनमें दोबारा पथरी बनने की संभावना बढ़ सकती है।

अगर आप इनमें से किसी जोखिम से जुड़े हैं, तो पानी पीने की आदत, खान-पान और शरीर के संकेतों पर ध्यान देना ज़रूरी है। अगर तेज़ दर्द, पेशाब में ख़ून या पेशाब से जुड़ी परेशानी हो, तो डॉक्टर से सलाह लें।

ध्यान दें: जोखिम होने का मतलब यह नहीं है कि हर व्यक्ति को पथरी होगी। सही जानकारी और समय पर जाँच से बेहतर देखभाल की जा सकती है।

लक्षण दिखें तो क्या करें

अगर किडनी स्टोन के कोई भी संकेत बार-बार महसूस हो रहे हैं, तो घबराने के बजाय सावधानी बरतना ज़रूरी है।

  • पानी की मात्रा पर्याप्त रखें, ताकि शरीर में पानी की कमी न हो।

  • कुछ समय के लिए ज़्यादा नमक और बहुत तला-भुना खाना कम करें।

  • अगर दर्द, जलन या दूसरी परेशानी लगातार बनी रहे, तो खुद से दवा लेने के बजाय डॉक्टर से सलाह लें।

  • सही समय पर जाँच करवाने से समस्या की सही जानकारी मिल सकती है।

याद रखें, हर दर्द या परेशानी पथरी की वजह से नहीं होती। इसलिए सही कारण जानने के लिए डॉक्टर की सलाह लेना सबसे सुरक्षित तरीका है।

शुरुआती लक्षणों की पुष्टि कैसे की जाती है? 

किडनी स्टोन की पहचान सिर्फ लक्षणों से पक्की नहीं की जा सकती। सही जानकारी के लिए डॉक्टर जाँच की सलाह दे सकते हैं।

आमतौर पर जरूरत के अनुसार ये जाँच की जा सकती हैं:

  • यूरिन टेस्ट: पेशाब में संक्रमण या अन्य बदलावों की जानकारी के लिए।

  • ब्लड टेस्ट: किडनी की कार्यक्षमता और शरीर में कुछ बदलावों को समझने के लिए।

  • अल्ट्रासाउंड: पथरी की जगह और आकार जानने के लिए।

  • सीटी स्कैन: कुछ मामलों में अधिक स्पष्ट जानकारी के लिए।

इन जाँचों से डॉक्टर को यह समझने में मदद मिलती है कि पथरी कितनी बड़ी है, कहां स्थित है और आगे किस तरह की देखभाल की जरूरत हो सकती है।

आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से शुरुआती देखभाल 

आयुर्वेद में स्वस्थ जीवनशैली, संतुलित आहार और शरीर में संतुलन बनाए रखने पर ज़ोर दिया गया है। पारंपरिक रूप से सही खान-पान और अच्छी दिनचर्या को शरीर के सामान्य स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

किडनी स्टोन के मामले में यह समझना ज़रूरी है कि आयुर्वेदिक जीवनशैली या घरेलू उपाय केवल सहायक हो सकते हैं। ये बनी हुई पथरी को खत्म करने या डॉक्टर के इलाज का विकल्प नहीं हैं।

अगर पथरी की पुष्टि हो चुकी है या दर्द, पेशाब में परेशानी जैसी समस्या है, तो पहले डॉक्टर से सलाह लें। किसी भी आयुर्वेदिक उपाय या हर्बल उत्पाद का उपयोग शुरू करने से पहले पंजीकृत आयुर्वेद चिकित्सक या डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर रहता है।

रोज़मर्रा की जिंदगी में किडनी स्वास्थ्य के लिए कौन-सी आदतें अपनाएं?

कुछ छोटी-छोटी अच्छी आदतें रोज़ की दिनचर्या में शामिल करके किडनी को स्वस्थ रखने में मदद मिल सकती है।

  • दिनभर पर्याप्त पानी पिएं, ताकि शरीर में पानी की कमी न हो।

  • खाने में ताजे फल और सब्जियां शामिल करें।

  • ज़्यादा नमक और प्रोसेस्ड फूड (पैकेट वाला खाना) कम खाएं।

  • रोज़ थोड़ा टहलें या हल्का व्यायाम करें।

  • पूरी नींद लें और तनाव को कम रखने की कोशिश करें।

ध्यान रखें: ये आदतें किडनी के सामान्य स्वास्थ्य के लिए सहायक हो सकती हैं, लेकिन किसी बीमारी का इलाज नहीं हैं। किसी भी समस्या में डॉक्टर की सलाह को प्राथमिकता दें।

कौन-से लक्षण मेडिकल इमरजेंसी हो सकते हैं? 

कुछ लक्षण ऐसे हो सकते हैं, जिनमें देरी करना सही नहीं होता। अगर इनमें से कोई परेशानी दिखाई दे, तो जल्द डॉक्टर से संपर्क करें:

  • तेज़ और असहनीय दर्द होना।

  • पेशाब में ख़ून दिखाई देना।

  • लगातार बुखार रहना।

  • पेशाब करने में परेशानी या रुकावट महसूस होना।

  • बार-बार उल्टी होना।

ऐसी स्थिति में केवल घरेलू उपायों पर निर्भर न रहें। सही जाँच और समय पर इलाज के लिए डॉक्टर की सलाह लेना सबसे सुरक्षित तरीका है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1. किडनी स्टोन का सबसे पहला लक्षण क्या हो सकता है?

कई लोगों में शुरुआत में कमर के एक तरफ हल्का दर्द, पेशाब में जलन या पेशाब के रंग में बदलाव जैसे संकेत दिखाई दे सकते हैं। हालांकि, हर व्यक्ति में इसके लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं।

2. क्या बिना तेज़ दर्द के भी किडनी स्टोन हो सकता है?

हां, ऐसा हो सकता है। छोटी पथरी कई बार बिना किसी खास परेशानी के पेशाब के रास्ते अपने आप निकल सकती है।

3. क्या पेशाब में ख़ून आना हमेशा पथरी का संकेत होता है?

नहीं, पेशाब में ख़ून आने की कई अन्य वजहें भी हो सकती हैं। इसलिए सही कारण जानने के लिए डॉक्टर से जाँच करवाना ज़रूरी है।

4. शुरुआती लक्षण दिखाई दें तो क्या करना चाहिए?

अगर बार-बार ऐसे संकेत महसूस हों, तो पर्याप्त पानी पिएं, ज़्यादा नमक वाला खाना कम करें और परेशानी बनी रहने पर डॉक्टर से सलाह लें।

5. क्या आयुर्वेदिक उपाय किडनी स्वास्थ्य में मदद कर सकते हैं?

आयुर्वेदिक जीवनशैली, संतुलित आहार और अच्छी आदतें किडनी के सामान्य स्वास्थ्य को बनाए रखने में सहायक हो सकती हैं। हालांकि, इन्हें इलाज का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।

6. किडनी स्टोन से बचाव के लिए कौन-सी आदतें अपनानी चाहिए?

पर्याप्त पानी पीना, संतुलित भोजन करना, रोज़ हल्की शारीरिक गतिविधि करना और ज़्यादा नमक वाले भोजन को सीमित रखना मददगार आदतें हो सकती हैं।

7. किडनी स्टोन में डॉक्टर से तुरंत कब मिलना चाहिए?

अगर तेज़ दर्द, बुखार, पेशाब में ख़ून, बार-बार उल्टी या पेशाब करने में रुकावट जैसी समस्या हो, तो बिना देरी किए डॉक्टर से संपर्क करें।

8. क्या पर्याप्त  पानी पीने से किडनी को फायदा होता है?

हां, शरीर में पर्याप्त पानी की मात्रा बनाए रखना किडनी के सामान्य कामकाज में मदद कर सकता है और शरीर से अपशिष्ट पदार्थ बाहर निकालने में सहायक होता है।

निष्कर्ष

किडनी स्टोन के शुरुआती संकेत कई बार इतने हल्के होते हैं कि लोग उन्हें सामान्य परेशानी समझकर नज़रअंदाज़ कर देते हैं। लेकिन शरीर में होने वाले बदलावों पर ध्यान देकर और समय पर जाँच करवाकर आगे की समस्या से बचने में मदद मिल सकती है।

पर्याप्त पानी पीना, संतुलित भोजन करना और रोज़ थोड़ी शारीरिक गतिविधि करना किडनी के सामान्य स्वास्थ्य के लिए अच्छी आदतें मानी जाती हैं। आयुर्वेदिक जीवनशैली को सहायक रूप में अपनाया जा सकता है, लेकिन किसी भी समस्या में डॉक्टर की जाँच और सलाह को प्राथमिकता देनी चाहिए।

अस्वीकरण

यह लेख केवल सामान्य जानकारी और स्वास्थ्य जागरूकता के उद्देश्य से लिखा गया है। यह डॉक्टर की सलाह, जाँच या इलाज का विकल्प नहीं है।

अगर आपको तेज़ दर्द, बुखार, पेशाब में ख़ून आना, पेशाब करने में परेशानी या रुकावट जैसी समस्या महसूस हो रही है, तो बिना देरी किए योग्य डॉक्टर से सलाह लें। सही समय पर जाँच और उचित उपचार से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को बेहतर तरीके से संभालने में मदद मिल सकती है।

संदर्भ (References)

Disclaimer: This article is for general informational purposes only and is not a substitute for professional medical advice. Always consult a qualified Ayurvedic practitioner or physician before acting on any information here.

About the Author

Dr Suhail Siddiqui
Dr Suhail Siddiqui

डॉ. मोहम्मद सुहैल (B.A.M.S.) एक योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक हैं। उन्होंने वर्ष 2024 में बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एंड सर्जरी (B.A.M.S.) की डिग्री प्राप्त की है। उन्हें आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा, जीवनशैली प्रबंधन और रोगों की रोकथाम से जुड़े विषयों में विशेष रुचि है। डॉ. सुहैल मुख्य रूप से कान, नाक और गला (ENT) से संबंधित समस्याओं, टिनिटस (Tinnitus), कान में फंगल इंफेक्शन, हकलाना, पथरी, मधुमेह, पाचन संबंधी समस्याओं तथा अन्य सामान्य स्वास्थ्य विषयों पर आयुर्वेद आधारित जानकारी साझा करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल स्वास्थ्य विषयों को सरल भाषा में समझाकर लोगों तक विश्वसनीय और उपयोगी जानकारी पहुँचाना है। SS Herbal India पर प्रकाशित लेखों के लिए डॉ. सुहैल आयुर्वेदिक ग्रंथों, उपलब्ध आधुनिक शोध, चिकित्सा साहित्य तथा विश्वसनीय स्वास्थ्य स्रोतों का अध्ययन करते हैं। प्रत्येक लेख का उद्देश्य पाठकों को संतुलित, तथ्य-आधारित और उपयोगी स्वास्थ्य जानकारी प्रदान करना है। यह जानकारी केवल शैक्षणिक एवं जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित की जाती है और किसी भी प्रकार से व्यक्तिगत चिकित्सकीय सलाह का विकल्प नहीं है। डॉ. सुहैल का लक्ष्य लोगों को सही स्वास्थ्य जानकारी देकर उन्हें स्वस्थ जीवनशैली अपनाने, रोगों की बेहतर समझ विकसित करने और अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बनने में सहायता करना है।

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