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कान में सीटी या घंटी बजना (टिनिटस): कारण, लक्षण, इलाज और आयुर्वेदिक उपचार

क्या आपके कानों में बिना किसी बाहरी आवाज़ के सीटी, घंटी, भनभनाहट या गुनगुनाने जैसी आवाज़ें सुनाई देती हैं? इसे टिनिटस (Tinnitus) कहा जाता है। यह कोई बीमारी नहीं, बल्कि किसी दूसरी स्वास्थ्य समस्या का एक लक्षण हो सकता है। इस लेख में आसान भाषा में जानिए टिनिटस के संभावित कारण, शुरुआती लक्षण, जांच, उपचार के विकल्प और कब डॉक्टर से सलाह लेना ज़रूरी होता है।

Dr Suhail SiddiquiWritten By Dr Suhail SiddiquiPublished: 14 July 2026· 0 min read
कान में सीटी या घंटी बजना (टिनिटस): कारण, लक्षण, इलाज और आयुर्वेदिक उपचार


अगर आपको बिना किसी बाहरी आवाज़ के कानों में सीटी, घंटी, भनभनाहट या गुनगुनाने जैसी आवाज़ें सुनाई देती हैं, तो इसे टिनिटस (Tinnitus) कहा जाता है। यह अपने आप में कोई बीमारी नहीं, बल्कि किसी दूसरी स्वास्थ्य समस्या का एक लक्षण हो सकता है।

टिनिटस कई कारणों से हो सकता है, जैसे लंबे समय तक तेज़ आवाज़ के संपर्क में रहना, बढ़ती उम्र, कान में मैल जमा होना, बार-बार हेडफ़ोन का इस्तेमाल, कुछ दवाओं के दुष्प्रभाव, हाई ब्लड प्रेशर या तनाव। कई लोगों में यह समस्या कुछ समय बाद अपने आप कम हो जाती है, लेकिन कुछ मामलों में यह लंबे समय तक बनी रह सकती है और नींद, एकाग्रता तथा रोज़मर्रा की ज़िंदगी को प्रभावित कर सकती है।

अगर कानों में आवाज़ बार-बार आए, लगातार बनी रहे या इसके साथ सुनने में कमी, चक्कर या कान में दर्द जैसे लक्षण भी हों, तो बिना देर किए ENT विशेषज्ञ से सलाह लेना ज़रूरी है। सही कारण की समय पर पहचान होने से इलाज करना आसान हो सकता है।

इस लेख में हम आसान भाषा में समझेंगे कि टिनिटस क्या है, इसके कारण, लक्षण, जांच, उपचार के विकल्प और किन परिस्थितियों में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

कानों में बजने वाली आवाज़ क्या होती है?

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टिनिटस (Tinnitus) एक ऐसी स्थिति है जिसमें व्यक्ति को बिना किसी बाहरी आवाज़ के कान या सिर के अंदर सीटी, भिनभिनाहट, घंटी, गूंज या फुसफुसाहट जैसी आवाज़ें सुनाई देती हैं। यह अपने आप में कोई बीमारी नहीं है, बल्कि किसी दूसरी स्वास्थ्य समस्या का एक लक्षण (Symptom) हो सकता है। यह परेशानी एक या दोनों कानों में हो सकती है और कुछ लोगों में लगातार या बीच-बीच में महसूस होती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, टिनिटस कई कारणों से हो सकता है। इनमें लंबे समय तक तेज़ आवाज़ के संपर्क में रहना, उम्र बढ़ने के साथ सुनने की क्षमता कम होना, कान में मैल जमा होना, कुछ दवाओं के दुष्प्रभाव, हाई ब्लड प्रेशर, तनाव या सुनने से जुड़ी अन्य समस्याएँ शामिल हो सकती हैं। सही कारण का पता लगाने के लिए डॉक्टर द्वारा जांच कराना ज़रूरी होता है।

आयुर्वेद में इस स्थिति को "कर्णनाद" कहा गया है। पारंपरिक आयुर्वेदिक दृष्टिकोण के अनुसार, जब वात दोष असंतुलित हो जाता है, तो उसका असर कानों और श्रवण तंत्र पर पड़ सकता है, जिससे इस तरह की आवाज़ें महसूस हो सकती हैं। हालांकि, यह आयुर्वेद की पारंपरिक व्याख्या है। यदि कानों में आवाज़ लंबे समय तक बनी रहे या इसके साथ सुनने में कमी, चक्कर या दर्द जैसी समस्या भी हो, तो ईएनटी विशेषज्ञ (ENT Specialist) से सलाह लेना सबसे सही कदम है।

कान में सीटी या घंटी बजने के प्रमुख संकेत

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टिनिटस (Tinnitus) के लक्षण हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकते हैं। किसी को हल्की आवाज़ महसूस होती है, जबकि कुछ लोगों में यह समस्या लगातार बनी रहती है। इसके सामान्य संकेत इस प्रकार हैं:

  • कान में सीटी, भिनभिनाहट या गुनगुनाहट जैसी आवाज़ सुनाई देना।

  • घंटी, गूंज या फुसफुसाहट जैसी आवाज़ महसूस होना।

  • एक या दोनों कानों में आवाज़ सुनाई देना।

  • रात या शांत जगह पर आवाज़ ज़्यादा स्पष्ट महसूस होना।

  • सुनने की क्षमता पहले की तुलना में कम लगना।

  • सिरदर्द, चक्कर आना या नींद आने में परेशानी होना।

  • ध्यान लगाने में कठिनाई होना या बार-बार चिड़चिड़ापन महसूस होना।

अगर ये लक्षण कुछ दिनों से ज़्यादा समय तक बने रहें, बार-बार महसूस हों या इनके साथ सुनने में कमी, तेज़ चक्कर या कान में दर्द भी हो, तो बिना देर किए ईएनटी (ENT) विशेषज्ञ से जांच कराना चाहिए। सही समय पर कारण का पता चलने से उचित इलाज और समस्या को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।

कानों में आवाज़ आने की मुख्य वजहें

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टिनिटस (Tinnitus) कई अलग-अलग कारणों से हो सकता है। सही वजह का पता लगाने के लिए डॉक्टर की जांच ज़रूरी होती है। इसके कुछ सामान्य कारण इस प्रकार हैं:

  • लंबे समय तक तेज़ आवाज़ के संपर्क में रहना, जैसे फैक्ट्री, डीजे, लाउडस्पीकर या तेज़ आवाज़ में हेडफोन का इस्तेमाल।

  • उम्र बढ़ने के साथ सुनने की क्षमता कम होना, जिससे टिनिटस की संभावना बढ़ सकती है।

  • कान में मैल (Ear Wax) जमा होना या कान में संक्रमण होना।

  • लगातार तनाव और चिंता, जो कुछ लोगों में टिनिटस के लक्षणों को बढ़ा सकते हैं।

  • हाई ब्लड प्रेशर या रक्त संचार (Blood Circulation) से जुड़ी कुछ समस्याएँ।

  • कुछ दवाओं के दुष्प्रभाव, जिनसे कानों में आवाज़ आने की शिकायत हो सकती है।

  • गर्दन, सिर या जबड़े की चोट, जो कुछ मामलों में इस समस्या से जुड़ी हो सकती है।

आयुर्वेदिक दृष्टिकोण: पारंपरिक आयुर्वेद के अनुसार, शरीर में वात दोष का असंतुलन कानों से जुड़ी कुछ समस्याओं का कारण माना जाता है। हालांकि, यह आयुर्वेद की पारंपरिक व्याख्या है। यदि कानों में आवाज़ लगातार बनी रहे, तो सही कारण जानने के लिए ईएनटी (ENT) विशेषज्ञ से जांच कराना सबसे उचित होता है।

टिनिटस कब गंभीर हो सकता है?

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हर बार सीटी, घंटी या भिनभिनाहट जैसी ध्वनि सुनाई देना किसी गंभीर बीमारी का संकेत नहीं होता। लेकिन अगर यह परेशानी बार-बार हो, लंबे समय तक बनी रहे या आपकी रोज़मर्रा की ज़िंदगी को प्रभावित करने लगे, तो इसे नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। समय पर जांच कराने से असली कारण पता चल सकता है और ज़रूरत पड़ने पर सही इलाज शुरू किया जा सकता है।

अगर यह समस्या लंबे समय तक बनी रहे, तो कुछ लोगों को ये दिक्कतें हो सकती हैं:

  • नींद पूरी न होना या बार-बार नींद टूटना।

  • काम या पढ़ाई में ध्यान लगाने में परेशानी होना।

  • तनाव, चिंता या चिड़चिड़ापन बढ़ जाना।

  • सुनने की क्षमता पहले की तुलना में कम महसूस होना।

  • रोज़मर्रा के काम और जीवन की गुणवत्ता पर असर पड़ना।

इन स्थितियों में डॉक्टर से ज़रूर मिलें:

  • यह परेशानी कई दिनों तक लगातार बनी रहे।

  • समस्या अचानक शुरू हो जाए।

  • इसके साथ सुनने की क्षमता कम होने लगे।

  • चक्कर, दर्द या कान से पानी अथवा खून आने जैसी शिकायत भी हो।

  • इसकी वजह से नींद, काम या सामान्य दिनचर्या प्रभावित होने लगे।

ऐसी स्थिति में ईएनटी (ENT) विशेषज्ञ से जांच कराना सबसे सही कदम है। सही समय पर कारण का पता चलने और उचित इलाज मिलने से इस समस्या को बेहतर तरीके से नियंत्रित किया जा सकता है।

आयुर्वेद में कर्णनाद (टिनिटस) को कैसे देखा जाता है?

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आयुर्वेद में टिनिटस को "कर्णनाद" कहा गया है। पारंपरिक आयुर्वेदिक मान्यता के अनुसार, यह समस्या मुख्य रूप से वात दोष के असंतुलन से जुड़ी मानी जाती है। इसलिए आयुर्वेद में उपचार का उद्देश्य शरीर का संतुलन बनाए रखना और समग्र स्वास्थ्य को बेहतर करना होता है। आमतौर पर ये तरीके अपनाए जाते हैं:

कर्णपूरण (औषधीय तेल का प्रयोग)

  • आयुर्वेद में प्रशिक्षित वैद्य की देखरेख में कर्णपूरण किया जाता है।

  • इसमें व्यक्ति की स्थिति के अनुसार औषधीय तेल का उपयोग किया जा सकता है।

  • यह प्रक्रिया हर व्यक्ति के लिए उपयुक्त नहीं होती, इसलिए इसे केवल विशेषज्ञ की सलाह पर ही करवाना चाहिए।

आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ

कुछ जड़ी-बूटियों का उल्लेख आयुर्वेदिक ग्रंथों में मानसिक शांति और समग्र स्वास्थ्य के लिए मिलता है, जैसे:

  • ब्राह्मी

  • अश्वगंधा

  • शंखपुष्पी

  • सारस्वतारिष्ट (वैद्य की सलाह अनुसार)

इनका सेवन हमेशा पंजीकृत आयुर्वेदाचार्य की सलाह के बाद ही करना चाहिए, क्योंकि सही दवा और मात्रा व्यक्ति की प्रकृति तथा स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करती है।

पंचकर्म चिकित्सा

कुछ मामलों में आयुर्वेदाचार्य नस्य या शिरोधारा जैसी पंचकर्म प्रक्रियाओं की सलाह दे सकते हैं। पारंपरिक आयुर्वेद के अनुसार इनका उद्देश्य शरीर में संतुलन बनाए रखना और तनाव कम करने में सहयोग देना है।

खान-पान और दिनचर्या

आयुर्वेद में स्वस्थ दिनचर्या को भी महत्वपूर्ण माना गया है। इसके लिए आमतौर पर सलाह दी जाती है:

  • गर्म और ताज़ा भोजन को प्राथमिकता दें।

  • बहुत अधिक ठंडे, सूखे और तले हुए भोजन का सेवन सीमित रखें।

  • पर्याप्त नींद लें और तनाव कम करने की कोशिश करें।

  • नियमित योग, प्राणायाम और ध्यान को दिनचर्या में शामिल करें।

ध्यान दें: टिनिटस के लिए कोई एक ऐसी आयुर्वेदिक दवा नहीं है जो हर व्यक्ति पर समान रूप से प्रभावी हो। सही उपचार व्यक्ति की प्रकृति, लक्षण और स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करता है। यदि यह समस्या लगातार बनी रहे, तो सबसे पहले ईएनटी (ENT) विशेषज्ञ से जांच कराएं। आयुर्वेदिक उपचार केवल पंजीकृत आयुर्वेदाचार्य की सलाह पर ही शुरू करें।

घर पर अपनाए जाने वाले आसान उपाय

कुछ आसान आदतें टिनिटस से होने वाली असहजता को कम करने और रोज़मर्रा की ज़िंदगी को बेहतर बनाने में मदद कर सकती हैं। हालांकि, ये उपाय डॉक्टर के इलाज का विकल्प नहीं हैं।

  • तनाव कम करने की कोशिश करें – गहरी सांस लेने के अभ्यास, ध्यान (Meditation) और रिलैक्सेशन तकनीकें कुछ लोगों में तनाव कम करने में मदद कर सकती हैं।

  • पर्याप्त नींद लें – अच्छी नींद लेने से शरीर और मन दोनों को आराम मिलता है, जिससे कुछ लोगों में लक्षण कम महसूस हो सकते हैं।

  • तेज़ आवाज़ से बचें – बहुत तेज़ संगीत, शोर या लंबे समय तक हेडफोन के इस्तेमाल से बचें। ज़रूरत पड़ने पर ईयर प्रोटेक्शन का उपयोग करें।

  • कैफीन और नमक का सेवन संतुलित रखें – कुछ लोगों में अधिक चाय, कॉफी या नमक लेने से लक्षण बढ़ सकते हैं। यदि ऐसा महसूस हो, तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार इनका सेवन कम करें।

  • कान में कोई भी तेल या घरेलू चीज़ न डालें – बिना डॉक्टर या आयुर्वेदाचार्य की सलाह के कान में तेल, लहसुन या कोई अन्य घरेलू उपाय इस्तेमाल न करें, क्योंकि इससे नुकसान भी हो सकता है।

योग और प्राणायाम की क्या भूमिका हो सकती है?

योग और प्राणायाम टिनिटस का इलाज नहीं हैं, लेकिन तनाव कम करने और मानसिक शांति बनाए रखने में सहायक हो सकते हैं। इन्हें नियमित रूप से और सही तरीके से करना ज़रूरी है।

  • अनुलोम-विलोम प्राणायाम – श्वास पर नियंत्रण और मानसिक शांति बनाए रखने में सहायक माना जाता है।

  • भ्रामरी प्राणायाम – गुनगुनाहट वाली श्वास का यह अभ्यास तनाव कम करने और मन को शांत रखने में मदद कर सकता है।

  • गर्दन के हल्के स्ट्रेचिंग व्यायाम – लंबे समय तक एक ही मुद्रा में बैठने से होने वाली गर्दन की जकड़न कम करने में मदद मिल सकती है।

  • ध्यान (Meditation) – रोज़ 10–15 मिनट ध्यान करने से तनाव और चिंता कम करने में सहायता मिल सकती है।

ध्यान दें: यदि आपको चक्कर, गंभीर कान की समस्या या कोई अन्य स्वास्थ्य समस्या है, तो योग या व्यायाम शुरू करने से पहले डॉक्टर या योग्य योग प्रशिक्षक से सलाह ज़रूर लें।

क्या टिनिटस ठीक हो सकता है?

टिनिटस (Tinnitus) का इलाज और ठीक होने का समय इसके कारण पर निर्भर करता है। अगर यह कान में मैल जमने, संक्रमण, तेज़ आवाज़ के संपर्क या अस्थायी तनाव जैसी वजह से हुआ है, तो सही इलाज के बाद कई लोगों में लक्षण कम हो सकते हैं। वहीं अगर इसका कारण उम्र बढ़ने, सुनने की क्षमता में कमी या नसों से जुड़ी कोई स्थायी समस्या है, तो इलाज का उद्देश्य लक्षणों को कम करना और जीवन की गुणवत्ता बेहतर बनाना होता है।

हर व्यक्ति में टिनिटस का अनुभव अलग हो सकता है, इसलिए यह बताना संभव नहीं है कि यह कितने दिनों में ठीक होगा।

टिनिटस से राहत पाने में कितना समय लग सकता है?

यह समय कई बातों पर निर्भर करता है, जैसे:

  • टिनिटस होने का मुख्य कारण

  • समस्या कितने समय से है

  • इलाज कितनी जल्दी शुरू किया गया

  • डॉक्टर की सलाह और उपचार का नियमित पालन

  • व्यक्ति की समग्र स्वास्थ्य स्थिति

अगर समस्या कुछ दिनों या हफ्तों से ज़्यादा बनी रहे, बार-बार हो, या इसके साथ सुनने में कमी, चक्कर या कान में दर्द भी हो, तो ईएनटी (ENT) विशेषज्ञ से जांच कराना ज़रूरी है।

आयुर्वेदिक दृष्टिकोण: आयुर्वेद में उपचार का उद्देश्य शरीर के संतुलन, विशेषकर वात दोष, को बेहतर बनाना माना जाता है। यह एक सहायक (Complementary) तरीका हो सकता है, लेकिन इसे आधुनिक चिकित्सा या ईएनटी विशेषज्ञ की सलाह का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।

किन लक्षणों को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए?

हर बार टिनिटस (कानों में आवाज़ आना) गंभीर समस्या का संकेत नहीं होता। लेकिन अगर इसके साथ कुछ खास लक्षण दिखाई दें, तो बिना देर किए डॉक्टर या ईएनटी (ENT) विशेषज्ञ से जांच करानी चाहिए। समय पर इलाज कराने से कारण का पता लगाना और सही उपचार शुरू करना आसान हो जाता है।

ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें:

  • अचानक एक कान या दोनों कानों में तेज़ आवाज़ (टिनिटस) शुरू हो जाए।

  • सुनने की क्षमता अचानक कम होने लगे।

  • बार-बार चक्कर आए या संतुलन बनाए रखने में दिक्कत हो।

  • कान में तेज़ दर्द, सूजन या कान से पानी/खून निकलने लगे।

  • सिर में गंभीर चोट के बाद कानों में आवाज़ सुनाई देने लगे।

  • टिनिटस के साथ चेहरे में कमजोरी, बोलने में परेशानी या शरीर के किसी हिस्से में सुन्नपन महसूस हो।

ध्यान दें: अगर टिनिटस के साथ अचानक सुनाई देना कम हो जाए, तेज़ चक्कर आए या चेहरे में कमजोरी महसूस हो, तो इसे सामान्य समस्या समझकर न टालें। ऐसी स्थिति में तुरंत अस्पताल या ईएनटी विशेषज्ञ से संपर्क करना ज़रूरी है।

निष्कर्ष

टिनिटस (कानों में बिना बाहरी आवाज़ के सीटी, घंटी या भिनभिनाहट सुनाई देना) अपने आप में कोई बीमारी नहीं, बल्कि किसी दूसरी समस्या का संकेत हो सकता है। इसलिए अगर यह बार-बार हो, लंबे समय तक बना रहे या इसके साथ सुनने में कमी, चक्कर या कान में दर्द जैसी दिक्कत भी हो, तो इसे नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए।

सही समय पर जांच, कारण के अनुसार इलाज और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने से कई लोगों में लक्षणों को बेहतर तरीके से नियंत्रित किया जा सकता है। आयुर्वेद भी शरीर के संतुलन, विशेषकर वात दोष, को बनाए रखने पर ज़ोर देता है और इसे एक सहायक (Complementary) दृष्टिकोण के रूप में देखा जा सकता है। हालांकि, इसे आधुनिक चिकित्सा का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।

अगर आपको लगातार टिनिटस की समस्या हो रही है, तो किसी ईएनटी (ENT) विशेषज्ञ या पंजीकृत आयुर्वेदाचार्य से सलाह लेकर अपनी स्थिति के अनुसार सही उपचार योजना बनवाना सबसे सुरक्षित और प्रभावी कदम है।

डिस्क्लेमर

यह लेख केवल सामान्य जानकारी और जागरूकता के उद्देश्य से लिखा गया है। इसमें दी गई जानकारी किसी भी तरह से डॉक्टर की सलाह, जांच या उपचार का विकल्प नहीं है।

अगर आपको टिनिटस (कानों में आवाज़ आना) या इससे जुड़ी कोई भी समस्या लंबे समय तक बनी रहती है, अचानक शुरू होती है या सुनने में कमी, चक्कर या कान में दर्द जैसे लक्षण दिखाई देते हैं, तो बिना देर किए ईएनटी (ENT) विशेषज्ञ से सलाह लें।

इसी तरह, किसी भी आयुर्वेदिक दवा, जड़ी-बूटी, सप्लीमेंट, घरेलू उपाय, योग या प्राणायाम को शुरू करने से पहले अपनी स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार योग्य डॉक्टर या पंजीकृत आयुर्वेदाचार्य से परामर्श ज़रूर करें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1. क्या टिनिटस अपने आप ठीक हो सकता है?

कुछ मामलों में हाँ। अगर टिनिटस तेज़ आवाज़ के संपर्क, कान में मैल जमने या किसी अस्थायी संक्रमण की वजह से हुआ है, तो कारण ठीक होने पर लक्षण कम हो सकते हैं। लेकिन अगर यह समस्या 1–2 सप्ताह से ज़्यादा रहे या बार-बार हो, तो ईएनटी (ENT) विशेषज्ञ से जांच करानी चाहिए।


2. क्या टिनिटस हमेशा के लिए रहता है?

ज़रूरी नहीं। कई लोगों में सही कारण का इलाज होने पर टिनिटस कम हो जाता है या पूरी तरह ठीक हो सकता है। लेकिन अगर इसकी वजह उम्र बढ़ना, सुनने की क्षमता कम होना या नसों से जुड़ी कोई समस्या है, तो इसे लंबे समय तक मैनेज करने की ज़रूरत पड़ सकती है। सही इलाज के लिए डॉक्टर की सलाह लेना सबसे अच्छा विकल्प है।


3. क्या हेडफोन या ईयरफोन से टिनिटस हो सकता है?

हाँ, लंबे समय तक तेज़ आवाज़ में हेडफोन या ईयरफोन इस्तेमाल करने से टिनिटस का खतरा बढ़ सकता है। ज़्यादा वॉल्यूम पर लगातार ऑडियो सुनने से सुनने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। इसलिए हमेशा सुरक्षित वॉल्यूम रखें और लंबे समय तक लगातार हेडफोन इस्तेमाल करने से बचें।


4. क्या टिनिटस के साथ सुनाई देना भी कम हो सकता है?

कुछ लोगों में टिनिटस के साथ सुनने की क्षमता भी प्रभावित हो सकती है, लेकिन ऐसा हर व्यक्ति में नहीं होता। अगर आवाज़ आने के साथ सुनाई कम दे, चक्कर आए या दर्द महसूस हो, तो बिना देर किए ईएनटी (ENT) विशेषज्ञ से संपर्क करें।


5. क्या आयुर्वेद टिनिटस में मदद कर सकता है?

आयुर्वेद में टिनिटस को कर्णनाद कहा गया है। पारंपरिक आयुर्वेद में वात संतुलन, कुछ जड़ी-बूटियों, पंचकर्म और जीवनशैली में सुधार जैसे उपाय बताए गए हैं। इन्हें सहायक (Complementary) देखभाल के रूप में अपनाया जा सकता है। हालांकि, इनके प्रभाव के समर्थन में उच्च गुणवत्ता वाले वैज्ञानिक प्रमाण अभी सीमित हैं। इसलिए किसी भी आयुर्वेदिक दवा या उपचार को शुरू करने से पहले योग्य आयुर्वेदाचार्य से सलाह लें। अगर टिनिटस अचानक शुरू हो, बहुत तेज़ हो या सुनने की क्षमता प्रभावित हो रही हो, तो सबसे पहले ईएनटी (ENT) विशेषज्ञ से जांच कराना ज़रूरी है।

Disclaimer: This article is for general informational purposes only and is not a substitute for professional medical advice. Always consult a qualified Ayurvedic practitioner or physician before acting on any information here.

Dr Suhail Siddiqui
Dr Suhail Siddiqui

डॉ. मोहम्मद सुहैल (B.A.M.S.) एक योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक हैं। उन्होंने वर्ष 2024 में बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एंड सर्जरी (B.A.M.S.) की डिग्री प्राप्त की है। उन्हें आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा, जीवनशैली प्रबंधन और रोगों की रोकथाम से जुड़े विषयों में विशेष रुचि है। डॉ. सुहैल मुख्य रूप से कान, नाक और गला (ENT) से संबंधित समस्याओं, टिनिटस (Tinnitus), कान में फंगल इंफेक्शन, हकलाना, पथरी, मधुमेह, पाचन संबंधी समस्याओं तथा अन्य सामान्य स्वास्थ्य विषयों पर आयुर्वेद आधारित जानकारी साझा करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल स्वास्थ्य विषयों को सरल भाषा में समझाकर लोगों तक विश्वसनीय और उपयोगी जानकारी पहुँचाना है। SS Herbal India पर प्रकाशित लेखों के लिए डॉ. सुहैल आयुर्वेदिक ग्रंथों, उपलब्ध आधुनिक शोध, चिकित्सा साहित्य तथा विश्वसनीय स्वास्थ्य स्रोतों का अध्ययन करते हैं। प्रत्येक लेख का उद्देश्य पाठकों को संतुलित, तथ्य-आधारित और उपयोगी स्वास्थ्य जानकारी प्रदान करना है। यह जानकारी केवल शैक्षणिक एवं जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित की जाती है और किसी भी प्रकार से व्यक्तिगत चिकित्सकीय सलाह का विकल्प नहीं है। डॉ. सुहैल का लक्ष्य लोगों को सही स्वास्थ्य जानकारी देकर उन्हें स्वस्थ जीवनशैली अपनाने, रोगों की बेहतर समझ विकसित करने और अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बनने में सहायता करना है।

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