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क्या हर दौरा मिर्गी होता है? जानें अलग-अलग प्रकार के दौरों के बारे में

क्या हर दौरा मिर्गी होता है? जानें अलग-अलग प्रकार के दौरों के कारण, लक्षण, जाँच और उपचार के बारे में आसान भाषा में।

Dr Suhail SiddiquiWritten By Dr Suhail SiddiquiPublished: 16 August 2026· 13 min read
क्या हर दौरा मिर्गी होता है? जानें अलग-अलग प्रकार के दौरों के बारे में

एक नज़र में (At a Glance)

  • हर दौरा मिर्गी नहीं होता। दौरे कई अलग-अलग कारणों से हो सकते हैं।

  • तेज़ बुखार, सिर की चोट, ब्लड शुगर (रक्त शर्करा) में बदलाव और कुछ अन्य स्वास्थ्य समस्याएँ भी दौरे का कारण बन सकती हैं।

  • मिर्गी के दौरे और गैर-मिर्गी दौरों के कारण, लक्षण और उपचार का तरीका अलग हो सकता है। 

  • सही कारण जानने के लिए डॉक्टर EEG, MRI, CT स्कैन या अन्य ज़रूरी जाँच की सलाह दे सकते हैं।

  • पहली बार दौरा पड़ने, बार-बार दौरे आने या दौरा लंबे समय तक रहने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

  • आयुर्वेदिक जीवनशैली सामान्य स्वास्थ्य के लिए सहायक हो सकती है, लेकिन इसे डॉक्टर की सलाह या इलाज का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।

विषय सूची

  • क्या हर दौरा मिर्गी का संकेत होता है?

  • दौरा आने के पीछे संभावित कारण क्या हो सकते हैं?

  • मिर्गी के दौरे और अन्य दौरों में क्या अंतर है?

  • दौरे कितने प्रकार के हो सकते हैं?

  • किन विशेषताओं से अलग-अलग दौरों की पहचान की जा सकती है?

  • सही कारण जानने के लिए कौन-सी जाँच की जा सकती है?

  • अलग-अलग प्रकार के दौरों में उपचार का तरीका कैसे तय किया जाता है?

  • आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से सहायक जीवनशैली

  • किन परिस्थितियों में चिकित्सकीय मूल्यांकन ज़रूरी हो सकता है?

  • अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

  • निष्कर्ष

क्या हर दौरा मिर्गी का संकेत होता है?

नहीं, हर दौरा मिर्गी का संकेत नहीं होता। दौरे कई अलग-अलग कारणों से आ सकते हैं, इसलिए केवल लक्षण देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि किसी व्यक्ति को मिर्गी है।

ध्यान रखने योग्य बातें:

  • हर दौरे का कारण अलग हो सकता है: सभी दौरे मिर्गी से जुड़े नहीं होते।

  • दूसरे कारण भी हो सकते हैं: तेज़ बुखार, सिर की चोट, ब्लड शुगर या इलेक्ट्रोलाइट में बदलाव जैसी स्थितियों में भी दौरा पड़ सकता है। कुछ लोगों में नींद की कमी दौरे को प्रभावित करने वाला एक कारक हो सकती है।

  • जाँच ज़रूरी है: सही कारण जानने के लिए न्यूरोलॉजिस्ट की सलाह और ज़रूरत पड़ने पर जाँच कराना आवश्यक होता है।

ध्यान दें: दौरे और मिर्गी को समझने के लिए सही चिकित्सकीय मूल्यांकन ज़रूरी होता है। हर दौरा मिर्गी नहीं होता।

दौरा आने के पीछे संभावित कारण क्या हो सकते हैं?

दौरे के कई संभावित कारण हो सकते हैं। सही कारण जानने के लिए डॉक्टर लक्षणों, मेडिकल इतिहास और ज़रूरत के अनुसार जाँच का मूल्यांकन करते हैं। 

संभावित कारण:

  • तेज़ बुखार: छोटे बच्चों में फीब्राइल सीज़र (Febrile Seizure) हो सकता है।

  • सिर की चोट: गंभीर चोट के बाद कुछ लोगों में दौरा पड़ सकता है।

  • ब्लड शुगर में बदलाव: शुगर बहुत कम या बहुत ज़्यादा होने पर दौरा आ सकता है।

  • इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन: सोडियम या अन्य खनिजों का असंतुलन भी कारण बन सकता है।

  • मस्तिष्क संबंधी समस्याएँ: मिर्गी या अन्य न्यूरोलॉजिकल स्थितियों में भी दौरे आ सकते हैं।

  • अन्य कारण: नींद की कमी, कुछ दवाओं के प्रभाव या अन्य स्वास्थ्य समस्याएँ कुछ स्थितियों में दौरे से जुड़ी हो सकती हैं। 

ध्यान दें: NHS और ILAE के अनुसार, दौरे के कारण अलग-अलग हो सकते हैं। इसलिए बिना जाँच के स्वयं निष्कर्ष निकालने या इलाज शुरू करने के बजाय योग्य डॉक्टर से सलाह लेना सबसे सुरक्षित तरीका है।

मिर्गी के दौरे और अन्य दौरों में क्या अंतर है?

मिर्गी से जुड़े दौरे और अन्य कारणों से होने वाले दौरों में अंतर हो सकता है। हालांकि, केवल लक्षण देखकर दोनों में अंतर करना हमेशा संभव नहीं होता। सही कारण जानने के लिए चिकित्सकीय मूल्यांकन ज़रूरी है। 

पहलू

अंतर

कारण

मिर्गी के दौरे: मस्तिष्क की असामान्य विद्युत गतिविधि से जुड़े हो सकते हैं।


अन्य दौरे: तेज़ बुखार, सिर की चोट, ब्लड शुगर या अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से हो सकते हैं।

लक्षण

मिर्गी के दौरे: कुछ लोगों को एक जैसे प्रकार के दौरे दोबारा हो सकते हैं। 


अन्य दौरे: लक्षण कारण के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं।

अवधि

मिर्गी के दौरे:दौरे की अवधि अलग-अलग हो सकती है और यह seizure के प्रकार पर निर्भर करती है। 


अन्य दौरे: अवधि कारण के अनुसार अलग हो सकती है।

चेतना में बदलाव

मिर्गी के दौरे: कई मामलों में चेतना प्रभावित हो सकती है।


अन्य दौरे: यह हर बार नहीं होता और कारण पर निर्भर करता है।

जाँच

मिर्गी के दौरे: EEG सहित अन्य जाँच की सलाह दी जा सकती है।


अन्य दौरे: डॉक्टर ज़रूरत के अनुसार EEG, MRI, CT स्कैन, ब्लड टेस्ट या अन्य जाँच करा सकते हैं।

उपचार

मिर्गी के दौरे: इलाज दौरे के प्रकार और व्यक्ति की स्थिति पर निर्भर करता है।


अन्य दौरे: उपचार मुख्य रूप से उनके मूल कारण पर निर्भर करता है।

ध्यान दें: केवल लक्षणों के आधार पर यह तय नहीं किया जा सकता कि दौरा मिर्गी का है या किसी अन्य कारण से हुआ है। सही कारण जानने के लिए योग्य डॉक्टर की सलाह और आवश्यक जाँच ज़रूरी है।

दौरे कितने प्रकार के हो सकते हैं?

दौरे (Seizures) कई प्रकार के हो सकते हैं और इनके लक्षण अलग-अलग दिखाई दे सकते हैं। International League Against Epilepsy (ILAE) के अनुसार, दौरे को मुख्य रूप से इस आधार पर वर्गीकृत किया जाता है कि वे मस्तिष्क में कहाँ से शुरू होते हैं और व्यक्ति की चेतना व शरीर पर उनका क्या प्रभाव पड़ता है।

मिर्गी के दौरों की 2025 ILAE classification में चार मुख्य श्रेणियाँ हैं:

  • फोकल सीज़र (Focal Seizures): ये मस्तिष्क के एक हिस्से से शुरू होते हैं। इनमें व्यक्ति की चेतना प्रभावित हो सकती है या सामान्य रह सकती है।

  • जनरलाइज़्ड सीज़र (Generalized Seizures): ये generalized seizure class से संबंधित होते हैं और इनमें चेतना या शरीर की गतिविधियों पर अलग-अलग प्रकार से असर पड़ सकता है। 

  • अज्ञात (Unknown): जब यह पता न चल पाए कि दौरा फोकल है या जनरलाइज़्ड, तो उसे इस श्रेणी में रखा जा सकता है।

  • अनक्लासिफाइड (Unclassified): जब उपलब्ध जानकारी के आधार पर दौरे को किसी मुख्य श्रेणी में रखना संभव न हो, तो उसे इस श्रेणी में रखा जा सकता है।

इसके अलावा, फीब्राइल सीज़र (Febrile Seizures) जैसे दौरे कुछ विशेष परिस्थितियों में हो सकते हैं, जैसे छोटे बच्चों में बुखार के दौरान। इन्हें epileptic seizure की मुख्य श्रेणियों से अलग संदर्भ में समझा जाता है।

ध्यान दें: केवल लक्षण देखकर दौरे का प्रकार या कारण तय करना सही नहीं है। सही जानकारी के लिए डॉक्टर लक्षणों, मेडिकल हिस्ट्री और ज़रूरत के अनुसार जाँच का सहारा ले सकते हैं।

किन विशेषताओं से अलग-अलग दौरों की पहचान की जा सकती है?

हर दौरे के लक्षण एक जैसे नहीं होते। WHO और NHS के अनुसार, दौरे की पहचान करते समय डॉक्टर लक्षणों, दौरे की अवधि और व्यक्ति की स्थिति को ध्यान में रखते हैं। सही कारण जानने के लिए केवल लक्षणों पर नहीं, बल्कि ज़रूरत पड़ने पर जाँच भी की जाती है।

इन संकेतों पर ध्यान दिया जा सकता है:

  • शरीर की हरकतें: पूरे शरीर में झटके आ सकते हैं या केवल एक हिस्से में हरकत हो सकती है।

  • चेतना में बदलाव: कुछ मामलों में व्यक्ति बेहोश हो सकता है, जबकि कुछ में होश बना रहता है।

  • दौरे की अवधि: दौरे की अवधि अलग-अलग हो सकती है और यह दौरे के प्रकार तथा व्यक्ति की स्थिति पर निर्भर करती है।  

  • दौरे के बाद की स्थिति: थकान, भ्रम, नींद आना या सिरदर्द महसूस हो सकता है।

  • अन्य लक्षण: तेज़ बुखार, सिर की चोट या अन्य स्वास्थ्य समस्याएँ भी कारण समझने में मदद कर सकती हैं।

ध्यान दें: केवल लक्षण देखकर दौरे का प्रकार तय नहीं किया जा सकता। सही कारण जानने के लिए डॉक्टर की सलाह और जाँच ज़रूरी है। 

सही कारण जानने के लिए कौन-सी जाँच की जा सकती है?

दौरे का सही कारण केवल लक्षण देखकर नहीं बताया जा सकता। इसलिए डॉक्टर व्यक्ति की स्थिति और मेडिकल हिस्ट्री के आधार पर कुछ जाँच की सलाह दे सकते हैं।

डॉक्टर इन जाँचों की सलाह दे सकते हैं:

  • EEG (इलेक्ट्रोएन्सेफेलोग्राम): मस्तिष्क की विद्युत गतिविधि को रिकॉर्ड करने के लिए।

  • MRI: मस्तिष्क की संरचना में किसी बदलाव या समस्या की जाँच के लिए।

  • CT स्कैन: सिर की चोट, रक्तस्राव या अन्य समस्याओं का पता लगाने के लिए।

  • रक्त जाँच (Blood Tests): ब्लड शुगर, संक्रमण या इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन जैसी स्थितियों की जाँच के लिए।

  • न्यूरोलॉजिकल परीक्षण: तंत्रिका तंत्र की कार्यक्षमता का आकलन करने के लिए।

ध्यान दें: हर व्यक्ति को सभी जाँचों की ज़रूरत नहीं होती। कौन-सी जाँच करनी है, इसका फैसला डॉक्टर लक्षणों और स्थिति के अनुसार करते हैं।

अलग-अलग प्रकार के दौरों में उपचार का तरीका कैसे तय किया जाता है?

दौरे का इलाज उसके मूल कारण पर निर्भर करता है। इसलिए पहले सही कारण की पहचान करना सबसे ज़रूरी होता है। सही निदान के बाद उपचार का तरीका दौरे के प्रकार, कारण और व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार तय किया जाता है।

उपचार से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें:

  • कारण के अनुसार इलाज: अगर दौरा किसी पहचाने गए कारण, जैसे ब्लड शुगर में गंभीर बदलाव या अन्य चिकित्सकीय समस्या से जुड़ा है, तो उपचार में उस मूल कारण को संभालना महत्वपूर्ण हो सकता है। मिर्गी से जुड़े दौरों में उपचार दौरे के प्रकार, कारण और व्यक्ति की स्थिति के अनुसार तय किया जाता है। 

  • विशेषज्ञ की सलाह: ज़रूरत पड़ने पर न्यूरोलॉजिस्ट सही जाँच के बाद उपचार की योजना बनाते हैं।

  • नियमित फॉलो-अप: अगर डॉक्टर सलाह दें, तो समय-समय पर जाँच और फॉलो-अप कराना ज़रूरी होता है।

ध्यान दें: बिना डॉक्टर की सलाह के दवा शुरू करना, बंद करना या बदलना सुरक्षित नहीं माना जाता। सही उपचार के लिए हमेशा योग्य डॉक्टर की सलाह लें।

आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से सहायक जीवनशैली

आयुर्वेद में स्वस्थ जीवनशैली को शरीर और मस्तिष्क के समग्र स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण माना गया है। संतुलित दिनचर्या और अच्छी आदतें सामान्य स्वास्थ्य बनाए रखने में सहायक हो सकती हैं। Ministry of AYUSH के अनुसार, स्वस्थ आहार, नियमित दिनचर्या और संतुलित जीवनशैली अच्छे स्वास्थ्य का आधार माने जाते हैं।

आप इन बातों का ध्यान रख सकते हैं:

  • संतुलित आहार लें: ताज़ा, पौष्टिक और समय पर भोजन करें।

  • पर्याप्त नींद लें: रोज़ पर्याप्त और अच्छी नींद लेने की कोशिश करें।

  • तनाव प्रबंधन: योग, ध्यान या गहरी साँस लेने जैसी गतिविधियाँ तनाव प्रबंधन में मदद कर सकती हैं। इन्हें मिर्गी के चिकित्सकीय उपचार का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। तनाव और दौरे के बीच संबंध को बेहतर समझने के लिए तनाव और मिर्गी के दौरे पर हमारा विस्तृत लेख पढ़ें। 

  • नियमित दिनचर्या अपनाएँ: समय पर सोना, जागना और हल्की शारीरिक गतिविधि करना फ़ायदेमंद माना जाता है।

यदि आप आयुर्वेदिक उत्पाद के बारे में जानकारी लेना चाहते हैं, तो हर्बल उत्पाद की जानकारी देख सकते हैं। इसका उपयोग डॉक्टर द्वारा बताए गए उपचार के विकल्प के रूप में नहीं किया जाना चाहिए। 

ध्यान दें: आयुर्वेदिक जीवनशैली सामान्य स्वास्थ्य के लिए सहायक हो सकती है, लेकिन यह मिर्गी, किसी भी प्रकार के दौरे या अन्य न्यूरोलॉजिकल बीमारी की जाँच, डॉक्टर की सलाह या उपचार का विकल्प नहीं है। अगर पहली बार दौरा पड़े, दौरे बार-बार आएँ या लंबे समय तक रहें, तो बिना देरी किए योग्य डॉक्टर या न्यूरोलॉजिस्ट से सलाह लें।

किन परिस्थितियों में चिकित्सकीय मूल्यांकन ज़रूरी हो सकता है?

अगर किसी व्यक्ति को पहली बार दौरा पड़े या दौरे बार-बार आने लगें, तो बिना देरी किए डॉक्टर या न्यूरोलॉजिस्ट से सलाह लेना ज़रूरी है। International League Against Epilepsy के अनुसार, सही समय पर जाँच और चिकित्सकीय मूल्यांकन से दौरे का कारण समझने और उचित उपचार तय करने में मदद मिलती है।

इन स्थितियों में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें:

  • पहली बार दौरा पड़ना

  • दौरा 5 मिनट से ज़्यादा समय तक रहना

  • बार-बार दौरे आना

  • दौरे के दौरान चोट लग जाना

  • साँस लेने में कठिनाई होना

  • गर्भावस्था के दौरान दौरा पड़ना

  • दौरे के बाद लंबे समय तक होश न आना या सामान्य स्थिति में वापस न आना

दौरे के समय सही प्राथमिक सहायता के बारे में विस्तार से जानने के लिए मिर्गी का दौरा पड़ने पर तुरंत क्या करें पढ़ सकते हैं। 

ध्यान दें: इन लक्षणों को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। अगर दौरे के साथ साँस लेने में परेशानी, गंभीर चोट या लंबे समय तक बेहोशी रहे, तो तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें। समय पर चिकित्सकीय मूल्यांकन से सही कारण की पहचान और उचित इलाज शुरू करने में मदद मिल सकती है। 

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1. क्या हर दौरा मिर्गी का संकेत होता है?

नहीं, हर दौरा मिर्गी नहीं होता। दौरे कई अलग-अलग कारणों से हो सकते हैं, जैसे तेज़ बुखार, सिर पर चोट, ब्लड शुगर का स्तर कम होना या कुछ अन्य स्वास्थ्य समस्याएँ। इसलिए किसी भी दौरे को देखकर तुरंत मिर्गी मान लेना सही नहीं है। सही कारण जानने के लिए डॉक्टर की सलाह और जाँच ज़रूरी होती है।

2. मिर्गी से जुड़े दौरे और अन्य कारणों से होने वाले दौरों में क्या अंतर होता है? 

मिर्गी के दौरे आमतौर पर मस्तिष्क में होने वाली असामान्य विद्युत गतिविधि से जुड़े होते हैं और कुछ लोगों में बार-बार हो सकते हैं। वहीं, कुछ अन्य प्रकार के दौरे अस्थायी कारणों से हो सकते हैं, जैसे बुखार, शुगर की समस्या या शरीर में किसी तरह का असंतुलन। दोनों स्थितियों में अंतर समझने के लिए विशेषज्ञ जाँच आवश्यक होती है।

3. क्या एक बार दौरा पड़ने का मतलब मिर्गी होना है?

नहीं, एक बार दौरा पड़ना हमेशा मिर्गी होने का संकेत नहीं होता। कई बार किसी अस्थायी कारण की वजह से भी दौरा आ सकता है। मिर्गी की पुष्टि के लिए डॉक्टर व्यक्ति के लक्षणों, मेडिकल इतिहास और आवश्यक जाँचों के आधार पर निर्णय लेते हैं।

4. डॉक्टर कैसे पता लगाते हैं कि दौरा किस कारण से आया?

दौरे का कारण जानने के लिए डॉक्टर व्यक्ति के लक्षणों और स्वास्थ्य इतिहास की जानकारी लेते हैं। इसके अलावा EEG, MRI, CT स्कैन, रक्त जाँच और न्यूरोलॉजिकल जाँच जैसी प्रक्रियाओं की मदद ली जा सकती है। इन जाँचों से डॉक्टर को स्थिति को बेहतर समझने में सहायता मिलती है।

5. क्या बिना बेहोश हुए भी दौरा पड़ सकता है?

हाँ, कुछ प्रकार के दौरों में व्यक्ति पूरी तरह होश में रह सकता है। उदाहरण के लिए, कुछ फोकल सीज़र में शरीर के किसी हिस्से में अचानक हरकत, अजीब महसूस होना या कुछ समय के लिए असामान्य अनुभव हो सकता है, लेकिन व्यक्ति बेहोश नहीं होता।

6. किस स्थिति में न्यूरोलॉजिस्ट से सलाह लेनी चाहिए?

यदि किसी व्यक्ति को पहली बार दौरा पड़ा है, बार-बार दौरे आते हैं, दौरा लंबे समय तक रहता है या दौरे के दौरान चोट लगना, साँस लेने में परेशानी या अन्य गंभीर लक्षण दिखाई देते हैं, तो जल्द से जल्द न्यूरोलॉजिस्ट से सलाह लेनी चाहिए।

7. क्या आयुर्वेदिक जीवनशैली मस्तिष्क के स्वास्थ्य में सहायक हो सकती है?

हाँ, संतुलित आहार, अच्छी नींद, नियमित दिनचर्या और तनाव को नियंत्रित करने जैसी स्वस्थ जीवनशैली आदतें शरीर और मस्तिष्क के सामान्य स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकती हैं। हालांकि, यह किसी भी चिकित्सकीय जाँच या डॉक्टर द्वारा बताए गए इलाज का विकल्प नहीं है।

निष्कर्ष

हर दौरा मिर्गी नहीं होता। दौरे के पीछे कई अलग-अलग कारण हो सकते हैं, इसलिए सही कारण जानना बहुत ज़रूरी है। किसी भी व्यक्ति को दौरा पड़ने पर घबराने के बजाय स्थिति को समझना और समय पर विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर होता है।

सही जाँच और समय पर चिकित्सकीय मार्गदर्शन से समस्या की पहचान करने और उचित देखभाल की दिशा में कदम उठाने में मदद मिल सकती है। अगर पहली बार दौरा पड़ा है या दौरे बार-बार आ रहे हैं, तो डॉक्टर या न्यूरोलॉजिस्ट से संपर्क करना सुरक्षित तरीका है।

अस्वीकरण (Disclaimer)

यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के उद्देश्य से तैयार किया गया है और इसमें उपलब्ध विश्वसनीय स्वास्थ्य जानकारी का उपयोग किया गया है। व्यक्तिगत स्वास्थ्य स्थिति के लिए डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह लेना आवश्यक है। 

संदर्भ (References)

Disclaimer: This article is for general informational purposes only and is not a substitute for professional medical advice. Always consult a qualified Ayurvedic practitioner or physician before acting on any information here.

About the Author

Dr Suhail Siddiqui
Dr Suhail Siddiqui

डॉ. मोहम्मद सुहैल (B.A.M.S.) एक योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक हैं। उन्होंने वर्ष 2024 में बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एंड सर्जरी (B.A.M.S.) की डिग्री प्राप्त की है। उन्हें आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा, जीवनशैली प्रबंधन और रोगों की रोकथाम से जुड़े विषयों में विशेष रुचि है। डॉ. सुहैल मुख्य रूप से कान, नाक और गला (ENT) से संबंधित समस्याओं, टिनिटस (Tinnitus), कान में फंगल इंफेक्शन, हकलाना, पथरी, मधुमेह, पाचन संबंधी समस्याओं तथा अन्य सामान्य स्वास्थ्य विषयों पर आयुर्वेद आधारित जानकारी साझा करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल स्वास्थ्य विषयों को सरल भाषा में समझाकर लोगों तक विश्वसनीय और उपयोगी जानकारी पहुँचाना है। SS Herbal India पर प्रकाशित लेखों के लिए डॉ. सुहैल आयुर्वेदिक ग्रंथों, उपलब्ध आधुनिक शोध, चिकित्सा साहित्य तथा विश्वसनीय स्वास्थ्य स्रोतों का अध्ययन करते हैं। प्रत्येक लेख का उद्देश्य पाठकों को संतुलित, तथ्य-आधारित और उपयोगी स्वास्थ्य जानकारी प्रदान करना है। यह जानकारी केवल शैक्षणिक एवं जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित की जाती है और किसी भी प्रकार से व्यक्तिगत चिकित्सकीय सलाह का विकल्प नहीं है। डॉ. सुहैल का लक्ष्य लोगों को सही स्वास्थ्य जानकारी देकर उन्हें स्वस्थ जीवनशैली अपनाने, रोगों की बेहतर समझ विकसित करने और अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बनने में सहायता करना है।

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