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तेज़ आवाज़ के संपर्क से कानों पर क्या असर पड़ता है? सुनने की क्षमता और बचाव के तरीके

तेज़ आवाज़ और लंबे समय तक शोर के संपर्क से सुनने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। जानें इसके संभावित असर, शुरुआती संकेत और कानों को सुरक्षित रखने के आसान तरीके।

Dr Suhail SiddiquiWritten By Dr Suhail SiddiquiPublished: Last updated: · 13 min read
तेज़ आवाज़ के संपर्क से कानों पर क्या असर पड़ता है? सुनने की क्षमता और बचाव के तरीके

एक नज़र में (At a Glance)

  • बहुत तेज़ आवाज़ और लंबे समय तक शोर कानों की सुनने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है।

  • तेज़ शोर के बाद कुछ समय के लिए कान में सीटी या घंटी बजना या सुनाई कम देना महसूस हो सकता है।

  • कॉन्सर्ट, तेज़ म्यूज़िक, मशीनों का शोर और बहुत अधिक वॉल्यूम पर हेडफ़ोन या ईयरबड्स का इस्तेमाल इसके आम उदाहरण हैं।

  • शोर वाली जगह पर इयरप्लग या इयरमफ इस्तेमाल करने से कानों तक पहुंचने वाला शोर कम किया जा सकता है।

  • तेज़ आवाज़ के बाद अचानक या लगातार सुनाई कम दे, तो डॉक्टर या ENT विशेषज्ञ से सलाह लें।

विषय सूची

  1. तेज़ आवाज़ क्या मानी जाती है और यह कानों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?

  2. शोर सुनने की प्रक्रिया को कैसे प्रभावित कर सकता है?

  3. कानों पर शोर के क्या प्रभाव पड़ सकते हैं?

  4. क्या सुनने में आया बदलाव अस्थायी हो सकता है?

  5. किन स्थितियों में तेज़ आवाज़ का जोखिम ज़्यादा हो सकता है?

  6. Headphones और Earbuds से कानों को नुकसान का जोखिम कब बढ़ सकता है?

  7. कैसे पहचानें कि तेज़ आवाज़ आपके सुनने पर असर डाल रही है?

  8. तेज़ आवाज़ से कानों की सुरक्षा कैसे करें?

  9. क्या Earplugs और Earmuffs तेज़ आवाज़ से सुरक्षा दे सकते हैं?

  10. आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से कानों की समग्र सेहत के लिए सहायक जीवनशैली

  11. तेज़ आवाज़ के बाद कान में सीटी या सुनने में बदलाव हो तो क्या करें?

  12. किन लोगों को तेज़ शोर के संपर्क से अधिक सावधानी रखनी चाहिए?

  13. तेज़ आवाज़ और कानों की सेहत से जुड़ी आम गलतफहमियां

  14. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

  15. निष्कर्ष

तेज़ आवाज़ क्या मानी जाती है और यह कानों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?

आवाज़ की तेज़ी को डेसिबल (dB) में मापा जाता है। सामान्य बातचीत की आवाज़ करीब 60 dB हो सकती है, जबकि कॉन्सर्ट, तेज़ म्यूज़िक या भारी मशीनों के आसपास शोर इससे काफी ज़्यादा हो सकता है।

कानों पर असर इस बात पर निर्भर करता है कि आवाज़ कितनी तेज़ है और आप कितनी देर तक उसके संपर्क में रहते हैं। बहुत तेज़ शोर का थोड़े समय के लिए संपर्क भी सुनने पर असर डाल सकता है, जबकि लगातार शोर में रहना भी जोखिम बढ़ा सकता है।

शोर सुनने की प्रक्रिया को कैसे प्रभावित कर सकता है?

कान के अंदर मौजूद संवेदनशील संरचनाएँ आवाज़ को सुनने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं और ध्वनि संकेतों को आगे भेजने में मदद करती हैं। NIDCD के अनुसार तेज़ आवाज़ inner ear की sensitive structures को क्षति पहुँचा सकती है। 

बहुत तेज़ या लंबे समय तक शोर के संपर्क में रहने से इन संरचनाओं पर असर पड़ सकता है। बार-बार ऐसा होने पर सुनने की क्षमता में बदलाव का जोखिम बढ़ सकता है।

कानों पर शोर के क्या प्रभाव पड़ सकते हैं?

ऐसे शोर के बाद कुछ लोगों को ये बदलाव महसूस हो सकते हैं:

  • कुछ समय के लिए सुनाई कम देना

  • आवाज़ का दबा-दबा (Muffled) लगना 

  • कान में घंटी, सीटी या भिनभिनाहट सुनाई देना

  • बातचीत समझने में परेशानी होना

  • लंबे समय तक शोर में रहने पर सुनने की क्षमता प्रभावित होने का जोखिम बढ़ना

ध्यान दें: हर व्यक्ति पर असर एक जैसा नहीं होता। यह आवाज़ की तीव्रता, संपर्क की अवधि और शोर के संपर्क की परिस्थितियों पर निर्भर कर सकता है।

क्या सुनने में आया बदलाव अस्थायी हो सकता है?

हाँ, बहुत तेज़ शोर के बाद कुछ लोगों को कुछ समय के लिए सुनाई कम देना या कान में सीटी/रिंगिंग जैसी परेशानी महसूस हो सकती है। शांत माहौल में रहने के बाद यह बदलाव कम हो सकता है, लेकिन हर व्यक्ति में अनुभव अलग हो सकता है।

अगर शोर का संपर्क बार-बार या लंबे समय तक होता रहे, तो सुनने की क्षमता प्रभावित होने का जोखिम बढ़ सकता है। इसलिए लगातार होने वाले बदलाव को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए।

किन स्थितियों में तेज़ आवाज़ का जोखिम ज़्यादा हो सकता है?

कुछ रोज़मर्रा की स्थितियों में कानों को बहुत तेज़ शोर का सामना करना पड़ सकता है, जैसे:

  • कॉन्सर्ट और लाइव इवेंट्स

  • तेज़ म्यूज़िक

  • कार्यस्थल पर लगातार शोर

  • भारी मशीनरी और पावर टूल्स

  • आतिशबाज़ी

  • बहुत तेज़ वॉल्यूम पर हेडफ़ोन या ईयरबड्स

ऐसी जगहों पर शोर की तीव्रता और उससे जुड़े रहने का समय दोनों पर ध्यान देना उपयोगी है।

Headphones और Earbuds से कानों को नुकसान का जोखिम कब बढ़ सकता है?

हेडफ़ोन या ईयरबड्स का इस्तेमाल करते समय जोखिम मुख्य रूप से वॉल्यूम और सुनने की अवधि से जुड़ा होता है।

  • बहुत तेज़ वॉल्यूम पर सुनना

  • लंबे समय तक लगातार इस्तेमाल करना

  • बाहरी शोर में वॉल्यूम और बढ़ा देना

  • सुनने के बीच पर्याप्त ब्रेक न लेना

इसलिए वॉल्यूम को आरामदायक स्तर पर रखना और लंबे समय तक लगातार सुनने से बचना बेहतर आदत है।

कैसे पहचानें कि तेज़ आवाज़ आपके सुनने पर असर डाल रही है?

कुछ बदलाव इस बात का संकेत हो सकते हैं कि सुनने की क्षमता पर शोर का असर पड़ रहा है:

  • आवाज़ें पहले से कम साफ़ सुनाई देना

  • लोगों से बार-बार बात दोहराने के लिए कहना

  • शोर वाली जगह पर बातचीत समझने में परेशानी होना

  • कान में सीटी, घंटी या भिनभिनाहट सुनाई देना

  • TV या मोबाइल का वॉल्यूम पहले से ज़्यादा रखना

अगर ये बदलाव बार-बार महसूस हों, तो सुनने की जाँच के लिए डॉक्टर या ENT विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है। केवल इन संकेतों के आधार पर खुद से किसी समस्या का निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए।

सुनने की क्षमता में कमी और टिनिटस के बीच संबंध को विस्तार से समझने के लिए टिनिटस और सुनने की क्षमता में कमी की जानकारी पढ़ सकते हैं।

तेज़ आवाज़ से कानों की सुरक्षा कैसे करें?

रोज़मर्रा में कुछ आसान आदतें शोर के संपर्क को कम करने में मदद कर सकती हैं:

  • बहुत तेज़ शोर वाली जगह से दूरी रखें।

  • शोर में रहने का समय कम रखें।

  • ज़रूरत पड़ने पर ईयरप्लग या ईयरमफ इस्तेमाल करें।

  • हेडफ़ोन का वॉल्यूम आरामदायक स्तर पर रखें।

  • लंबे समय तक शोर में रहने के बीच छोटे ब्रेक लें।

  • बच्चों को बहुत तेज़ शोर वाले माहौल से बचाने पर ध्यान दें।

WHO सुरक्षित सुनने के लिए आवाज़ की तेज़ी और शोर के संपर्क की अवधि, दोनों पर ध्यान देने की सलाह देता है।

क्या Earplugs और Earmuffs तेज़ आवाज़ से सुरक्षा दे सकते हैं?

हाँ, ईयरप्लग और ईयरमफ शोर की मात्रा को कम करने में मदद कर सकते हैं। ये खासकर ऐसे माहौल में उपयोगी हो सकते हैं जहाँ तेज़ आवाज़ से बचना मुश्किल हो।

इनका सही फिट और इस्तेमाल भी ज़रूरी है। सही तरीके से न लगाए जाने पर इनसे मिलने वाली सुरक्षा कम हो सकती है।

आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से तेज़ आवाज़ से बचाव और कानों की देखभाल

आयुर्वेद में समग्र स्वास्थ्य, संतुलित दिनचर्या और शरीर की सामान्य देखभाल पर ध्यान दिया जाता है। तेज़ आवाज़ से जुड़े जोखिम को देखते हुए, इन सामान्य wellness habits के साथ शोर से बचाव और सुरक्षित सुनने की आदतों को भी रोज़मर्रा की देखभाल का हिस्सा बनाया जा सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और NIDCD भी तेज़ आवाज़ के संपर्क को कम करने और श्रवण सुरक्षा (hearing protection)  का उपयोग करने को सुनने की सुरक्षा के महत्वपूर्ण तरीकों में शामिल करते हैं।

  • कानों को आराम दें: तेज़ आवाज़ वाले माहौल से निकलने के बाद कुछ समय शांत जगह पर बिताएं और लगातार शोर के संपर्क से बचें।

  • वॉल्यूम नियंत्रित रखें: हेडफ़ोन या ईयरबड्स इस्तेमाल करते समय आवाज़ को जरूरत से ज़्यादा तेज़ न रखें।

  • शोर से दूरी और ब्रेक: कॉन्सर्ट, मशीनरी या अन्य शोर वाली जगहों पर संभव हो तो स्रोत से दूरी रखें और बीच-बीच में शांत जगह पर ब्रेक लें।

  • Hearing protection इस्तेमाल करें: बहुत तेज़ शोर वाली जगहों पर सही तरीके से फिट होने वाले earplugs या earmuffs का इस्तेमाल किया जा सकता है।

  • सुनने में बदलाव को नज़रअंदाज़ न करें: तेज़ आवाज़ के बाद कान में सीटी या घंटी जैसी आवाज़, कान भरा-भरा लगना या सुनने में बदलाव महसूस हो तो इसे लगातार बना रहने पर स्वास्थ्य विशेषज्ञ से दिखाएं।

कानों की सामान्य देखभाल से जुड़े आयुर्वेदिक उत्पादों की जानकारी के लिए हमारा हर्बल उत्पाद देख सकते हैं। उपयोग से पहले उत्पाद की जानकारी पढ़ें और आवश्यकता होने पर योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लें। 

ज़रूरी बात: ये सुझाव कानों की सामान्य देखभाल और सुरक्षित सुनने की आदतों के लिए हैं। आयुर्वेदिक जीवनशैली को तेज़ आवाज़ से होने वाली hearing damage का इलाज या निश्चित बचाव नहीं माना जाना चाहिए। अगर सुनने में अचानक या लगातार बदलाव हो, तो उचित चिकित्सकीय जाँच ज़रूरी है।

तेज़ आवाज़ के बाद कान में सीटी या सुनने में बदलाव हो तो क्या करें?

तेज़ आवाज़ के बाद कान में सीटी, घंटी या भिनभिनाहट जैसी आवाज़ सुनाई देना या आवाज़ें कुछ समय के लिए धीमी लगना हो सकता है। WHO के अनुसार, तेज़ आवाज़ के बाद कान में सीटी या सुनाई कम देने जैसी समस्या कुछ समय के लिए हो सकती है और कई मामलों में सुधार हो सकता है, लेकिन अगर सीटी लगातार बनी रहे या सुनने में साफ़ बदलाव महसूस हो, तो सुनने की जाँच करवाना बेहतर है।

  • तेज़ शोर से हटकर कुछ समय शांत जगह पर रहें

  • कुछ समय तक तेज़ म्यूज़िक, हेडफ़ोन और ईयरबड्स से बचें।

  • सीटी या सुनने में बदलाव बना रहे या बढ़ता जाए, तो डॉक्टर या hearing professional से सलाह लें।

  • अगर सुनाई देने में अचानक कमी या स्पष्ट बदलाव महसूस हो, तो इसे सामान्य असर मानकर नजरअंदाज न करें और समय पर चिकित्सकीय जाँच करवाएँ। 

कान में सीटी या घंटी जैसी आवाज़ के अन्य संभावित कारणों के लिए टिनिटस के कारण और लक्षणों के बारे में पढ़ें।

ज़रूरी बात: तेज़ आवाज़ के बाद होने वाली हर समस्या एक जैसी नहीं होती। अगर सुनने में अचानक बदलाव के साथ चक्कर, कान में दर्द या तेज़/लगातार सीटी जैसी परेशानी हो, तो चिकित्सकीय सलाह लेना ज़रूरी है। कान में दर्द के संभावित कारणों और बचाव के बारे में कान में दर्द से जुड़ी जानकारी भी पढ़ सकते हैं।  WHO भी अचानक tinnitus के साथ hearing loss या dizziness होने पर डॉक्टर से संपर्क करने की सलाह देता है।

किन लोगों को तेज़ शोर के संपर्क से अधिक सावधानी रखनी चाहिए?

जिन लोगों का रोज़मर्रा में तेज़ शोर से बार-बार सामना होता है, उन्हें सुनने की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देना चाहिए। WHO के अनुसार, तेज़ संगीत, मनोरंजन वाली जगहों और काम के दौरान होने वाला लगातार शोर सुनने की क्षमता के लिए जोखिम बढ़ा सकता है।

  • तेज़ शोर वाले वर्कप्लेस में काम करने वाले लोग

  • संगीतकार और परफ़ॉर्मर्स

  • नियमित रूप से कॉन्सर्ट या तेज़ संगीत वाले कार्यक्रमों में जाने वाले लोग

  • भारी मशीनरी या पावर टूल्स के आसपास काम करने वाले लोग

  • लंबे समय तक तेज़ वॉल्यूम पर हेडफ़ोन या ईयरबड्स इस्तेमाल करने वाले लोग

ऐसे मामलों में शोर से दूरी बनाना, बीच-बीच में शांत जगह पर ब्रेक लेना और ज़रूरत के अनुसार earplugs या earmuffs का इस्तेमाल करना मददगार हो सकता है।

तेज़ आवाज़ और कानों की सेहत से जुड़ी आम गलतफहमियां

भ्रांति: केवल दर्द होने पर ही तेज़ आवाज़ कानों को नुकसान पहुंचाती है।
तथ्य: सुनने की क्षमता में बदलाव हमेशा दर्द के साथ नहीं होता। कान में लगातार सीटी या बातचीत समझने में परेशानी जैसे संकेत भी ध्यान देने योग्य हैं।

भ्रांति: हेडफ़ोन इस्तेमाल करना हमेशा सुरक्षित होता है।
तथ्य: जोखिम मुख्य रूप से वॉल्यूम, सुनने की अवधि और शोर के संपर्क पर निर्भर करता है। WHO आवाज़ कम रखने और तेज़ शोर में exposure का समय सीमित करने की सलाह देता है।

भ्रांति: एक बार तेज़ आवाज़ सुनने से हमेशा स्थायी hearing loss हो जाता है।

तथ्य: ऐसा जरूरी नहीं है। असर आवाज़ की तीव्रता, संपर्क की अवधि और अन्य परिस्थितियों पर निर्भर करता है। बहुत तेज़ आवाज़ का एक बार का संपर्क भी hearing damage कर सकता है, जबकि कुछ मामलों में तेज़ आवाज़ के बाद होने वाला सुनने में बदलाव अस्थायी हो सकता है। 

टिनिटस के अन्य संभावित कारणों में कान में मैल जमना भी शामिल हो सकता है। इसके बारे में ईयरवैक्स और टिनिटस का संबंध पढ़ें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1. क्या तेज़ आवाज़ से सुनने की क्षमता कम हो सकती है?
हाँ। बहुत तेज़ आवाज़ या लंबे समय तक शोर के संपर्क में रहने से सुनने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। WHO के अनुसार, जोखिम आवाज़ की तेज़ी और उसके संपर्क में रहने के समय, दोनों पर निर्भर करता है।

2. तेज़ आवाज़ के बाद कान में सीटी क्यों सुनाई दे सकती है?
तेज़ शोर के बाद कुछ लोगों को कान में सीटी, घंटी या भिनभिनाहट जैसी आवाज़ कुछ समय के लिए महसूस हो सकती है। अगर यह परेशानी बनी रहे या बार-बार हो, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।

3. क्या Headphones से सुनने की क्षमता प्रभावित हो सकती है?
बहुत तेज़ वॉल्यूम पर लंबे समय तक हेडफ़ोन या ईयरबड्स इस्तेमाल करने से सुनने पर असर पड़ने का जोखिम बढ़ सकता है। WHO सुरक्षित सुनने के लिए वॉल्यूम कम रखने और तेज़ आवाज़ के संपर्क का समय सीमित करने की सलाह देता है।

4. कानों को तेज़ आवाज़ से कैसे बचाएं?
शोर से दूरी रखें, हेडफ़ोन का वॉल्यूम कम रखें और तेज़ आवाज़ वाले माहौल में जरूरत के अनुसार earplugs या earmuffs का इस्तेमाल करें। बीच-बीच में शांत जगह पर ब्रेक लेना भी उपयोगी हो सकता है।

5. क्या Earplugs तेज़ आवाज़ से कानों की सुरक्षा करते हैं?
हाँ, सही तरीके से पहने गए earplugs तेज़ आवाज़ से कानों तक पहुंचने वाले शोर को कम करने में मदद कर सकते हैं। WHO भी तेज़ शोर वाली जगहों पर hearing protection के इस्तेमाल को सुरक्षित सुनने की आदतों में शामिल करता है।

6. तेज़ आवाज़ के बाद सुनाई कम दे तो कब डॉक्टर से मिलें?
अगर सुनने में अचानक या साफ़ बदलाव महसूस हो, या परेशानी बनी रहे, तो इसे नज़रअंदाज़ न करें। ऐसी स्थिति में समय पर डॉक्टर या ENT विशेषज्ञ से जाँच करवाना बेहतर है।

7. क्या कार्यस्थल के शोर से सुनने की क्षमता पर असर पड़ सकता है?
हाँ। लंबे समय तक तेज़ शोर वाले कार्यस्थल पर रहने से सुनने की क्षमता पर असर पड़ने का जोखिम बढ़ सकता है। ऐसे वातावरण में hearing protection और शोर से बचाव के उपाय महत्वपूर्ण हैं।

8. क्या बच्चों के कान तेज़ आवाज़ से प्रभावित हो सकते हैं?
बच्चों को भी बहुत तेज़ आवाज़ से बचाना ज़रूरी है। WHO बच्चों और किशोरों के लिए भी सुरक्षित सुनने की आदतों और तेज़ शोर से बचाव पर ज़ोर देता है।

निष्कर्ष

तेज़ आवाज़ का असर केवल आवाज़ की तीव्रता पर नहीं, बल्कि कितनी देर और कितनी बार शोर के संपर्क में रहते हैं, इस पर भी निर्भर करता है। कुछ बदलाव थोड़े समय के लिए हो सकते हैं, लेकिन बार-बार तेज़ शोर सुनने से सुनने की क्षमता पर असर पड़ने का जोखिम बढ़ सकता है।

इसलिए वॉल्यूम कम रखना, शोर से दूरी बनाना, बीच-बीच में ब्रेक लेना और जरूरत पड़ने पर श्रवण सुरक्षा (hearing protection) का इस्तेमाल करना अच्छी सुनने की आदतें हैं। WHO की सुरक्षित सुनने संबंधी सलाह भी इन्हीं सावधानियों पर ज़ोर देती है।

अगर तेज़ आवाज़ के बाद सुनने में अचानक या लगातार बदलाव, कान में लगातार सीटी या अन्य असामान्य परेशानी महसूस हो, तो खुद से कारण तय करने के बजाय योग्य डॉक्टर या ENT विशेषज्ञ से जाँच करवाना बेहतर है।

स्रोत / References

  1. World Health Organization (WHO) – Safe Listening

  2. National Institute on Deafness and Other Communication Disorders (NIDCD) – Noise-Induced Hearing Loss

  3. NIDCD – Hearing Protectors

  4. NIDCD – How Does Noise Damage Your Hearing?

  5. World Health Organization (WHO) – Tinnitus

  6. NIDCD – Protect Your Child’s Hearing

अस्वीकरण: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के लिए है। इसे व्यक्तिगत चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार का विकल्प न मानें। किसी भी लगातार या अचानक सुनने संबंधी समस्या के लिए योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लें।

Disclaimer: This article is for general informational purposes only and is not a substitute for professional medical advice. Always consult a qualified Ayurvedic practitioner or physician before acting on any information here.

About the Author

Dr Suhail Siddiqui
Dr Suhail Siddiqui

डॉ. मोहम्मद सुहैल (B.A.M.S.) एक योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक हैं। उन्होंने वर्ष 2024 में बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एंड सर्जरी (B.A.M.S.) की डिग्री प्राप्त की है। उन्हें आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा, जीवनशैली प्रबंधन और रोगों की रोकथाम से जुड़े विषयों में विशेष रुचि है। डॉ. सुहैल मुख्य रूप से कान, नाक और गला (ENT) से संबंधित समस्याओं, टिनिटस (Tinnitus), कान में फंगल इंफेक्शन, हकलाना, पथरी, मधुमेह, पाचन संबंधी समस्याओं तथा अन्य सामान्य स्वास्थ्य विषयों पर आयुर्वेद आधारित जानकारी साझा करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल स्वास्थ्य विषयों को सरल भाषा में समझाकर लोगों तक विश्वसनीय और उपयोगी जानकारी पहुँचाना है। SS Herbal India पर प्रकाशित लेखों के लिए डॉ. सुहैल आयुर्वेदिक ग्रंथों, उपलब्ध आधुनिक शोध, चिकित्सा साहित्य तथा विश्वसनीय स्वास्थ्य स्रोतों का अध्ययन करते हैं। प्रत्येक लेख का उद्देश्य पाठकों को संतुलित, तथ्य-आधारित और उपयोगी स्वास्थ्य जानकारी प्रदान करना है। यह जानकारी केवल शैक्षणिक एवं जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित की जाती है और किसी भी प्रकार से व्यक्तिगत चिकित्सकीय सलाह का विकल्प नहीं है। डॉ. सुहैल का लक्ष्य लोगों को सही स्वास्थ्य जानकारी देकर उन्हें स्वस्थ जीवनशैली अपनाने, रोगों की बेहतर समझ विकसित करने और अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बनने में सहायता करना है।

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