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क्या कान में मैल जमने से टिनिटस हो सकता है? कारण, संकेत और कान की सफाई की सही जानकारी

कान में मैल जमने से कुछ लोगों में टिनिटस जैसी आवाज़ महसूस हो सकती है। जानें इयरवैक्स ब्लॉकेज के संकेत, टिनिटस से इसका संबंध और कान की सुरक्षित सफाई के तरीके।

Dr Suhail SiddiquiWritten By Dr Suhail SiddiquiPublished: · 15 min read
क्या कान में मैल जमने से टिनिटस हो सकता है? कारण, संकेत और कान की सफाई की सही जानकारी

एक नज़र में (At a Glance)

  • कान का मैल (Earwax/Cerumen) कान की प्राकृतिक सुरक्षा का हिस्सा है और इसे केवल गंदगी समझना सही नहीं है।

  • जब मैल ज़्यादा जमा होकर कान की नली को ब्लॉक कर देता है, तो कान भरा हुआ लगना, सुनने में कमी या टिनिटस जैसी परेशानी हो सकती है।

  • हर टिनिटस का कारण कान का मैल नहीं होता। इसके पीछे दूसरी वजहें भी हो सकती हैं, इसलिए केवल लक्षण देखकर कारण तय नहीं करना चाहिए।

  • कॉटन बड्स से कान के अंदर सफाई करने से बचें, क्योंकि इससे मैल और अंदर जा सकता है या कान को चोट लग सकती है।

  • अगर कान में मैल जमा होने से परेशानी हो रही है, तो डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सुरक्षित सफाई के बारे में सलाह लें।

  • अचानक सुनाई कम देना, तेज़ कान दर्द या कान से डिस्चार्ज होने पर इसे सिर्फ़ मैल की समस्या न मानें और समय पर डॉक्टर से सलाह लें।

विषय सूची

  1. कान का मैल क्या है और यह कान के लिए क्यों ज़रूरी होता है?

  2. कान में मैल कब समस्या बन सकता है?

  3. क्या कान में मैल जमने से टिनिटस हो सकता है?

  4. Earwax Blockage से टिनिटस कैसे जुड़ सकता है?

  5. कान में मैल जमने के कौन-से संकेत दिखाई दे सकते हैं?

  6. कैसे समझें कि टिनिटस का संबंध Earwax Blockage से हो सकता है?

  7. क्या कान का मैल हटाने से टिनिटस कम हो सकता है?

  8. कान के मैल की जाँच कैसे की जाती है?

  9. कान की सफाई का सही और सुरक्षित तरीका क्या है?

  10. क्या Cotton Buds से कान का मैल निकालना सही है?

  11. कान की सफाई करते समय किन गलतियों से बचें?

  12. आयुर्वेदिक दृष्टिकोण और स्वस्थ जीवनशैली 

  13. कब टिनिटस को केवल कान का मैल मानकर नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए?

  14. Earwax और Tinnitus से जुड़ी आम गलतफहमियां

  15. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

  16. निष्कर्ष

कान का मैल क्या है और यह कान के लिए क्यों ज़रूरी होता है?

कान का मैल, जिसे मेडिकल भाषा में सेरुमेन (Cerumen) कहा जाता है, सिर्फ़ गंदगी नहीं है। यह कान की प्राकृतिक सुरक्षा का हिस्सा है और कान की नली को धूल, गंदगी और बाहरी कणों से बचाने में मदद करता है।

यह कान की नली की त्वचा को सुरक्षित और नम बनाए रखने में मदद करता है। आमतौर पर पुराना मैल धीरे-धीरे अपने आप बाहर निकल जाता है, इसलिए कान के अंदर बार-बार सफाई करने की ज़रूरत नहीं होती।

समस्या तब हो सकती है, जब यह ज़रूरत से ज़्यादा जमा होकर कान की नली को बंद करने लगे। ऐसी स्थिति में सुनने में कमी, कान भरा हुआ लगना या दूसरी परेशानी महसूस हो सकती है।

कान में मैल कब समस्या बन सकता है?

हर व्यक्ति के कान में कुछ मात्रा में मैल होना सामान्य है। परेशानी आमतौर पर तब होती है, जब यह बहुत ज़्यादा जमा होकर रास्ते को रोकने लगे।

  • सामान्य ईयरवैक्स: यह कान की प्राकृतिक प्रक्रिया का हिस्सा है और अक्सर अपने आप बाहर निकलता रहता है।

  • ज़्यादा मैल जमा होना: जब सामान्य से अधिक मात्रा में मैल इकट्ठा होने लगे, तो इससे परेशानी हो सकती है।

  • कठोर मैल: लंबे समय तक जमा रहने पर यह सख़्त हो सकता है और आसानी से बाहर नहीं निकलता।

  • इयरवैक्स ब्लॉकेज: जब जमा हुआ मैल कान की नली को आंशिक या पूरी तरह बंद कर देता है, तो सुनने में बदलाव या भरेपन जैसी समस्या हो सकती है।

अगर कान में बार-बार ब्लॉकेज हो रहा है या सुनने में बदलाव महसूस हो रहा है, तो खुद से अंदर तक सफाई करने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।

क्या कान में मैल जमने से टिनिटस हो सकता है?

हाँ, बहुत ज़्यादा ईयरवैक्स जमा होकर कान की नली को ब्लॉक कर सकता है और कुछ लोगों में इससे टिनिटस यानी घंटी, भिनभिनाहट या दूसरी आवाज़ें सुनाई दे सकती हैं।

लेकिन एक बात ध्यान रखना ज़रूरी है:

हर टिनिटस का कारण कान का मैल नहीं होता।

टिनिटस के पीछे कई अलग-अलग कारण हो सकते हैं। इसलिए केवल कान में आवाज़ आने के आधार पर इसका कारण ईयरवैक्स मान लेना सही नहीं है। सही कारण जानने के लिए डॉक्टर कान की जाँच कर सकते हैं और ज़रूरत के अनुसार आगे की जाँच की सलाह दे सकते हैं।

Earwax Blockage से टिनिटस कैसे जुड़ सकता है?

इसे आसान तरीके से ऐसे समझ सकते हैं:

इयरवैक्स का अधिक जमा होना → कान की नली में ब्लॉकेज → कान में भरापन या सुनने में बदलाव; कुछ लोगों में इसके साथ टिनिटस भी हो सकता है। 

अगर ईयरवैक्स इतना जमा हो जाए कि कान की नली प्रभावित होने लगे, तो कान में भरापन या सुनने में बदलाव महसूस हो सकता है। कुछ लोगों में इसके साथ टिनिटस भी हो सकता है। हालांकि, यह हर व्यक्ति में होने वाली निश्चित प्रक्रिया नहीं है और टिनिटस के अन्य कारण भी हो सकते हैं। 

कान में मैल जमने के कौन-से संकेत दिखाई दे सकते हैं?

मैल ज़्यादा जमा होने पर कुछ लोगों में ये परेशानियां हो सकती हैं:

  • कान बंद या भरा हुआ लगना

  • सुनने में कमी महसूस होना

  • कान में रिंगिंग या भिनभिनाहट जैसी आवाज़ आना

  • कान में खुजली या असहजता होना

  • कभी-कभी चक्कर या असहजता महसूस हो सकती है। 

ध्यान दें: ये संकेत केवल मैल जमने की संभावना बता सकते हैं। इनके आधार पर खुद से निदान नहीं करना चाहिए। सही कारण की पुष्टि कान की जाँच से ही की जा सकती है।

कैसे समझें कि टिनिटस का संबंध Earwax Blockage से हो सकता है?

कुछ बातों पर ध्यान दिया जा सकता है:

  • क्या कान बंद या भरा हुआ महसूस हो रहा है?

  • क्या सुनने में पहले की तुलना में बदलाव आया है?

  • क्या कान में आवाज़ के साथ भरापन भी महसूस हो रहा है?

  • क्या कान की जाँच में वैक्स ब्लॉकेज दिखाई देता है?

  • क्या डॉक्टर द्वारा मैल हटाने के बाद टिनिटस या कान के भरेपन में कोई बदलाव आया? 

महत्वपूर्ण: इन संकेतों के आधार पर खुद से यह तय न करें कि टिनिटस का कारण कान का मैल ही है। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर या ENT विशेषज्ञ/प्रशिक्षित स्वास्थ्य विशेषज्ञ से कान की जाँच करवाना बेहतर है।

अगर टिनिटस के साथ सुनने की क्षमता में भी बदलाव महसूस हो रहा है, तो टिनिटस और सुनने की क्षमता में कमी के संबंध के बारे में अधिक जानकारी पढ़ सकते हैं। 

क्या कान का मैल हटाने से टिनिटस कम हो सकता है?

अगर टिनिटस का संबंध इयरवैक्स ब्लॉकेज से है, तो मैल हटाने के बाद कुछ लोगों को आवाज़ में कमी या सुनने में सुधार महसूस हो सकता है।

लेकिन टिनिटस के अन्य कारण भी हो सकते हैं, इसलिए केवल इयरवैक्स को इसका कारण मानना उचित नहीं है। इसलिए मैल हटाने के बाद भी टिनिटस बना रह सकता है। मैल निकालते ही टिनिटस पूरी तरह ठीक हो जाएगा, ऐसा कहना सही नहीं है। इसका असर व्यक्ति की स्थिति और टिनिटस के कारण पर निर्भर करता है।

टिनिटस के कारण हर व्यक्ति में अलग हो सकते हैं। इसके संभावित कारण, लक्षण और देखभाल के बारे में विस्तार से जानने के लिए टिनिटस के कारण और लक्षण पढ़ सकते हैं। 

कान के मैल की जाँच कैसे की जाती है?

ईयर एग्ज़ामिनेशन (Ear Examination)

डॉक्टर या स्वास्थ्य विशेषज्ञ कान के अंदर देखकर यह जाँच करते हैं कि मैल कितना जमा है और क्या वह कान की नली को ब्लॉक कर रहा है।

Otoscope क्या होता है?

ओटोस्कोप (Otoscope) एक मेडिकल उपकरण है, जिसकी मदद से डॉक्टर कान की नली और अंदर की संरचनाओं को देख सकते हैं। इससे मैल के जमा होने या ब्लॉकेज की पहचान करने में मदद मिलती है।

ईयर कैनाल में ब्लॉकेज की पहचान

जाँच के दौरान यह देखा जाता है कि मैल ने कान की नली को कितना प्रभावित किया है। इसके आधार पर आगे की सफाई या उपचार के बारे में सलाह दी जा सकती है।

ध्यान रखें कि केवल मैल की जाँच से टिनिटस के हर संभावित कारण का पता नहीं चलता। अगर आवाज़ बनी रहती है, तो डॉक्टर जरूरत के अनुसार आगे की जाँच की सलाह दे सकते हैं।

कान की सफाई का सही और सुरक्षित तरीका क्या है?

हर व्यक्ति को कान के अंदर जमा मैल निकालने की जरूरत नहीं होती। सामान्य इयरवैक्स अक्सर अपने आप बाहर निकल जाता है।

अगर मैल जमा होने से कान बंद लग रहा है या सुनने में बदलाव महसूस हो रहा है, तो खुद से कान साफ करने के बजाय स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है।

  • कान के अंदर कोई नुकीली या कठोर चीज़ न डालें।

  • कॉटन बड्स से अंदर तक सफाई करने से बचें।

  • जरूरत होने पर डॉक्टर या प्रशिक्षित स्वास्थ्य विशेषज्ञ से मैल निकलवाएं।

  • जरूरत पड़ने पर स्वास्थ्य विशेषज्ञ कान की स्थिति के अनुसार इरिगेशन (Irrigation) या माइक्रोसक्शन (Microsuction) जैसी विधियों से मैल निकाल सकते हैं। 

  • कौन-सी विधि सही है, यह कान की स्थिति और जाँच के आधार पर तय की जाती है।

महत्वपूर्ण: अगर कान में तेज़ दर्द, डिस्चार्ज, कान के पर्दे से जुड़ी समस्या या अचानक सुनाई कम देने जैसी परेशानी हो, तो खुद से सफाई करने के बजाय डॉक्टर से जाँच करवाना बेहतर है।

अगर कान में खुजली, डिस्चार्ज या संक्रमण जैसे लक्षण भी दिखाई दें, तो कान में फंगल इंफेक्शन के लक्षण और कारण के बारे में भी जानकारी देख सकते हैं। 

क्या Cotton Buds से कान का मैल निकालना सही है?

नहीं, कान के अंदर कॉटन बड्स डालकर मैल निकालने से बचना चाहिए। कान का मैल अक्सर अपने आप बाहर निकल जाता है, इसलिए अंदर तक सफाई करने की जरूरत नहीं होती।

कॉटन बड्स का इस्तेमाल करने से:

  • मैल और अंदर जाकर ब्लॉकेज बढ़ा सकता है।

  • कान की नली में चोट लग सकती है।

  • कान के पर्दे को नुकसान पहुंचने का जोखिम हो सकता है।

कॉटन बड्स का इस्तेमाल केवल कान के बाहरी हिस्से को साफ करने तक सीमित रखना बेहतर है।

कान की सफाई करते समय किन गलतियों से बचें?

कान की सफाई के दौरान इन बातों का ध्यान रखें:

  • कान में पिन, माचिस की तीली या कोई नुकीली चीज़ न डालें।

  • कॉटन बड्स को कान की नली के अंदर न डालें।

  • सख्त मैल को खुद खुरचने की कोशिश न करें।

  • Ear Candling जैसी असुरक्षित विधियों से बचें।

  • बिना उचित सलाह के कान में घरेलू पदार्थ या कोई दूसरी चीज़ न डालें।

  • मैल निकालने के लिए कान के अंदर कोई वस्तु डालने से बचें।

अगर कान बंद लग रहा है या सुनने में बदलाव महसूस हो रहा है, तो स्वास्थ्य विशेषज्ञ से जाँच करवाना बेहतर है।

आयुर्वेदिक दृष्टिकोण और स्वस्थ जीवनशैली 

आयुर्वेदिक परंपरा में संतुलित आहार, नियमित दिनचर्या और पर्याप्त आराम जैसे lifestyle practices पर ध्यान दिया जाता है। इन्हें सामान्य wellness के संदर्भ में देखा जाना चाहिए, न कि टिनिटस या earwax blockage के प्रमाणित इलाज के रूप में। 

  • संतुलित आहार: पौष्टिक और संतुलित भोजन शरीर को ज़रूरी पोषक तत्व देने में मदद करता है।

  • नियमित दिनचर्या: समय पर खाना, सोना और रोज़ की गतिविधियों को नियमित रखना स्वस्थ जीवनशैली का हिस्सा है।

  • पर्याप्त नींद और आराम: अच्छी नींद और पर्याप्त आराम शरीर की सामान्य सेहत के लिए ज़रूरी हैं।

  • तेज़ आवाज़ से बचाव: बहुत तेज़ आवाज़ में लंबे समय तक रहने से सुनने की क्षमता पर असर पड़ सकता है और टिनिटस का जोखिम बढ़ सकता है। NIDCD के अनुसार, तेज़ आवाज़ से बचना, आवाज़ कम रखना और ज़रूरत पड़ने पर ईयरप्लग या अन्य hearing protection का इस्तेमाल करना सुनने की सुरक्षा में मदद कर सकता है।

  • तनाव को कम रखने की कोशिश: आराम, हल्की शारीरिक गतिविधि और अपनी पसंद की शांत गतिविधियों को दिनचर्या में शामिल करना तनाव को संभालने में मदद कर सकता है। NHS भी टिनिटस से परेशान लोगों के लिए तनाव कम करने और नींद की अच्छी आदतों पर ध्यान देने की सलाह देता है।

अगर आप आयुर्वेदिक वेलनेस उत्पाद के बारे में जानकारी लेना चाहते हैं, तो उत्पाद के ingredients, उपयोग संबंधी जानकारी और label instructions को ध्यान से पढ़ें।  किसी भी supplement का उपयोग अपनी स्वास्थ्य स्थिति और चल रही दवाओं को ध्यान में रखते हुए डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह से करना बेहतर है।

ज़रूरी बात: ये सुझाव समग्र स्वास्थ्य और सहायक जीवनशैली के लिए हैं। इन्हें कान में जमा मैल, ब्लॉकेज या टिनिटस का प्रमाणित इलाज नहीं माना जाना चाहिए। NIDCD के अनुसार, टिनिटस के कई संभावित कारण हो सकते हैं, जिनमें सुनने की क्षमता में कमी, तेज़ आवाज़ का संपर्क और कुछ मामलों में इयरवैक्स भी शामिल हैं। 

कान के अंदर किसी तेल या घरेलू पदार्थ का उपयोग करने से पहले डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है। अगर कान में दर्द, सुनाई कम देना, डिस्चार्ज या लगातार टिनिटस जैसी परेशानी हो, तो डॉक्टर या ENT विशेषज्ञ से जाँच करवाना बेहतर है।

कब टिनिटस को केवल कान का मैल मानकर नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए?

हर टिनिटस का कारण इयरवैक्स नहीं होता। इन स्थितियों में डॉक्टर से मेडिकल मूल्यांकन करवाना ज़रूरी हो सकता है:

  • टिनिटस लगातार बना रहे।

  • मैल हटाने के बाद भी आवाज़ जारी रहे।

  • अचानक सुनाई कम देने लगे।

  • आवाज़ लगातार केवल एक कान में सुनाई दे।

  • कान से डिस्चार्ज या ख़ून आए।

  • कान में तेज़ दर्द हो।

  • चक्कर या कोई नया लक्षण दिखाई दे।

  • टिनिटस दिल की धड़कन के साथ तालमेल में सुनाई दे।

खास ध्यान दें: अचानक सुनाई कम देना केवल कान के मैल की समस्या मानकर नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। अचानक hearing loss होने पर तुरंत चिकित्सकीय मूल्यांकन करवाना ज़रूरी है, क्योंकि कुछ मामलों में यह medical emergency हो सकती है। 

कान में दर्द के अलग-अलग कारण हो सकते हैं। इसके संभावित कारणों और बचाव के बारे में कान में दर्द के कारण और लक्षण पढ़ सकते हैं। 

Earwax और Tinnitus से जुड़ी आम गलतफहमियां

भ्रांति 1 — कान में सीटी या घंटी जैसी आवाज़ है, मतलब कान में मैल जमा है।

तथ्य: ज़रूरी नहीं। टिनिटस के कई संभावित कारण हो सकते हैं और इयरवैक्स उनमें से केवल एक संभावित कारण है।

भ्रांति 2 — कान का सारा मैल निकाल देना चाहिए।

तथ्य: इयरवैक्स कान की प्राकृतिक सुरक्षा का हिस्सा है। अगर इससे कोई परेशानी नहीं हो रही है, तो इसे पूरी तरह निकालना ज़रूरी नहीं होता।

भ्रांति 3 — कॉटन बड से कान के अंदर सफाई करना सबसे अच्छा तरीका है।

तथ्य: कॉटन बड मैल को और अंदर धकेल सकता है और कान की नली या पर्दे को चोट पहुंचने का जोखिम बढ़ा सकता है।

भ्रांति 4 — वैक्स रिमूवल के बाद हर व्यक्ति का टिनिटस ठीक हो जाता है।

तथ्य: अगर टिनिटस वास्तव में इयरवैक्स ब्लॉकेज से जुड़ा है, तो मैल हटने के बाद सुधार हो सकता है। लेकिन दूसरे कारणों से होने वाला टिनिटस बना रह सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1. क्या कान में मैल जमा होने से टिनिटस हो सकता है?

हाँ, बहुत ज़्यादा इयरवैक्स जमा होकर ईयर कैनाल को ब्लॉक कर सकता है। ऐसी स्थिति में कुछ लोगों को कान में सीटी, घंटी या भिनभिनाहट जैसी आवाज़ महसूस हो सकती है। हालांकि, टिनिटस के कई कारण हो सकते हैं, इसलिए हर मामले में इसका कारण मैल ही हो, यह ज़रूरी नहीं है।

2. क्या मैल हटाने के बाद कान में सीटी की आवाज़ कम हो सकती है?

अगर आवाज़ आने की वजह वास्तव में इयरवैक्स ब्लॉकेज है, तो उसे सुरक्षित तरीके से हटाने के बाद परेशानी में सुधार हो सकता है। लेकिन अगर टिनिटस किसी दूसरे कारण से है, तो मैल हटाने के बाद भी यह बना रह सकता है।

3. कान का मैल सुनने की क्षमता को कैसे प्रभावित कर सकता है?

जब मैल ज़्यादा जमा होकर ईयर कैनाल को बंद कर देता है, तो आवाज़ कुछ लोगों को धीमी, दबी हुई या कम साफ़ सुनाई दे सकती है।

4. क्या कॉटन बड से कान साफ़ करना सुरक्षित है?

नहीं। कान के अंदर कॉटन बड डालने से मैल और अंदर जा सकता है और ईयर कैनाल या कान के पर्दे को चोट लगने का जोखिम बढ़ सकता है। इसलिए इन्हें कान के अंदर डालने से बचना चाहिए।

5. क्या कान का मैल अपने आप बाहर निकल सकता है?

हाँ। सामान्य तौर पर ईयरवैक्स धीरे-धीरे अपने आप बाहर निकलता रहता है। इसलिए हर व्यक्ति को इसे निकालने के लिए कान के अंदर सफाई करने की ज़रूरत नहीं होती।

6. Earwax blockage की जाँच कैसे होती है?

डॉक्टर कान के अंदर देखकर ब्लॉकेज की स्थिति का पता लगा सकते हैं। इसके लिए आमतौर पर ओटोस्कोप (Otoscope) जैसे उपकरण का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे ईयर कैनाल और कान के पर्दे को देखा जा सकता है।

7. अगर मैल हटाने के बाद भी टिनिटस रहे तो क्या करें? 

अगर मैल हटने के बाद भी टिनिटस बना रहता है, तो डॉक्टर या ENT विशेषज्ञ से जाँच करवाना बेहतर है, ताकि अन्य संभावित कारणों का मूल्यांकन किया जा सके। 

8. अचानक सुनाई कम देने पर क्या इसे Earwax समझना सही है?

नहीं। अचानक सुनाई कम देना केवल मैल की वजह से है, ऐसा मानकर इंतज़ार नहीं करना चाहिए। अचानक सुनने की क्षमता में कमी होने पर समय पर चिकित्सकीय जाँच ज़रूरी हो सकती है।

निष्कर्ष

बहुत ज़्यादा इयरवैक्स जमा होकर ईयर कैनाल को ब्लॉक कर सकता है। इससे कुछ लोगों को कान में भरापन, सुनने में कमी या टिनिटस जैसी परेशानी महसूस हो सकती है। लेकिन हर टिनिटस का कारण कान का मैल नहीं होता।

इसलिए केवल लक्षण देखकर खुद से कारण तय करने के बजाय, जरूरत पड़ने पर कान की जाँच करवाना बेहतर है। खासकर अगर परेशानी लगातार बनी रहे, मैल हटने के बाद भी आवाज़ आती रहे या सुनने में अचानक कमी हो, तो डॉक्टर या ENT विशेषज्ञ से सलाह लेना चाहिए।

Sources / संदर्भ

  1. National Institute on Deafness and Other Communication Disorders (NIDCD) — Tinnitus: Causes, Symptoms and Treatment.

  2. NHS (National Health Service) — Earwax build-up: Symptoms, causes and treatment.

  3. NHS (National Health Service) — Tinnitus: Symptoms, causes and when to seek medical help.

  4. NIDCD — Sudden Sensorineural Hearing Loss (Sudden Deafness).

  5. NIDCD — What Is Tinnitus? — Causes and Treatment 

अस्वीकरण: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के लिए है। यह व्यक्तिगत चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार का विकल्प नहीं है। लगातार टिनिटस, अचानक सुनाई कम देना, कान से डिस्चार्ज या तेज़ दर्द जैसी समस्या होने पर योग्य डॉक्टर या ENT विशेषज्ञ से संपर्क करें।

Disclaimer: This article is for general informational purposes only and is not a substitute for professional medical advice. Always consult a qualified Ayurvedic practitioner or physician before acting on any information here.

About the Author

Dr Suhail Siddiqui
Dr Suhail Siddiqui

डॉ. मोहम्मद सुहैल (B.A.M.S.) एक योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक हैं। उन्होंने वर्ष 2024 में बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एंड सर्जरी (B.A.M.S.) की डिग्री प्राप्त की है। उन्हें आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा, जीवनशैली प्रबंधन और रोगों की रोकथाम से जुड़े विषयों में विशेष रुचि है। डॉ. सुहैल मुख्य रूप से कान, नाक और गला (ENT) से संबंधित समस्याओं, टिनिटस (Tinnitus), कान में फंगल इंफेक्शन, हकलाना, पथरी, मधुमेह, पाचन संबंधी समस्याओं तथा अन्य सामान्य स्वास्थ्य विषयों पर आयुर्वेद आधारित जानकारी साझा करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल स्वास्थ्य विषयों को सरल भाषा में समझाकर लोगों तक विश्वसनीय और उपयोगी जानकारी पहुँचाना है। SS Herbal India पर प्रकाशित लेखों के लिए डॉ. सुहैल आयुर्वेदिक ग्रंथों, उपलब्ध आधुनिक शोध, चिकित्सा साहित्य तथा विश्वसनीय स्वास्थ्य स्रोतों का अध्ययन करते हैं। प्रत्येक लेख का उद्देश्य पाठकों को संतुलित, तथ्य-आधारित और उपयोगी स्वास्थ्य जानकारी प्रदान करना है। यह जानकारी केवल शैक्षणिक एवं जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित की जाती है और किसी भी प्रकार से व्यक्तिगत चिकित्सकीय सलाह का विकल्प नहीं है। डॉ. सुहैल का लक्ष्य लोगों को सही स्वास्थ्य जानकारी देकर उन्हें स्वस्थ जीवनशैली अपनाने, रोगों की बेहतर समझ विकसित करने और अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बनने में सहायता करना है।

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